मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय बोले — “सुशासन कोई एक दिन का लक्ष्य नहीं, निरंतर सुधार की प्रक्रिया है” | ई-ऑफिस, ई-डिस्ट्रिक्ट पोर्टल और लोक सेवा गारंटी अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर
रायपुर, 13 अक्टूबर 2025 | मो इसराइल बबलू
छत्तीसगढ़ में सुशासन अब केवल नारा नहीं, बल्कि प्रशासनिक संस्कृति का हिस्सा बनता जा रहा है। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में मंत्रालय के महानदी भवन स्थित ऑडिटोरियम में सोमवार को आयोजित ‘सुशासन संवाद’ कार्यक्रम ने शासन के डिजिटल और पारदर्शी भविष्य की रूपरेखा स्पष्ट कर दी।
कार्यक्रम में प्रदेश के सभी कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक, विभागीय सचिव और वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए, जबकि जिलों के नवाचारों की प्रस्तुति ने छत्तीसगढ़ के प्रशासनिक परिवर्तन की जीवंत झलक पेश की।


मुख्यमंत्री साय बोले — “नवाचार तुगलकी प्रयोग नहीं, नागरिक सुविधा का साधन बनें”
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि प्रशासनिक नवाचार तभी सार्थक हैं जब वे नागरिकों के जीवन में स्थायी परिवर्तन लाएं। उन्होंने अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि “नवाचार तुगलकी प्रयोग नहीं, बल्कि जनसेवा का माध्यम बनें।”
साय ने निर्देश दिया कि हर नवाचार से पहले जनता की राय ली जाए और उसके प्रभाव का फीडबैक भी अनिवार्य रूप से दर्ज किया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि नवाचारों की स्थायित्व नीति बननी चाहिए ताकि अधिकारी बदलने पर भी योजनाएं बंद न हों।
लोक सेवा गारंटी अधिनियम पर सख्ती — देरी पर अधिकारियों पर होगी कार्रवाई
मुख्यमंत्री ने लोक सेवा गारंटी अधिनियम को सरकार की सबसे प्रमुख पहल बताते हुए कहा कि निर्धारित समय में सेवा उपलब्ध नहीं कराने वाले अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने कहा कि अगली समीक्षा बैठक में यह देखा जाएगा कि कितने प्रकरण समय पर निपटाए गए और कितने अधिकारियों पर अधिनियम के तहत दंडात्मक कार्रवाई की गई।
‘पुराने दस्तावेज हटाओ’ अभियान और ई-ऑफिस प्रणाली को मिली प्राथमिकता
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने ‘पुराने दस्तावेज हटाओ’ अभियान की सराहना की और कहा कि पुराने अनुपयोगी फाइलें केवल जगह ही नहीं घेरतीं, बल्कि शासन की कार्यकुशलता पर भी असर डालती हैं।
उन्होंने सभी कलेक्टरों को निर्देश दिया कि कार्यालयों को सुव्यवस्थित करें और ई-ऑफिस प्रणाली का शत-प्रतिशत क्रियान्वयन सुनिश्चित करें। “अब समय मैनुअल नहीं, डिजिटल गवर्नेंस का है,” उन्होंने कहा।
ई-डिस्ट्रिक्ट पोर्टल और डिजिटल गवर्नेंस को मिलेगा नया आयाम
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि डिजिटल सेवाएं ही पारदर्शी शासन की रीढ़ हैं। उन्होंने कलेक्टरों को निर्देश दिया कि ई-डिस्ट्रिक्ट पोर्टल पर अधिकाधिक सेवाएं उपलब्ध कराई जाएं और नागरिकों में ऑनलाइन सेवाओं के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए विशेष अभियान चलाया जाए।
उन्होंने कहा, “हर सेवा को डिजिटल करना ही जवाबदेह शासन का सबसे बड़ा कदम है।”
जन शिकायतों के समाधान में पारदर्शी और डिजिटल ट्रैकिंग व्यवस्था लागू
मुख्यमंत्री ने कहा कि नागरिकों की शिकायतों का त्वरित और पारदर्शी निराकरण प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है। सभी जिलों में शिकायतों की डिजिटल ट्रैकिंग व्यवस्था लागू करने के निर्देश दिए गए हैं ताकि भ्रष्टाचार की गुंजाइश खत्म हो और जनता का विश्वास मजबूत हो।
फील्ड विजिट होगी प्रशासन की स्थायी प्रक्रिया
साय ने कहा कि योजनाओं की वास्तविक स्थिति केवल फील्ड विजिट से ही पता चल सकती है। “आकस्मिक निरीक्षण नहीं, स्थायी फील्ड विजिट प्रणाली अपनानी होगी।”
उन्होंने कहा कि केवल आंकड़ों पर निर्भर शासन नहीं चलेगा — ज़मीनी सच्चाई समझना ही वास्तविक सुशासन है।
मुख्य सचिव विकास शील बोले — “ब्यूरोक्रेसी को ट्रांसफॉर्म करने का समय आ गया है”
मुख्य सचिव श्री विकास शील ने कहा कि नई तकनीक और नई कार्यसंस्कृति के बिना सुशासन संभव नहीं है। उन्होंने अधिकारियों को समयबद्ध, अनुशासित और उदाहरण प्रस्तुत करने वाला व्यवहार अपनाने का आह्वान किया।
कॉफी टेबल बुक का विमोचन और जिलों के नवाचारों की झलक
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने जिलों में किए गए नवाचारों पर आधारित ‘कॉफी टेबल बुक’ का विमोचन किया।
- जशपुर जिले के ‘जशप्योर’ ब्रांड के स्वास्थ्यवर्धक उत्पादों और ‘महुआ सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ की सफलता की चर्चा रही, जिससे स्थानीय उत्पादों की बिक्री में 300% वृद्धि हुई।
- नारायणपुर जिले के ‘इंटिफाई डेटा प्लेटफॉर्म’ के जरिए नक्सल गतिविधियों की ट्रैकिंग की जा रही है।
- दंतेवाड़ा जिले ने ब्लॉकचेन तकनीक से 7 लाख भूमि अभिलेखों का डिजिटाइजेशन किया, जिससे पारदर्शिता और त्वरित निपटारा संभव हुआ।
- रायपुर जिले की ‘टीम प्रहरी’ पहल ने प्रशासन, पुलिस और नगर निगम के समन्वित प्रयासों से नागरिक सेवाओं को नई गति दी है।
मुख्यमंत्री का विज़न — “2047 तक विकसित भारत की अग्रिम पंक्ति में खड़ा होगा छत्तीसगढ़”
मुख्यमंत्री साय ने अंत में कहा — “सुशासन कोई एक दिन का कार्यक्रम नहीं, बल्कि यह निरंतर आत्मसुधार की यात्रा है। छोटे-छोटे प्रयास ही विकसित छत्तीसगढ़ की बड़ी तस्वीर बनाएंगे।”
उन्होंने अधिकारियों से अपेक्षा की कि वे जनता के बीच जाएं, योजनाओं का वास्तविक असर देखें और तकनीक व अनुशासन को प्रशासन की संस्कृति का हिस्सा बनाएं।



