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इंस्टाग्राम की दोस्ती बनी काल: छत्तीसगढ़ में नाबालिग के साथ जंगल में हैवानियत,13 साल की बच्ची से गैंगरेप, दोस्ती के बहाने जंगल ले जाकर किया दुष्कर्म, दो आरोपी गिरफ्तार

Mohammed Israil
Mohammed Israil  - Editor
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बिलासपुर, रायपुर,छत्तीसगढ़, 3 सितंबर 2025।

छत्तीसगढ़ के फरसगांव में इंसानियत को शर्मसार करने वाली घटना ने समाज को झकझोर दिया है। इंस्टाग्राम पर दोस्ती के जाल में फंसाकर 13 साल की नाबालिग को जंगल में ले जाकर दो युवकों ने बारी-बारी से दुष्कर्म किया। आरोपियों की पहचान बोरगांव निवासी देवकुमार नेताम (22) और पेंसरा गांव निवासी गुपेंद्र मरकाम (21) के रूप में हुई है। दोनों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है।क्या है पूरा मामला?
जानकारी के मुताबिक, नाबालिग इंस्टाग्राम पर एक्टिव थी, जहां उसकी दोस्ती देवकुमार नेताम से हुई। 22 मई 2025 को देवकुमार के कहने पर वह उससे मिलने घर से निकली। युवक उसे जंगल ले गया, जहां उसका दोस्त गुपेंद्र मरकाम पहले से मौजूद था। दोनों ने मिलकर नाबालिग के साथ दुष्कर्म किया। डर और शर्मिंदगी के कारण बच्ची ने यह बात किसी को नहीं बताई। इसके बाद 1 सितंबर को देवकुमार ने फिर से नाबालिग को मिलने के लिए बुलाया। वह उसे कार में बैठाकर जंगल ले गया, जहां गुपेंद्र भी मौजूद था। दोनों ने फिर से बच्ची के साथ दुष्कर्म किया। फरसगांव थाना प्रभारी पीतांबर कठार के अनुसार, पीड़िता की शिकायत पर दोनों आरोपियों के खिलाफ POCSO एक्ट और दुष्कर्म के तहत मामला दर्ज कर गिरफ्तारी की गई है।


छत्तीसगढ़ में दुष्कर्म की स्थिति
पिछले एक साल में छत्तीसगढ़ में दुष्कर्म के मामले चिंताजनक रूप से बढ़े हैं। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो (NCRB) की 2024 की रिपोर्ट के अनुसार, छत्तीसगढ़ में दुष्कर्म के 1,200 से अधिक मामले दर्ज किए गए, जिनमें से 40% मामले नाबालिग लड़कियों से संबंधित हैं। बिलासपुर, रायपुर, और दुर्ग जैसे शहरी क्षेत्रों के साथ-साथ ग्रामीण इलाकों में भी ऐसी घटनाएं बढ़ रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि सामाजिक जागरूकता की कमी और कानून के डर का अभाव इसके प्रमुख कारण हैं।


2: नाबालिगों के साथ दुष्कर्म: NCRB की चेतावनी
NCRB की 2024 की रिपोर्ट के अनुसार, छत्तीसगढ़ में नाबालिग लड़कियों के साथ दुष्कर्म के मामले में 10% की वृद्धि दर्ज की गई है। 2023 की तुलना में 2024 में 480 से अधिक मामले नाबालिगों के खिलाफ दर्ज हुए। इनमें से अधिकांश मामलों में आरोपी पीड़िता के परिचित या रिश्तेदार थे। सोशल मीडिया के जरिए दोस्ती और लालच देकर अपराध को अंजाम देने की प्रवृत्ति भी बढ़ रही है। पुलिस और सामाजिक संगठनों ने अभिभावकों से बच्चों की ऑनलाइन गतिविधियों पर नजर रखने की अपील की है।


3: सोशल मीडिया और बढ़ते दुष्कर्म: क्या है कारण?
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स जैसे इंस्टाग्राम, फेसबुक, और व्हाट्सएप अपराधियों के लिए आसान शिकार ढूंढने का जरिया बन रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, नाबालिगों की कम उम्र और भोलापन अपराधियों के लिए उन्हें निशाना बनाना आसान बनाता है।

  • अनजान लोगों से दोस्ती: बच्चे बिना सोचे-समझे अनजान लोगों से ऑनलाइन दोस्ती कर लेते हैं।
  • जागरूकता की कमी: अभिभावक और बच्चे सोशल मीडिया के खतरों से अनजान हैं।
  • प्राइवेसी सेटिंग्स का अभाव: कई बच्चे अपनी प्रोफाइल को पब्लिक रखते हैं, जिससे अपराधी उनकी जानकारी हासिल कर लेते हैं।
    पुलिस ने सुझाव दिया है कि अभिभावक बच्चों के सोशल मीडिया अकाउंट्स की निगरानी करें और उन्हें अनजान लोगों से बात करने से रोकें।

पुलिस की कार्रवाई और समाज से अपील
फरसगांव पुलिस ने दोनों आरोपियों को हिरासत में लेकर जांच शुरू कर दी है। पीड़िता को मेडिकल जांच के लिए भेजा गया है और उसकी काउंसलिंग की जा रही है। पुलिस ने अभिभावकों से अपील की है कि वे अपने बच्चों की ऑनलाइन गतिविधियों पर नजर रखें और संदिग्ध गतिविधियों की सूचना तुरंत पुलिस को दें। यह घटना न केवल कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाती है, बल्कि समाज को यह सोचने पर मजबूर करती है कि बच्चों की सुरक्षा के लिए और क्या कदम उठाए जाने चाहिए।

हैवानियत की हद: 16 साल की नाबालिग के साथ गैंगरेप, दोस्त को बंधक बनाकर बारी-बारी से की दरिंदगी

बिलासपुर रायपुर छत्तीसगढ़। छत्तीसगढ़ के बेलकोटा में इंसानियत को शर्मसार करने वाली घटना ने समाज को झकझोर दिया। शराब के नशे में धुत तीन युवकों और एक नाबालिग ने 16 साल की मासूम के साथ गैंगरेप की वारदात को अंजाम दिया। पीड़िता के दोस्त को बंधक बनाकर मारपीट की और सड़क किनारे नर्सरी में ले जाकर इस जघन्य अपराध को अंजाम दिया। यह घटना न केवल कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाती है, बल्कि समाज में बढ़ती दरिंदगी की भयावह तस्वीर पेश करती है।सारगढ़ी, 3 सितंबर 2025: छत्तीसगढ़ के बेलकोटा में एक बार फिर रूह कंपा देने वाली वारदात ने लोगों का गुस्सा भड़का दिया है। सोमवार देर शाम 16 साल की नाबालिग लड़की अपने दोस्त के साथ बरगीडीह से बेलकोटा लौट रही थी, तभी शराब के नशे में चूर चार दरिंदों ने उनकी जिंदगी को नर्क बना दिया। बेलकोटा नर्सरी के पास तीन युवकों और एक नाबालिग ने पहले लड़की के दोस्त को पकड़कर बेरहमी से पीटा, फिर उसे बंधक बनाकर मासूम के साथ बारी-बारी से गैंगरेप किया।क्या है पूरा मामला?
पुलिस के मुताबिक, सोमवार शाम को पीड़िता अपने दोस्त के साथ बरगीडीह से बेलकोटा की ओर लौट रही थी। बेलकोटा नर्सरी के पास शराब पी रहे विलसन खेस, कुनाल केरकेट्टा, संजय खेस और एक 16-17 साल के नाबालिग ने उन्हें रोका। इन दरिंदों की नीयत बिगड़ गई और उन्होंने धमकाते हुए दोनों को सड़क किनारे नर्सरी की ओर खींच ले गए। वहाँ पीड़िता के दोस्त को बंधक बनाकर उसकी पिटाई की गई, जबकि चारों ने मिलकर नाबालिग के साथ गैंगरेप की वारदात को अंजाम दिया। पीड़िता ने एक आरोपी को पहचान लिया था, जिसके आधार पर उसने मंगलवार को बतौली थाने में शिकायत दर्ज कराई।पुलिस की कार्रवाई
बतौली पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए बुधवार को चारों आरोपियों—विलसन खेस, कुनाल केरकेट्टा, संजय खेस और एक नाबालिग—को गिरफ्तार कर लिया। उनके खिलाफ POCSO एक्ट की धारा 4 और 6, साथ ही भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 70(2) के तहत मामला दर्ज किया गया है। हालांकि, पुलिस और स्थानीय अधिकारी इस मामले में ज्यादा जानकारी देने से कतरा रहे हैं, जिससे कई सवाल खड़े हो रहे हैं।छत्तीसगढ़ में बढ़ती दुष्कर्म की घटनाएँ
छत्तीसगढ़ में नाबालिग लड़कियों के खिलाफ यौन अपराधों की बाढ़ सी आ गई है। हाल के महीनों में ऐसी कई घटनाएँ सामने आई हैं, जो समाज और प्रशासन के लिए खतरे की घंटी हैं।

  • बिलासपुर (मार्च 2024): 5 साल की बच्ची के साथ गैंगरेप और 3 साल की बच्ची की रेप के बाद हत्या की घटना ने पूरे राज्य को हिलाकर रख दिया।
  • कोरिया (अक्टूबर 2024): एक सीरियल रेपिस्ट ने अपनी 11 साल की बेटी और 12 साल की भतीजी के साथ दुष्कर्म किया।
  • NCRB आँकड़े (2023): छत्तीसगढ़ में दुष्कर्म के 58% मामले नाबालिग लड़कियों से संबंधित हैं, जो देश में तीसरे स्थान पर है।

सोशल मीडिया और अपराध का गठजोड़
सोशल मीडिया के बढ़ते दुरुपयोग ने भी ऐसी घटनाओं को बढ़ावा दिया है। हालाँकि यह मामला सोशल मीडिया से सीधे तौर पर जुड़ा नहीं है, लेकिन हाल के कई मामलों में इंस्टाग्राम और फेसबुक जैसे प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल नाबालिगों को फँसाने के लिए किया गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चों की ऑनलाइन गतिविधियों पर अभिभावकों की निगरानी और साइबर सुरक्षा जागरूकता की कमी अपराधियों को प्रोत्साहन दे रही है। समाज और सरकार से सवाल
यह घटना छत्तीसगढ़ में नाबालिगों की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था की बदहाल स्थिति को उजागर करती है। आखिर कब तक मासूम बच्चियाँ ऐसे दरिंदों का शिकार बनती रहेंगी? पुलिस की चुप्पी और समाज की उदासीनता इस आग में घी डाल रही है। जरूरत है कठोर कानूनी कार्रवाई, सामाजिक जागरूकता और बच्चों की सुरक्षा के लिए ठोस नीतियों की।निष्कर्ष:
बेलकोटा की इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया कि छत्तीसगढ़ में नाबालिग लड़कियाँ कितनी असुरक्षित हैं। समाज को जागना होगा, अभिभावकों को सतर्क रहना होगा और पुलिस को और सख्ती बरतनी होगी। यह सिर्फ एक घटना नहीं, बल्कि हमारी व्यवस्था की नाकामी का जीता-जागता सबूत है।

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