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सर्पदंश पर सिम्स की ऐतिहासिक जीत, 38 बच्चों की जान बची — छत्तीसगढ़ में अब तक का सबसे बड़ा सफल इलाज, जानिए क्या है पूरा मामला…

Mohammed Israil
Mohammed Israil  - Editor
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Mohammed israil


बिलासपुर।बरसात के मौसम की सबसे बड़ी चुनौती— सर्पदंश —के खिलाफ सिम्स बिलासपुर ने ऐसी जीत दर्ज की है, जिसे चिकित्सा इतिहास में मील का पत्थर कहा जाएगा। पिछले तीन महीनों में 38 बच्चे सांप के डंक का शिकार होकर सिम्स में भर्ती हुए थे। इनमें से 22 मामले विषैले सांप के और 16 गैर-विषैले सांप के थे। डॉक्टरों की त्वरित कार्रवाई, दवाओं की उपलब्धता और आधुनिक इलाज के चलते सभी बच्चे स्वस्थ होकर घर लौट आए।

यह छत्तीसगढ़ का पहला मामला है, जब इतने बड़े पैमाने पर सर्पदंश से पीड़ित बच्चों का 100 प्रतिशत सफल इलाज किया गया।


📊 आँकड़े बोलते हैं

  • कुल भर्ती बच्चे : 38
  • गैर-विषैले सर्पदंश : 16
  • विषैले सर्पदंश : 22
    • इनमें से 10 बच्चों में साँस की मांसपेशियों में लकवा (Respiratory Paralysis) पाया गया।
    • सभी को आईसीयू वेंटिलेटरी सपोर्ट दिया गया और वे पूरी तरह ठीक हो गए।

डॉक्टरों की अपील

“एंटी स्नेक वेनम ही सर्पदंश का असली और कारगर इलाज है। देरी, झाड़-फूँक या देसी इलाज में समय गंवाना जानलेवा हो सकता है। हर मरीज को तुरंत नज़दीकी स्वास्थ्य केंद्र या अस्पताल पहुँचाएँ।”
डॉ. रमणेश मूर्ति, अधिष्ठाता सिम्स


टीम का सामूहिक योगदान

इस सफलता के पीछे डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों की अथक मेहनत और सामूहिक समर्पण है।
नेतृत्व :

  • डॉ. राकेश नहरेल, विभागाध्यक्ष
  • डॉ. समीर जैन, यूनिट हेड

टीम सदस्य :

  • डॉ. वर्षा तिवारी
  • डॉ. पूनम अग्रवाल
  • डॉ. अभिषेक कलवानी
  • डॉ. सलीम खलखो
  • डॉ. अंकिता चंद्राकर

👉 इन सभी ने दिन-रात संघर्ष कर बच्चों को नया जीवन दिया।


बचाव ही सुरक्षा

  • बच्चों को जमीन पर न सुलाएँ, हमेशा ऊँचे बिस्तर का प्रयोग करें।
  • घर-आँगन साफ-सुथरा रखें, घास-फूस जमा न होने दें।
  • रात में बाहर निकलते समय टॉर्च/रोशनी का प्रयोग करें
  • खेतों और झाड़ियों में जूते पहनकर ही जाएँ

🔎 क्यों है यह उपलब्धि खास?

✔ पहले सर्पदंश के मामले अक्सर मौत में बदल जाते थे।
✔ ग्रामीण इलाकों में झाड़-फूँक और देरी से अनगिनत जीवन खत्म हुए।
✔ लेकिन सिम्स ने यह दिखा दिया कि समय पर इलाज और एंटी-स्नेक वेनम की उपलब्धता से 100% जीवन बचाना संभव है।


सकारात्मक संदेश पूरे प्रदेश के लिए

सिम्स की यह सफलता न सिर्फ बिलासपुर बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ के लिए उम्मीद की किरण है।
जहाँ पहले लोग सर्पदंश को मौत का संदेश मानते थे, वहीं अब यह साबित हो चुका है कि सही इलाज से हर बच्चा, हर जीवन बचाया जा सकता है।


छत्तीसगढ़ में पहली बार ऐसा हुआ…

छत्तीसगढ़ में पहली बार इतने बड़े पैमाने पर बच्चों को सर्पदंश से जीवनदान मिला। यह सिर्फ चिकित्सा विज्ञान की जीत नहीं, बल्कि मानवता और उम्मीद की भी जीत है।
अब हर परिवार यह भरोसा कर सकता है कि अगर समय पर अस्पताल पहुँचाया जाए तो साँप का ज़हर भी मात खा सकता है।


✍️ मोहम्मद इसराइल

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