मो इसराइल बबलू
विधानसभा जांच समिति का फूटा गुस्सा — कहा, अफसरों ने बचाए अफसर, कार्रवाई अब जरूरी
बिलासपुर।
17 साल, 390 करोड़ रुपए और तीन सरकारें बदल गईं — लेकिन बिलासपुर की जनता अब भी सीवरेज की सड़ांध झेल रही है। विधानसभा द्वारा गठित जांच समिति ने गुरुवार को जब पंपिंग स्टेशन और अरपा किनारे के इलाकों का निरीक्षण किया, तो नगर निगम अफसरों की लापरवाही और भ्रष्टाचार की पोल एक बार फिर खुल गई।
समिति ने रिपोर्ट में कहा — “यह सिर्फ तकनीकी असफलता नहीं, बल्कि जानबूझकर किया गया खेल है। अफसरों ने ठेकेदारों को बचाने के लिए सिस्टम को गुमराह किया।”
जांच समिति का बड़ा खुलासा
- प्रोजेक्ट शुरू: 2008
- प्रारंभिक लागत: ₹210.25 करोड़
- वर्तमान लागत: ₹429 करोड़
- भुगतान अब तक: ₹390 करोड़
- वास्तविक स्थिति: अधूरा सीवरेज, बदबूदार अरपा
विधायकों का सीधा सवाल – “17 साल में किया क्या?”
विधानसभा जांच समिति के सदस्यों — धरमलाल कौशिक, धर्मजीत सिंह, सुशांत शुक्ला, भैयालाल राजवाड़े और मोतीलाल साहू — ने गुरुवार को बिलासपुर पहुंचकर पंपिंग स्टेशन, स्मार्ट रोड और सीवरेज नेटवर्क का निरीक्षण किया।
निरीक्षण के दौरान विधायक सुशांत शुक्ला ने नाराज़गी जताई —
“प्रोजेक्ट 17 साल पुराना है, लागत दोगुनी हो गई, 390 करोड़ खर्च हुए, फिर भी नतीजा शून्य। क्या जनता को सिर्फ बिल और बदबू के लिए छोड़ा गया है?”
जांच रिपोर्ट का गंभीर निष्कर्ष
- 2019 से 2023 तक एक भी रुपए का वास्तविक काम नहीं हुआ
- फिर भी कंपनी सिंप्लेक्स को करोड़ों का भुगतान
- तत्कालीन ईई मनोरंजन सरकार, पीके पंचायती और सुरेश बरुआ पर सवाल
- एक्सलेशन और एक्सटेंशन की अनुशंसा किसने की — अब तक जवाब नहीं
- परियोजना में “जानबूझकर निजी कंपनी को फायदा पहुंचाने” की बात दर्ज
“तकनीकी जवाब देने में फेल अफसर”
निरीक्षण के दौरान जब विधायक शुक्ला ने तकनीकी सवाल किए, तो निगम इंजीनियर संतोषजनक जवाब नहीं दे सके।
आख़िरकार नगर निगम आयुक्त को खुद हस्तक्षेप कर सफाई देनी पड़ी।
समिति ने टिप्पणी की — “इस स्तर के प्रोजेक्ट के लिए तकनीकी दक्षता न होना बेहद शर्मनाक है।”
अरपा नदी में अब भी बह रहा है गंदा पानी
समिति ने जब अरपा किनारे स्मार्ट रोड और नालों की स्थिति देखी, तो पूरा दृश्य चौंकाने वाला था।
करीब 70 नाले बिना ट्रीटमेंट के सीधे नदी में गिर रहे हैं।
सिम्स अस्पताल का गंदा पानी भी सीधे अरपा में मिल रहा है।
निगम अफसरों ने सफाई दी कि
“252 करोड़ की नई योजना शासन को भेजी गई है, फंड नहीं मिला।”
लेकिन समिति का जवाब तीखा था —
“फंड की आड़ में गंदगी छुपाई नहीं जा सकती। जनता को हर दिन इसकी कीमत चुकानी पड़ रही है।”
एनालिसिस – सीवरेज घोटाले का ‘सिस्टम सिंड्रोम’
17 साल से बिलासपुर सीवरेज का ‘कंकाल प्रोजेक्ट’ बना हुआ है। हर सरकार ने फाइल चलाई, हर अफसर ने बैठकों के मिनट्स लिखे, लेकिन सड़क पर नतीजा शून्य।
अब विधानसभा समिति का गुस्सा दरअसल जनता के आक्रोश की गूंज है।
सवाल ये नहीं कि पैसा कहाँ गया — सवाल ये है कि जवाबदेही किसकी होगी?
जिम्मेदार कौन?
स्तर जिम्मेदार अधिकारी भूमिका स्थिति कार्यपालन अभियंता मनोरंजन सरकार सीवरेज प्रभारी जांच के घेरे में पीके पंचायती तकनीकी अनुशंसा संदिग्ध अनुमति जवाब नहीं सुरेश बरुआ साइट सुपरविजन प्रगति रिपोर्ट में हेराफेरी स्पष्टता नहीं ठेकेदार कंपनी सिंप्लेक्स इंफ्रा कार्य विलंब, फिर भी भुगतान सिफारिश जांच की
रिवर व्यू रोड पर स्मार्टनेस का दिखावा
समिति ने स्मार्ट रोड प्रोजेक्ट का भी निरीक्षण किया।
विधायक सुशांत शुक्ला ने कहा —
“बिना नाली बनाए सड़क बना दी गई! यह तकनीकी अपराध है। पहले ड्रेनेज, फिर सड़क — यही इंजीनियरिंग का नियम है।”
उन्होंने पूछा कि टीएनएसी से अनुमति क्यों नहीं ली गई, जिस पर अफसरों ने जवाब दिया — “सरकारी काम था, इसलिए नहीं ली।”
समिति ने इसे नियम उल्लंघन करार दिया।
अब अगली कार्रवाई की मांग
जांच समिति ने स्पष्ट कहा कि
“अब सिर्फ रिपोर्ट नहीं, कार्रवाई जरूरी है।”
रिपोर्ट विधानसभा सचिवालय को भेजी जाएगी और संबंधित अफसरों पर वित्तीय व अनुशासनिक कार्रवाई की अनुशंसा की जाएगी।
जनता मांग रही जवाब
390 करोड़ का सीवरेज सिस्टम आज भी अधूरा है। अरपा नदी गंदगी से कराह रही है। जनता को सिर्फ झूठे वादे मिले। अब जनता पूछ रही है — ‘17 साल में क्या हुआ?’



