Mohammed israil
“छात्राओं से छेड़छाड़ करने वाला शिक्षक सेवा में बरकरार”

बिलासपुर। नाबालिग छात्राओं से बेडटच और अभद्र व्यवहार के दोषी पाए गए सरकारी शिक्षक की अपील को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सख्ती से खारिज कर दिया। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा ने अपने आदेश में कहा कि शिक्षक का पद केवल नौकरी नहीं, बल्कि विश्वास और जिम्मेदारी का प्रतीक होता है। किसी भी नाबालिग छात्रा के साथ यौन या शोषणकारी कृत्य सिर्फ व्यावसायिक कदाचार नहीं बल्कि पाक्सो अधिनियम के तहत दंडनीय गंभीर अपराध है, जिसके लिए कठोर सजा का प्रावधान है।
मामला क्या है?
मुंगेली जिले के बरेला निवासी शिक्षक कीर्ति कुमार शर्मा, शासकीय स्कूल में गणित व अंग्रेजी पढ़ाने के लिए पदस्थ थे। लेकिन वे बिना अधिकार के 7वीं कक्षा में जाकर विज्ञान पढ़ाने के नाम पर छात्राओं के साथ बेडटच, अभद्र टिप्पणी, और तंबाकू सेवन करते थे। छात्राओं ने इसकी शिकायत जिला शिक्षा अधिकारी से की। जांच में दोष सिद्ध हुआ और मामला पुलिस तक पहुंचा।
2 मार्च 2022 को फास्ट ट्रैक कोर्ट (एफटीसी) ने शिक्षक को 2 साल 2 माह 6 दिन की कैद और 2500-2500 रुपये का अर्थदंड (दो बार) की सजा सुनाई थी। इसके खिलाफ शिक्षक ने हाईकोर्ट में अपील की थी और सजा पर रोक लगाने की मांग की थी।
कोर्ट का सख्त रुख
सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ने कहा –
- “नाबालिग छात्राओं के साथ छेड़छाड़ बाल शोषण के समान है।”
- “पीड़िताओं की गवाही ठोस और पुष्ट है, जिसे नकारने का कोई कारण नहीं।”
- “शिक्षक का आचरण न केवल अपराध है बल्कि समाज और शिक्षा व्यवस्था पर कलंक भी।”
हाईकोर्ट ने एफटीसी के आदेश को बरकरार रखते हुए अपील को खारिज कर दिया।
शिक्षक का अपराध
- 7वीं कक्षा में बिना अधिकार पढ़ाने जाता था
- छात्राओं से बेडटच और अभद्र टिप्पणी
- कक्षा में तंबाकू, गुड़ाखू का सेवन
- शौचालय जाने पर छात्राओं पर अभद्र टिप्पणी
जांच और कार्रवाई
- खंड शिक्षा अधिकारी प्रतिमा मंडलोई ने जांच की
- छात्राओं और शिक्षकों के लिखित बयान दर्ज
- दोष सिद्ध होने पर पुलिस केस दर्ज
सजा
- एफटीसी ने 2 साल 2 माह 6 दिन की कैद
- 2500-2500 रुपये का अर्थदंड
गंभीर सवाल
👉 सजा के तीन साल बाद भी आरोपी शिक्षक सेवा में है – क्या शिक्षा विभाग ने कार्रवाई से परहेज किया?



