Mohammed israil
शिक्षामंत्री गजेन्द्र यादव ने कहा – ई संवर्ग प्राचार्य काउंसिलिंग इसी माह
Biaspur, रायपुर,दुर्ग। छत्तीसगढ़ के शिक्षक लंबे समय से अपनी समस्याओं के समाधान का इंतजार कर रहे हैं। इन्हीं मुद्दों को लेकर रविवार को टीचर्स एसोसिएशन के प्रतिनिधिमंडल ने स्कूल शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव से सर्किट हाउस दुर्ग में मुलाकात की। इस दौरान एसोसिएशन ने 10 सूत्रीय मांग पत्र सौंपा और कहा कि अगर जल्द समाधान नहीं हुआ तो शिक्षकों का धैर्य जवाब दे सकता है।


शिक्षकों की प्रमुख मांगें
- सेवा गणना में सुधार कर पेंशन का लाभ
- केंद्र की तर्ज पर 20 साल की सेवा में पूर्ण पेंशन
- हाईकोर्ट डबल बेंच के फैसले के अनुरूप क्रमोन्नति आदेश
- ई संवर्ग में प्राचार्यों की नियुक्ति
- सभी संवर्ग में 28 हजार पदों पर लंबित पदोन्नति
- लंबे अनुभव वाले शिक्षकों को TET से छूट
- D.Ed. और B.Ed. धारकों को समान अवसर
- भविष्य निधि में एरियर की गिनती और अस्थायी अग्रिम आहरण की सुविधा

मंत्री का जवाब
शिक्षामंत्री गजेन्द्र यादव ने बातचीत के दौरान कहा कि ई संवर्ग के प्राचार्य पदों की काउंसिलिंग इसी माह पूरी कर दी जाएगी। बाकी मांगों पर भी गंभीरता से विचार किया जा रहा है। उन्होंने शिक्षकों को आश्वस्त किया कि “समस्याओं का समाधान चरणबद्ध तरीके से होगा।”
प्रतिनिधिमंडल में कौन-कौन रहे शामिल?
टीचर्स एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष संजय शर्मा के नेतृत्व में पहुंचे प्रतिनिधिमंडल में प्रदेश और जिला स्तर के कई पदाधिकारी शामिल हुए। इनमें देवनाथ साहू, बसंत चतुर्वेदी, शैलेन्द्र यदु, मनोज सनाढय, जयंत यादव, योगेश सिंह ठाकुर, सुखनंदन साहू, जितेंद्र मिश्रा, प्यारेलाल सह, बाबूलाल लाड़े, सरस्वती गिरिया, राकेश तिवारी, शत्रुहन साहू (जिलाध्यक्ष दुर्ग), गोपी वर्मा (जिलाध्यक्ष राजनांदगांव), संतोष सिंह (जिलाध्यक्ष बिलासपुर), डॉ. भूषण चंद्राकर (जिलाध्यक्ष धमतरी), दिलीप साहू (जिलाध्यक्ष बालोद), श्री हरि (जिलाध्यक्ष मोहला-मानपुर-चौकी) और संजय राजपूत (जिलाध्यक्ष खैरागढ़) शामिल थे।
खास बातें
- शिक्षक वर्षों से पदोन्नति और पेंशन सुधार की मांग उठा रहे हैं।
- एसोसिएशन ने मंत्री को याद दिलाया कि 20 साल की सेवा में पूर्ण पेंशन केंद्र सरकार में पहले से लागू है।
- शिक्षकों का कहना है कि TET परीक्षा अनुभवी शिक्षकों पर जबरन थोपना अनुचित है।
- मंत्री ने आश्वासन दिया, लेकिन शिक्षकों का धैर्य अब टूटने लगा है।
समस्या कागजों में अटकी
👉 इस मुलाकात से एक बार फिर साफ हो गया है कि शिक्षक संवर्ग की समस्याएं सिर्फ कागजों में अटकी हुई हैं।
👉 शिक्षकों का कहना है कि यदि सरकार ने जल्द कदम नहीं उठाए तो वे आंदोलन का रास्ता चुन सकते हैं।
👉 मंत्री का बयान भले ही राहत देने वाला लगे, लेकिन जमीनी स्तर पर ठोस कार्रवाई ही शिक्षक वर्ग को संतुष्ट कर पाएगी।



