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जमीन ठगी का बड़ा खुलासा : फरार आरोपी सुरेश मिश्रा गिरफ्तार

Mohammed Israil
Mohammed Israil  - Editor
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Mohammed israil


बिलासपुर पुलिस की सर्जिकल स्ट्राइक, कूटरचित दस्तावेज़ से करोड़ों की जमीन हड़पने का खेल उजागर

बिलासपुर। जमीन ठगी और कूटरचित दस्तावेज़ बनाने के मामले में आखिरकार पुलिस ने फरार चल रहे मुख्य आरोपी सुरेश कुमार मिश्रा (59 वर्ष, निवासी राजकिशोर नगर, सरकंडा) को दबोच लिया है। सरकंडा पुलिस ने कार्रवाई करते हुए आरोपी को न्यायिक रिमांड पर भेज दिया। इससे पहले पुलिस इस मामले में चार अन्य आरोपियों को पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है।

मामला वर्ष 1999 का है, जब आवेदक अरुण कुमार दुबे (पूर्व सुरक्षा अधिकारी, एसईसीएल) ने ग्राम मोपका स्थित भूमि (खसरा नंबर 404) से 3000 वर्गफुट जमीन खरीदी थी। बिक्री रजिस्ट्री भी विधिवत दर्ज हुई और नामांतरण व डायवर्सन भी कराया गया। लेकिन आरोपी सुरेश मिश्रा ने रजिस्ट्री की मूल प्रति में खसरा नंबर 404 दर्ज कराया और कार्बन प्रति में 429/2 दर्ज कराकर पंजीयन कार्यालय में जमा कर दिया। इसी कूटरचना के आधार पर उसने तहसील कार्यालय में आपत्ति प्रस्तुत कर खरीदार के नाम से भूमि हटवाने की साजिश रची।

नतीजा यह हुआ कि आवेदक को अपनी खरीदी हुई जमीन से वंचित होना पड़ा। जांच में मामला सच साबित होने के बाद पुलिस ने ठगी, धोखाधड़ी और आपराधिक षड्यंत्र की धाराओं में प्रकरण दर्ज कर कार्रवाई शुरू की।

  • नाम : सुरेश कुमार मिश्रा
  • पिता : जी.पी. मिश्रा
  • उम्र : 59 वर्ष
  • निवासी : राजकिशोर नगर, सरकंडा, जिला बिलासपुर

पहले गिरफ्तार हो चुके आरोपी

  1. महेन्द्र सिंह ठाकुर
  2. राजेश कुमार मिश्रा
  3. मनोज कुमार दुबे
  4. बन माली मंडल

जमीन ठगी और कूटरचना पर क्या कहता है कानून?

  • धारा 420 भादवि : धोखाधड़ी कर संपत्ति हड़पना (सात साल तक की सजा)
  • धारा 467, 468, 471 भादवि : कूटरचित दस्तावेज़ बनाना और उपयोग करना (आजन्म कारावास तक की सजा संभव)
  • धारा 120बी, 34 भादवि : आपराधिक षड्यंत्र और सामूहिक अपराध (मुख्य अपराध जितनी ही सजा)

पुलिस की सख्ती

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक रजनेश सिंह के निर्देश पर बनी विशेष टीम ने आरोपी को दबोचा। एएसपी (शहर) राजेन्द्र जायसवाल, सीएसपी (सरकंडा) निमितेश सिंह और थाना प्रभारी निरीक्षक निलेश पांडेय की अगुवाई में कार्रवाई को अंजाम दिया गया।


वर्ष 1999 से चल रहा विवाद

  • कूटरचित दस्तावेज़ से खसरा नंबर बदला गया
  • आवेदक को उसके खरीदे हुए हक से वंचित किया गया
  • अब तक 5 आरोपी गिरफ्तार, मुख्य आरोपी पुलिस के शिकंजे में

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