Mohammed israil
बिलासपुर रायपुर। छत्तीसगढ़ में 17 दिन से जारी एनएचएम कर्मचारियों की हड़ताल अब टकराव के निर्णायक दौर में पहुंच गई है। सरकार ने कड़ा रुख अपनाते हुए हड़ताल का नेतृत्व कर रहे प्रदेश अध्यक्ष श्याम मोहन दवे दुबे समेत 60 कर्मचारियों की संविदा नियुक्ति को तत्काल प्रभाव से समाप्त करने का आदेश जारी कर दिया। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी बिलासपुर के स्तर से जारी इस कार्रवाई ने कर्मचारियों में आक्रोश और स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मचा दिया है। इस कदम का सीधा असर प्रदेशभर में पहले से चरमराई स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ रहा है। मालूम हो की 16000 से अधिक कर्मचारी हड़ताल पर पिछले 17 दिनों से हैं।



छत्तीसगढ़ में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के कर्मचारी अपनी 10 सूत्रीय मांगों को लेकर पिछले 17 दिन से हड़ताल पर हैं। इन मांगों में नियमितिकरण, वेतनवृद्धि, नौकरी की सुरक्षा, जोखिम भत्ता, पदोन्नति सहित कई महत्वपूर्ण मुद्दे शामिल हैं। कर्मचारियों का कहना है कि वे लंबे समय से आंदोलनरत हैं, लेकिन शासन ने बार-बार आश्वासन देने के बावजूद उनकी मांगों पर अमल नहीं किया।
इसी बीच शासन-प्रशासन ने सख्ती दिखाते हुए बड़ा फैसला लिया है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) बिलासपुर की ओर से आदेश जारी कर प्रदेश अध्यक्ष श्याम मोहन दवे दुबे सहित 60 संविदा कर्मचारियों की सेवाएं तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दी गईं। आदेश में साफ लिखा है कि बार-बार नोटिस देने और समझाइश के बावजूद कर्मचारी काम पर उपस्थित नहीं हुए। राज्य शासन ने इस कार्रवाई को छत्तीसगढ़ सिविल सेवा आचरण नियम 1965 और मानव संसाधन नीति-2018 का हवाला देकर उचित ठहराया है।
इस आदेश के बाद एनएचएम संगठन और भी आक्रामक हो गया है। कर्मचारी नेताओं ने चेतावनी दी है कि शासन की यह कार्रवाई संघर्ष को और तेज करेगी। वहीं स्वास्थ्य सेवाओं पर इसका गहरा असर पड़ रहा है। ग्रामीण अंचलों के अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में टीकाकरण, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाएं, राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रम और आपातकालीन सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हैं।
स्पेशल बॉक्स 1: कर्मचारियों की प्रमुख मांगें
- संविदा कर्मचारियों का नियमितिकरण
- समान काम के लिए समान वेतन
- पदोन्नति की व्यवस्था
- सेवा सुरक्षा और सेवानिवृत्ति लाभ
- वार्षिक वेतनवृद्धि
- जोखिम भत्ता और महंगाई भत्ता
- स्थानांतरण नीति स्पष्ट करने की मांग
- कार्य अवधि और ड्यूटी टाइम तय करना
- अवकाश नीति में सुधार
- स्वास्थ्य बीमा और दुर्घटना बीमा सुविधा
स्पेशल बॉक्स 2: हड़ताल का असर
- टीकाकरण अभियान ठप
- ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाएं चरमराईं
- मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं पर संकट
- अस्पतालों में मरीजों की बढ़ी परेशानी
- कई स्वास्थ्य केंद्रों में ताले लटके
स्पेशल बॉक्स 3: प्रशासन की दलील
- कर्मचारियों को नोटिस देकर समझाइश दी गई थी
- बार-बार चेतावनी के बावजूद काम पर हाजिर नहीं हुए
- संविदा नियुक्ति समाप्त करना मजबूरी थी
- स्वास्थ्य सेवाओं को प्रभावित होने से रोकना है उद्देश्य
आंदोलन की जड़ें
एनएचएम कर्मचारियों की यह हड़ताल अचानक नहीं है। पिछले कई वर्षों से संगठन अपनी मांगों को लेकर आंदोलन करता रहा है।



