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बिलासपुर हाई कोर्ट ने चाकुओं की बिक्री पर जताई गंभीर चिंता, ई-कॉमर्स और दुकानों पर सख्ती के निर्देश

Mohammed Israil
Mohammed Israil  - Editor
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बिलासपुर छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने ऑनलाइन और ऑफलाइन दुकानों में प्रतिबंधित चाकुओं की खुलेआम बिक्री पर गंभीर चिंता जताते हुए राज्य सरकार को कड़े कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस बिभु दत्ता गुरु की खंडपीठ ने कहा कि चाकूबाजी की बढ़ती घटनाओं और धारदार हथियारों की आसान उपलब्धता ने स्थिति को “बेहद चिंताजनक” बना दिया है। कोर्ट ने ई-कॉमर्स साइट्स के जरिए चाकुओं की बिक्री पर तत्काल रोक लगाने और स्थानीय दुकानों में बिक्री पर नियंत्रण की आवश्यकता पर जोर दिया।हाई कोर्ट ने मीडिया  की एक रिपोर्ट के आधार पर स्वतः संज्ञान लेते हुए यह जनहित याचिका शुरू की, जिसमें बिलासपुर में पान की दुकानों, जनरल स्टोर्स और गिफ्ट शॉप्स के साथ-साथ ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर डिजाइनर और बटनदार चाकुओं की बिक्री का खुलासा किया गया था। कोर्ट ने गृह विभाग के प्रमुख सचिव को पक्षकार बनाते हुए व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल करने का आदेश दिया था। सोमवार को सुनवाई के दौरान, राज्य सरकार ने शपथ पत्र के जरिए आंकड़े पेश किए। इसमें बताया गया कि जनवरी 2023 से दिसंबर 2023 तक आर्म्स एक्ट के तहत 225 मामले दर्ज हुए, जबकि 2024 में 226 और 2025 में अब तक 32 मामले सामने आए हैं। इन मामलों में बड़ी संख्या में चाकू और अन्य धारदार हथियार जब्त किए गए। कोर्ट ने टिप्पणी की कि ये चाकू “सब्जी काटने के लिए नहीं, बल्कि हिंसक अपराधों के लिए खरीदे जा रहे हैं,” और आर्म्स एक्ट के बावजूद कार्रवाई में ढिलाई चिंता का विषय है।कोर्ट ने कहा, “ऑनलाइन और स्थानीय दुकानों में चाकुओं की आसान उपलब्धता अपराधों को बढ़ावा दे रही है। यदि इस पर तुरंत रोक नहीं लगाई गई, तो हालात और बिगड़ सकते हैं।” कोर्ट ने राज्य सरकार को सितंबर 2025 तक नया हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया, जिसमें प्रतिबंधित चाकुओं की बिक्री रोकने के लिए उठाए गए ठोस कदमों का ब्योरा मांगा गया है। इसके साथ ही, कोर्ट ने बिलासपुर में चाकूबाजी की घटनाओं के आंकड़ों पर भी गौर किया, जिसमें जनवरी से जुलाई 2025 तक 120 मामले दर्ज हुए, जिनमें 7 लोगों की मौत और 122 लोग घायल हुए। कोर्ट ने कहा कि मामूली विवादों में चाकुओं का इस्तेमाल खतरनाक प्रवृत्ति को दर्शाता है, जिसे रोकने के लिए सख्त नियम और प्रभावी प्रवर्तन जरूरी है। मामले की अगली सुनवाई अक्टूबर 2025 में होगी, जिसमें सरकार को अपनी कार्रवाई की प्रगति रिपोर्ट पेश करनी होगी। यह कदम बिलासपुर और रायपुर जैसे शहरों में बढ़ती हिंसक घटनाओं पर अंकुश लगाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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