मो इसराइल
👉 छिंदवाड़ा के परासिया ब्लॉक में सबसे ज्यादा मौतें – 9 मासूमों ने तोड़ा दम
👉 सरकार ने पूरे बैच पर लगाई रोक, 9 सैंपल की जांच में सब ‘ओके’; NCDC कर रहा गहन जांच
👉 स्वास्थ्य मंत्रालय की एडवाइजरी – 2 साल से कम उम्र के बच्चों को सिरप न पिलाएं
बिलासपुर, रायपुर,भोपाल/जयपुर।
देश एक बार फिर दवा सुरक्षा को लेकर दहशत में है। मध्यप्रदेश और राजस्थान में बीते दिनों कफ सिरप पीने के बाद 12 मासूम बच्चों की मौत हो चुकी है। माता-पिता का सवाल है – “जो सिरप बच्चों की जान बचाने के लिए दिया गया था, वही मौत का कारण क्यों बन गया?”
बच्चों की लगातार मौतों के बाद सरकार ने पूरे बैच की बिक्री पर रोक लगा दी थी और सिरप को जांच के लिए दिल्ली, पुणे और भोपाल भेजा गया। सीडीएससीओ (Delhi), वायरोलॉजी इंस्टीट्यूट (Pune) और मप्र सरकार की लैब ने 9 सैंपल की जांच की – किसी में भी संदिग्ध तत्व नहीं मिला।
अब जांच की जिम्मेदारी राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (NCDC) को सौंपी गई है। लेकिन सवाल वही – अगर दवा सही थी तो 12 बच्चों की मौत क्यों हुई?
🔎 घटनाक्रम – कैसे उजागर हुआ कफ सिरप केस
- 24 अगस्त 2025: पहला संदिग्ध मामला सामने आया।
- 7 सितंबर 2025: पहली मौत दर्ज की गई।
- सितंबर अंत तक: छिंदवाड़ा (परासिया ब्लॉक) में 9 बच्चों की मौत।
- राजस्थान में: अब तक 3 बच्चों की मौत की पुष्टि।
- 29 सितम्बर: राजस्थान से पहला सैंपल जांच के लिए भेजा गया।
- अक्टूबर की शुरुआत: 9 सैंपल रिपोर्ट – सभी मानक पाए गए।
स्वास्थ्य मंत्रालय की एडवाइजरी
स्वास्थ्य मंत्रालय और DGHS डॉ. सुनीता शर्मा ने राज्यों को सख्त निर्देश दिए –
- 2 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को खांसी-जुकाम की सिरप बिल्कुल न दें।
- 5 वर्ष तक सामान्य खांसी-जुकाम में सिरप से बचें।
- 5 वर्ष से ऊपर बच्चों को सिरप केवल डॉक्टर की सलाह पर और कम से कम दिनों के लिए दें।
- कई दवाओं का एक साथ उपयोग न करें।
- डॉक्टर पहले घरेलू और प्राकृतिक उपाय सुझाएं – जैसे भाप लेना, गुनगुना पानी, आराम और तरल पदार्थ।
- सभी सरकारी/निजी अस्पताल यह सुनिश्चित करें कि गुणवत्तापूर्ण कंपनियों की दवा ही खरीदी जाए।
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छिंदवाड़ा का हॉटस्पॉट
- परासिया ब्लॉक में 9 बच्चों की मौत।
- करीब 1420 बच्चे सर्दी, बुखार और जुकाम से प्रभावित।
- जिन सिरप पर शक था –
- Coldrif (Chennai)
- Nexa DS (Himachal)
- सरकारी डॉक्टरों ने भी प्राइवेट प्रैक्टिस में इन्हीं सिरप को लिखा था।
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राजस्थान सरकार का बयान
राजस्थान के चिकित्सा मंत्री गजेन्द्र सिंह खींवसर ने कहा –
- “दवाओं की जांच हो चुकी है, गुणवत्ता सही पाई गई।”
- “सरकारी डॉक्टरों ने ये दवाएं नहीं लिखीं, परिजनों ने खुद बच्चों को पिलाया।”
- “सरकारी स्तर पर कोई लापरवाही नहीं हुई।”
3 – सवालों के घेरे में
- अगर सिरप सुरक्षित था, तो 12 मासूमों की मौत कैसे हुई?
- क्या दवा की गलत मात्रा बच्चों की मौत की वजह बनी?
- क्या निमोनिया या वायरल संक्रमण का समय पर इलाज नहीं हुआ?
- क्या परिजनों ने डॉक्टर की सलाह के बिना दवा दी?
- क्या सरकारी निगरानी तंत्र पूरी तरह फेल हो चुका है?
🧪 जांच एजेंसियां और रिपोर्ट
- सीडीएससीओ (Delhi): सभी सैंपल क्लीन चिट।
- वायरोलॉजी इंस्टीट्यूट (Pune): संदिग्ध तत्व नहीं मिला।
- मप्र सरकार की लैब (Bhopal): रिपोर्ट – दवा मानक।
- NCDC: अब पूरे केस की विस्तृत जांच कर रहा है।
- 500 लोगों की ब्लड रिपोर्ट: कोई संक्रामक रोग नहीं मिला।
दाल में कुछ काला…..
👉 “जब बच्चों की जान दांव पर हो, तो जांच के नाम पर सिर्फ ‘सैंपल ओके’ बताना काफी नहीं है।”
👉 “अगर दवा जिम्मेदार नहीं है, तो फिर मौत का असली कारण क्यों छुपाया जा रहा है?”
👉 “मौतें चाहे दवा से हों या लापरवाही से – सवाल है कि जिम्मेदार कौन?”
यह रिपोर्ट अब भी अनसुलझी पहेली बनी हुई है। सरकार और स्वास्थ्य एजेंसियों की जांच जारी है, लेकिन माताओं की गोद उजड़ चुकी है। अब पूरे देश की निगाहें इस पर टिकी हैं कि मासूमों की मौत का असली कारण कब सामने आएगा।
छत्तीसगढ़ में अलर्ट

- मध्यप्रदेश और राजस्थान में बच्चों की मौत के बाद छत्तीसगढ़ स्वास्थ्य विभाग ने अलर्ट जारी किया।
- सभी जिला अस्पतालों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और मेडिकल कॉलेजों को निर्देश –
- बच्चों को बिना डॉक्टर की सलाह सिरप न दें।
- 2 साल से कम उम्र के बच्चों को कफ सिरप बिल्कुल न पिलाएं।
- निजी डॉक्टर और फार्मासिस्टों को एडवाइजरी समझाई जाए।
- दवा दुकानों पर निगरानी: संदिग्ध ब्रांड की दवाओं की बिक्री पर नजर रखी जा रही है।
- CMHO स्तर पर टीमों को बच्चों के मामलों की निगरानी और रिपोर्टिंग के आदेश।
- रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग और बस्तर के बड़े अस्पतालों को अलग वार्ड और बेड रिजर्व करने के निर्देश।
👉 स्वास्थ्य विभाग ने कहा – “प्रदेश में किसी भी तरह की मौत या संदिग्ध केस तुरंत जिला और राज्य स्तर पर रिपोर्ट किया जाए।”



