Mohammed israil
जलकुण्ड निर्माण से अरपा का पुनर्जीवन, जल संरक्षण और धरोहर संरक्षण की दिशा में बड़ा कदम


बिलासपुर,रायपुर, 01 अक्टूबर।
अरपा नदी के उद्गम स्थल को संवारने और उसे नई जीवनधारा देने की दिशा में राज्य शासन ने बड़ा फैसला लिया है। गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही जिले के पेंड्रा विकासखण्ड में अरपा उद्गम स्थल विकास एवं जलकुण्ड निर्माण परियोजना को अंतिम मंजूरी मिल गई है। इसके लिए 12 करोड़ 53 लाख 97 हजार रुपये की प्रशासकीय स्वीकृति जारी की गई है।
परियोजना के तहत उद्गम स्थल का विकास, पुनरुत्थान और जलकुण्ड का निर्माण किया जाएगा। उम्मीद है कि इससे जल संरक्षण को नई दिशा मिलेगी और क्षेत्र की प्राकृतिक धरोहर सुरक्षित होगी। यह कार्य अनुसूचित जनजाति उपयोजना के तहत स्वीकृत राशि से किया जाएगा।
शासन ने साफ़ किया है कि निर्माण कार्य समयसीमा के भीतर और उच्च गुणवत्ता के साथ ही पूरे किए जाएँ। निविदा प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी रहेगी और भू-अर्जन की आवश्यकता होने पर खर्च निर्धारित सीमा के भीतर ही किया जाएगा।
मुख्य अभियंता को परियोजना पर निगरानी रखने और अधीनस्थ अधिकारियों से नियमों के कड़ाई से पालन की जिम्मेदारी सौंपी गई है। परियोजना पूरी होने पर अरपा नदी न केवल जल संरक्षण का मॉडल बनेगी, बल्कि प्राकृतिक और सामाजिक विकास में भी अहम भूमिका निभाएगी।
अरपा नदी उद्गम स्थल विकास
🔹 अरपा नदी का महत्व
- बिलासपुर सहित मध्य छत्तीसगढ़ की जीवनदायिनी नदी
- क्षेत्र की कृषि और पेयजल का प्रमुख स्रोत
- बिलासपुर शहर को पहचान दिलाने वाली नदी
🔹 परियोजना का सार
- स्थान : विकासखण्ड पेंड्रा, जिला गौरेला-पेंड्रा-मरवाही
- कुल लागत : ₹12.53 करोड़
- उद्देश्य :
- उद्गम स्थल का विकास
- जलकुण्ड निर्माण
- जल संरक्षण और प्राकृतिक धरोहर का संरक्षण
🔹 स्वीकृति और प्रक्रिया
- वित्त विभाग ने 22 सितम्बर 2025 को दी मंजूरी
- तकनीकी स्वीकृति और ड्रॉइंग-डिज़ाइन अनिवार्य
- निविदा प्रक्रिया निष्पक्ष और पारदर्शी होगी
🔹 शर्तें
- कम से कम 75% बाधारहित भूमि उपलब्ध होने पर ही निविदा
- गुणवत्ता में कमी मिलने पर जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई
- कार्य निर्धारित समयसीमा में पूर्ण करना अनिवार्य
🔹 लोकहित का लाभ
- जल संरक्षण को बढ़ावा
- प्राकृतिक धरोहर का संरक्षण
- क्षेत्र के सामाजिक और पर्यावरणीय विकास में अहम कदम



