Mohammed israil
मतदाता सूची अपडेट में सुस्ती, भरोसा दिलाया अब आएगी रफ्तार

बिलासपुर।
विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की धीमी रफ्तार पर बिलासपुर के अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) एवं निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी मनीष साहू को जिला निर्वाचन अधिकारी ने कारण बताओ नोटिस जारी किया है। निर्वाचन प्रक्रिया जैसे संवेदनशील कार्य में सुस्ती बरते जाने से प्रशासन ने सख्ती दिखाई है। नोटिस मिलने के बाद एसडीएम ने अपनी सफाई दी और भरोसा दिलाया कि अब कार्य में तेजी लाकर समयसीमा का पालन किया जाएगा।
53% मिलान, मात्र 36% प्रविष्टि
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार 29 सितंबर 2025 तक जिले में मात्र 53.22% मतदाताओं का ही रिकॉर्ड मिलान हो सका है, जबकि गूगल शीट में प्रविष्टि का प्रतिशत 36% ही दर्ज है। जबकि निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट निर्देश दिया था कि इस कार्य में तेजी लाई जाए और निर्धारित समयसीमा के भीतर पूरा किया जाए।
नौकरीपेशा वर्ग बना चुनौती
एसडीएम मनीष साहू ने अपने जवाब में कहा कि शहरी क्षेत्र के मतदाता नौकरीपेशा वर्ग से अधिक जुड़े हैं। लगातार स्थानांतरण और बार-बार निवास बदलने के कारण रिकॉर्ड का मिलान ग्रामीण क्षेत्रों की तुलना में अधिक जटिल और समय लेने वाला है।
बिलासपुर विधानसभा क्षेत्र में सबसे बड़ी दिक्कत
बिलासपुर विधानसभा क्षेत्र की मतदाता संख्या वर्ष 2003 की तुलना में लगभग एक लाख से अधिक बढ़ गई है। पुराने रिकॉर्ड और नए आंकड़ों के बीच इस भारी अंतर ने काम को जटिल बना दिया है। यही कारण है कि शहरी क्षेत्र की मतदाता सूची की गति धीमी रही।
काम का दबाव, 591 मतदान केंद्र
अनुविभाग बिलासपुर के अंतर्गत बिलासपुर, बेलतरा, बिल्हा और मस्तुरी विधानसभा आते हैं। इन क्षेत्रों में कुल 591 मतदान केंद्र हैं। कार्यभार अत्यधिक होने से मतदाता डेटा गूगल शीट पर दर्ज करने की गति प्रभावित हुई।
नोटिस निरस्त करने की मांग
एसडीएम ने जिला निर्वाचन अधिकारी से निवेदन किया है कि परिस्थितियों को देखते हुए उनके विरुद्ध जारी नोटिस निरस्त किया जाए। साथ ही आश्वासन दिया है कि आगे से सभी कार्य निर्देशानुसार और तेज रफ्तार में पूर्ण कराए जाएंगे।
क्या है एसआईआर?
एसआईआर (Special Intensive Revision) निर्वाचन आयोग की वह विशेष प्रक्रिया है जिसके अंतर्गत मतदाता सूची का गहन पुनरीक्षण किया जाता है।
- इसमें मिलान, नए नाम जोड़ना, गलतियों का सुधार, और दोहराए गए नाम हटाना शामिल होता है।
- उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि विधानसभा चुनावों से पहले हर पात्र नागरिक का नाम मतदाता सूची में दर्ज हो और डुप्लीकेट/फर्जी प्रविष्टियां हटाई जा सकें।
- यह प्रक्रिया पारदर्शी चुनाव और निष्पक्ष मतदान के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है।



