समाचार विशेष / भ्रष्टाचार पर प्रहार
मो इसराइल बबलू|बिलासपुर
अंतरजातीय विवाह योजना से लेकर छात्रावास मरम्मत तक—आदिवासी विकास विभाग में रिश्वतखोरी, फर्जी बिल और ठेकेबाजी के खुलासे ने खोली पूरी व्यवस्था की पोल

बिलासपुर। आदिम जाति कल्याण विभाग में एक के बाद एक घोटाले उजागर हो रहे हैं। शुक्रवार को विभाग का विधि शाखा में पदस्थ बाबू मनोज तोड़ेकर 10 हजार रुपये की रिश्वत लेते एसीबी (भ्रष्टाचार निवारण ब्यूरो) के हत्थे चढ़ा।
वह एक अंतरजातीय विवाह प्रोत्साहन योजना के लाभार्थी युवक से फाइल आगे बढ़ाने के बदले रिश्वत मांग रहा था।
इस कार्रवाई के बाद विभाग में हड़कंप मच गया है।
इसी विभाग के सहायक आयुक्त प्रकाश चंद्र लहरे पर भी फर्जी बिल बनवाकर करोड़ों की अवैध कमाई के आरोप लगे हैं, जिनकी 17 संपत्तियों की विस्तृत सूची एसीबी को सौंप दी गई है।
इधर, विभाग द्वारा हाल में जारी 82.99 लाख की छात्रावास मरम्मत निविदा को भी प्रशासन ने गंभीर अनियमितताओं के चलते निरस्त कर दिया है।
तीनों घटनाएं इस बात का सबूत हैं कि आदिवासी कल्याण विभाग में भ्रष्टाचार की जड़ें गहरी हैं, और अब एसीबी पूरे विभाग की वित्तीय गतिविधियों की जांच में जुट गई है।
🚨 पहला मामला : बाबू मनोज तोड़ेकर रंगे हाथ पकड़ा गया
विभाग की विधि शाखा में कार्यरत बाबू मनोज तोड़ेकर ने अंतरजातीय विवाह करने वाले युवक प्रकाश बर्मन से 10 हजार रुपये की रिश्वत मांगी थी।
बर्मन ने अंतरजातीय विवाह प्रोत्साहन योजना के तहत आवेदन दिया था, पर फाइल महीनों से अटकी थी।
घटना क्रम
- प्रकाश ने एसीबी से शिकायत दर्ज कराई।
- शुक्रवार सुबह 10.30 बजे बाबू को ऑफिस बुलाया गया।
- 11 बजे जैसे ही उसने फाइल बढ़ाने के बदले 10 हजार रुपये लिए,
एसीबी टीम ने दबिश देकर उसे रंगे हाथ पकड़ा। - दफ्तर की तीन घंटे तक तलाशी व पूछताछ हुई।
- बाबू को मेडिकल जांच के बाद जेल भेजा गया।
📸 रिश्वतखोर बाबू को एसीबी टीम गिरफ्तार कर ले गई, फाइलें व दस्तावेज जब्त।
मामले की जड़ : अटकी थी अंतरजातीय विवाह प्रोत्साहन राशि
इस योजना के तहत अंतर्जातीय विवाह करने वाले जोड़ों को राज्य सरकार द्वारा प्रोत्साहन राशि दी जाती है।
लेकिन फाइलें महीनों तक अटकाए रखकर कर्मचारी रिश्वत मांगते हैं।
प्रकाश बर्मन का मामला भी इसी श्रेणी का था, जिसने इस भ्रष्टाचार के खिलाफ सीधे एसीबी का दरवाजा खटखटाया।
दूसरा मामला : सहायक आयुक्त प्रकाश चंद्र लहरे की 17 संपत्तियों की जांच
एसीबी को मिली शिकायत में विभाग के प्रभारी सहायक आयुक्त प्रकाश चंद्र लहरे के खिलाफ भारी भ्रष्टाचार और संपत्ति अर्जन का आरोप लगाया गया है।
शिकायतकर्ताओं ने लहरे की 17 संपत्तियों की पूरी लिस्ट सौंपी है।
आरोप है कि उन्होंने विभागीय अनुमति के बिना पत्नी और स्वयं के नाम पर करोड़ों की चल-अचल संपत्ति अर्जित की है।
एसीबी को सौंपी गई 17 संपत्तियों की सूची
क्रम स्थान स्वामित्व रकबा (हेक्टेयर) विवरण 1 तिफरा स्वयं 0.016 मकान/जमीन 2 सिरगिट्टी पत्नी 0.022 जमीन 3 मंगला पत्नी 0.016 मकान 4 छतौना पत्नी 0.0342 मकान 5 मेंड्रा पत्नी 0.0994 मकान 6 मेंड्रा स्वयं 0.0266 मकान 7-15 कानन पेंडारी स्वयं 1.137–0.0200 9 प्लॉट/जमीनें 17 रायपुर-बिलासपुर मार्ग स्वयं — फार्म हाउस और अन्य संपत्तियां
लग्जरी गाड़ियां, कीमती गहने और जमीनों के दस्तावेज भी एसीबी के कब्जे में।
सूत्रों का कहना है कि लहरे ने विभागीय बजट से जारी छात्रावास निर्माण, रखरखाव और सामान खरीदी में फर्जी बिल लगाकर करोड़ों रुपये की वसूली की है।
एसीबी अब उनकी आय से अधिक संपत्ति की जांच शुरू करने जा रही है।
तीसरा मामला : 82.99 लाख की छात्रावास मरम्मत निविदा निरस्त
विभाग द्वारा छात्रों के लिए संचालित छात्रावास और आश्रमों की मरम्मत व जीर्णोद्धार हेतु 4 अगस्त 2025 को जारी 82.99 लाख रुपये की निविदा को 9 अक्टूबर 2025 को निरस्त कर दिया गया।
सूत्रों के अनुसार, इस निविदा में भी गंभीर वित्तीय गड़बड़ियां और फर्जीवाड़ा सामने आया।
जांच रिपोर्ट में पाया गया कि कई कार्यों में न गुणवत्ता का ध्यान रखा गया और न ही प्रक्रिया का पालन।
विभागीय सूत्रों के मुताबिक, एक वरिष्ठ लिपिक संदीप (उपनाम सुरक्षित) ने अपने रिश्तेदार ठेकेदारों को लाभ पहुंचाने के लिए ठेके तय कराए थे।
लंबे समय से वह निर्माण और मरम्मत की फाइलें देखता रहा है।
💬 “विभाग के कुछ कर्मचारी व्यक्तिगत लाभ के लिए सरकारी योजनाओं को भ्रष्टाचार का जरिया बना रहे हैं। ऐसे सभी मामलों में सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।”
तीन घंटे की छानबीन, कई फाइलें जब्त
एसीबी ने शुक्रवार को विभागीय दफ्तर में तीन घंटे तक कार्रवाई की।
फाइलें, नकदी, बिल रिकॉर्ड, और डिजिटल दस्तावेज जब्त किए गए।
सूत्रों का कहना है कि एसीबी जल्द ही विभाग के कई अन्य कर्मचारियों से पूछताछ करेगी।
1: अंतरजातीय विवाह योजना क्या है?
- यह योजना सामाजिक समरसता बढ़ाने के लिए चलाई जाती है।
- अंतरजातीय विवाह करने वाले जोड़ों को राज्य सरकार प्रोत्साहन राशि (₹2.5 लाख तक) देती है।
- लेकिन कई जिलों में फाइलें लटकाकर कर्मचारियों द्वारा रिश्वत मांगने की शिकायतें मिलती रही हैं।
2: एसीबी की अगली कार्रवाई
- सहायक आयुक्त प्रकाश लहरे की संपत्ति की बाजार मूल्यांकन रिपोर्ट तैयार की जा रही है।
- खसरा नंबरों के आधार पर राजस्व विभाग से मिलान किया जाएगा।
- विभागीय निविदा प्रकरण की ऑडिट रिपोर्ट भी तलब की गई है।
- एसीबी जल्द ही एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू करेगी।
3: अब तक की कार्रवाई एक नजर में
क्रम मामला आरोपी / विषय कार्रवाई की स्थिति 1 रिश्वत प्रकरण बाबू मनोज तोड़ेकर रंगे हाथ गिरफ्तार, जेल भेजा गया 2 संपत्ति प्रकरण सहा. आयुक्त प्रकाश लहरे एसीबी जांच शुरू, 17 संपत्तियों की लिस्ट जब्त 3 निविदा अनियमितता विभागीय स्टाफ संदीप (वरि. लिपिक) निविदा निरस्त, जांच रिपोर्ट तैयार
विभाग के उच्च अधिकारी क्यों है शांत
तीनों घटनाएं यह बताने के लिए पर्याप्त हैं कि आदिवासी कल्याण विभाग में भ्रष्टाचार संस्थागत रूप ले चुका है।
जहां एक ओर गरीब, छात्र और अंतरजातीय विवाह करने वाले लाभार्थी अपनी फाइलों के लिए भटक रहे हैं,
वहीं दूसरी ओर विभागीय अधिकारी व कर्मचारी नियमों की आड़ में निजी संपत्ति खड़ी कर रहे हैं।
अब निगाहें एसीबी पर हैं—जो आने वाले दिनों में इस पूरे नेटवर्क को बेहद बड़े घोटाले के रूप में उजागर कर सकती है।



