Mohammed israil
बिलासपुर।
आंगनबाड़ी में खेल रही तीन साल की मासूम मुस्कान महिलांग की दर्दनाक मौत पर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सख्ती दिखाई है। 14 अगस्त को डीजे का लोहे का पाइप गिरने से मासूम की मौत हो गई थी। शुरुआती स्तर पर मामले को दबाने की कोशिश हुई, लेकिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का कारण सामने आने पर FIR दर्ज हुई। अब हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए इसे जनहित याचिका मानकर गंभीर रुख अपनाया है।
कोर्ट की टिप्पणी

डिवीजन बेंच—चीफ जस्टिस रमेश कुमार सिन्हा और जस्टिस बी.डी. गुरु ने सुनवाई के दौरान सख्त लहजे में पूछा–
“आंगनबाड़ी परिसर में डीजे का सामान क्यों रखा गया, क्या वहाँ नाच-गाना होता है? यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण घटना है।”
कलेक्टर से मांगा जवाब
कोर्ट ने बिलासपुर कलेक्टर को व्यक्तिगत शपथपत्र के साथ विस्तृत रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया है। इसमें यह स्पष्ट करना होगा–
- अब तक इस मामले में क्या कार्रवाई हुई?
- जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही कैसे तय की जा रही है?
- पीड़ित परिवार को कितनी आर्थिक सहायता दी गई?
- भविष्य में आंगनबाड़ी केंद्रों में सुरक्षा को लेकर क्या कदम उठाए जाएंगे?
अदालत ने स्पष्ट चेतावनी दी— “हमारी नजर में आया तो किसी को नहीं छोड़ेंगे।”
अगली सुनवाई 26 अगस्त को होगी।
घटना की टाइमलाइन
- 14 अगस्त : आंगनबाड़ी में खेल रही मुस्कान पर डीजे का पाइप गिरा, गंभीर चोट।
- 14-20 अगस्त : मामला दबा रहा, कोई FIR दर्ज नहीं।
- 21 अगस्त : पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का कारण सिर की चोट निकला।
- उसी दिन : डीजे संचालक रोहित देवांगन व साथियों पर FIR दर्ज।
- 23 अगस्त : हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेकर मामला जनहित याचिका माना।
आंगनबाड़ी में मौत के बाद उठे सवाल
- बच्चों के केंद्र में डीजे का सामान क्यों रखा गया?
- विभाग और पुलिस ने FIR दर्ज करने में देरी क्यों की?
- क्या पीड़ित परिवार को समय पर मुआवजा दिया गया?
- सुरक्षा नियमों की अनदेखी पर कौन जिम्मेदार?
कोर्ट की सख्त टिप्पणी

“आंगनबाड़ी परिसर में डीजे का सामान क्यों रखा गया? क्या यहाँ नाच-गाना होता है? यह बेहद गंभीर और दुर्भाग्यपूर्ण है।”
— हाईकोर्ट डिवीजन बेंच
पीड़ित परिवार की स्थिति
- मासूम मुस्कान की मौत से परिवार गहरे सदमे में।
- परिजनों ने कहा—“हमारी बच्ची की मौत लापरवाही से हुई, जिम्मेदारों को सख्त सजा मिलनी चाहिए।”



