Mohammed israil
बिलासपुर। सरकार के वादे और गारंटी खोखले साबित हो रहे हैं। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के संविदा कर्मचारी नियमितीकरण की मांग पर पिछले 14 दिनों से हड़ताल पर डटे हुए हैं। रविवार को भी स्वास्थ्य सेवाएं ठप रहीं। जिला अस्पताल, सीआईएमएस, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों से लेकर ग्रामीण इलाकों के आरोग्य मंदिरों तक पर ताले लटके रहे।हड़तालियों ने रविवार को अनोखा विरोध दर्ज कराया। उन्होंने मुख्यमंत्रियों और मंत्रियों के मुखौटे पहनकर “क्या हुआ तेरा वादा” गाना बजाया और जनता के बीच सवाल रखा—आखिर चुनाव पूर्व किए वादों और मोदी की गारंटी का क्या हुआ?




✦ आदेश की प्रतियां जलाईं
हड़ताल पर बैठे कर्मचारियों ने स्वास्थ्य सचिव और सीएमएचओ द्वारा जारी उस आदेश की प्रतियां जलाईं, जिसमें हड़ताल खत्म कर तत्काल ड्यूटी पर लौटने का निर्देश था। कर्मचारियों का कहना है कि जब तक नियमितीकरण नहीं होगा, हड़ताल जारी रहेगी।
✦ स्वास्थ्य सेवाएं चरमराईं
हड़ताल की वजह से जिलेभर की स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह से ठप हो गई हैं।
- जिला अस्पताल और सीआईएमएस में ओपीडी व शल्यक्रिया सेवाएं बाधित।
- 5 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और 44 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बंद।
- टीबी, मलेरिया, टीकाकरण, जन्म-मृत्यु पंजीयन, मातृ-शिशु स्वास्थ्य कार्यक्रम जैसी राष्ट्रीय स्वास्थ्य योजनाएं प्रभावित।
- ग्रामीण क्षेत्रों के आयुष्मान आरोग्य मंदिर भी बंद, जिससे सामान्य सर्दी-बुखार और बरसाती बीमारियों से जूझ रहे मरीजों को इलाज नहीं मिल पा रहा।
मजबूरन लोगों को निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ रहा है।
✦ संघ का अल्टीमेटम
कार्यकारी प्रांताध्यक्ष श्याम मोहन दुबे ने साफ कहा कि—
“अगर सरकार नींद से नहीं जागी तो यह हड़ताल नियमितीकरण तक जारी रहेगी।”
NHM कर्मचारियों की मांगें
- संविदा कर्मचारियों का स्थायीकरण (नियमितीकरण)
- समान काम के लिए समान वेतन
- सेवा शर्तों में सुधार और नौकरी की सुरक्षा
सरकार का रुख
- स्वास्थ्य सचिव और सीएमएचओ ने आदेश जारी कर कर्मचारियों को काम पर लौटने को कहा।
- आदेश में चेतावनी—काम पर नहीं लौटे तो होगी कार्रवाई।
- बावजूद इसके कर्मचारी आदेश की प्रतियां जलाकर विरोध जता रहे हैं।
हड़ताल का असर
- OPD और आपात सेवाएं प्रभावित
- टीकाकरण और राष्ट्रीय कार्यक्रम ठप
- ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्रों में ताले
- बरसाती बीमारियों के मरीज इलाज को तरसे
- निजी अस्पतालों पर बढ़ा बोझ
✦ प्रदर्शन में मौजूद पदाधिकारी
पुरुष विंग :
जिला अध्यक्ष राजकुमार यादव, उपाध्यक्ष जीवन महंत, सचिव प्रमोद पटेल, डॉ. सौरभ शर्मा, संजय सिंह, सतीश चौहान, सोहन कुंभकार, यशपाल नेताम, सचिन कुमार, दीपक यादव, भरत लाल सेन, बी. रमेश, कोषाध्यक्ष मुकेश अग्रवाल, महामंत्री ऋतु राज शर्मा, सह-कोषाध्यक्ष रोशन साहू, रोहित श्रीवास, ऋषिकेश गुप्ता, विश्वामित्र सिंगरौल, डॉ. अभिषेक बीबे, डॉ. नवनीत कौशिक, ताहिर शेख, प्रदीप रॉय, सुदर्शन साहू, अश्वन देवांगन सहित बड़ी संख्या में पदाधिकारी सक्रिय रहे।
महिला विंग :
अध्यक्ष अजीता पांडेय, उपाध्यक्ष डॉ. सिंड्रेला पाल, सरोजनी करियारे, सुमन शर्मा, कुसुम सिंह, मित्राणी चौधरी, रूपवती मरावी, प्रभा पटेल (तखतपुर), नीता गौतम (तखतपुर), पूजा यादव, कुमुदनी सिंह (बिल्हा), अंबेश्वरी कुर्रे (बिल्हा), ममता ध्रुव (बिल्हा), नम्रता धुर्वे (तखतपुर), अंजली वर्मा (सिम्स), इंदु साहू (जिला अस्पताल), रिंकी सोनवानी (बिल्हा), प्रियंका भगत सहित बड़ी संख्या में महिला पदाधिकारी भी हड़ताल में शामिल रहीं।
वादे बनाम हकीकत
- चुनाव 2023 से पहले मौजूदा मंत्रियों ने संविदा कर्मचारियों के नियमितीकरण का वादा किया था।
- केंद्र की ओर से “मोदी की गारंटी” भी दी गई थी कि सरकार बनने के 100 दिन के भीतर कार्रवाई होगी।
- अब कर्मचारी सवाल पूछ रहे हैं कि 100 दिन पूरे होने के बाद भी कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
👉 इस हड़ताल ने सरकार को मुश्किल में डाल दिया है। जनता इलाज के लिए भटक रही है और विपक्ष को सरकार को घेरने का बड़ा मुद्दा मिल गया है।



