Mohammed israil
बिलासपुर,रायपुर। छत्तीसगढ़ में मंत्रिमंडल विस्तार की रेस अब फाइनल दौर में प्रवेश कर चुकी है, लेकिन इस सिलसिले में अचनाक से गायब होने वाले तीन नाम—धरमलाल कौशिक, अजय चंद्राकर और राजेश मूणत—कोंटूर पर नहीँ नजर आ रहे। यह वही तीन दिग्गज प्रतिनिधि हैं, जिनकी रमन सिंह की अगुवाई वाली भाजपा सरकार में गहरी पैठ रही थी। सूत्र बताते हैं कि यह “पिक्चर अभी बाकी है”—लेकिन सवाल यह है कि क्या यह ‘देखने वाला घटक’ कुछ समय के लिए बदल गया है?
कौन हैं ये तीन, और अब क्यों दुर्लभ हुए?



- धरमलाल कौशिक
- रमन सिंह शासनकाल में विधानसभा अध्यक्ष, भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष, और विपक्ष नेता जैसे उच्च पदों पर रहे। वर्तमान में विधानसभा में डिप्टी स्पीकर की भूमिका निभा रहे हैं।
- मंत्रिमंडल की संभावनाओं से दूर होने के दो संभावित कारण: उपसरात्मक भूमिका (स्पीकर/विपक्ष) की पॉलिटिकल रैंक, और सत्ता में लगातार बदलाव के चलते “परिवर्तनकारी तस्वीर” में फिट न बैठना।
- अजय चंद्राकर

- रमन सिंह के मंत्रिमंडल के पूर्व मंत्री (पार्लियामेंट्री अफेयर्स, स्वास्थ्य, तकनीकी शिक्षा आदि), वर्तमान में पांचवीं बार विधायक।
- उनकी गैर-मौजूदगी से संकेत मिलता है कि अब “नया चेहरा” अधिक प्राधान्य पा रहा है, और सीनियर नेताओं को ठहरावकारी भूमिकाओं से बाहर रखने की राजनीति हो रही है।
- राजेश मूणत
- राजधानी और रायपुर क्षेत्र से भाजपा के पुराने चेहरे, जिन्होंने मुख्यमंत्री के करीबी के रूप में कई राजनीतिक मिजाज़ तय किए जो अब संभवत: नए समीकरणों में फिट नहीं हो पा रहे।
रमन सिंह दिल्ली में, पर मायूसी छत्तीसगढ़ में?
वर्तमान विधानसभा अध्यक्ष रमन सिंह के दिल्ली दौरे के चलते राजनीतिक थियेटर में मौजूदगी की कमी ने इन तीनों नामों की महत्ता को मीडिया और रणनीतिक गायबियों में ढक दिया है। पर क्या यह महज़ टेक्निकल कनेक्टिविटी समस्या है या क्षणिक अनदेखी?
क्या है तस्वीर अभी बाकी?
- मंत्रिमंडल विस्तार में मौजूदा संतुलन और बेल्ट-उपस्थिती को मद्देनज़र रखते हुए, सीनियर नेताओं की जगह नए और “फ्रेश चेहरों” को प्राथमिकता मिल रही है।
- यह निरंतरता बनाम परिवर्तन की राजनीति का क्लासिक समीकरण है—जहां कुछ पुराने चेहरे पीछे हट गए हैं, उनका राजनीतिक वजन अभी भी कायम है, खासकर पार्टी संगठनात्मक भूमिकाओं में।
- दिल्ली में रमन सिंह की गैर-मौजूदगी भी सयुक्त निर्णय और संवादित समझौते को फिलहाल बाधित कर रही है।
टूटता नजरिया या धीमा रिफ्रेश—क्लोज अप:
नाम पद/भूमिका अब तक मौजूदा परिप्रेक्ष्य में स्थिति धरमलाल कौशिक डिप्टी स्पीकर, पूर्व BJP प्रदेश अध्यक्ष सस्पेंस दृश्य; “स्टेबल रोल” पर टिके, लेकिन मंत्रिमंडल से दूरी बनी अजय चंद्राकर पूर्व मंत्री, वर्तमान विधायक अनुभव फिर भी रेस से बाहर; नया समीकरण प्राथमिकता में राजेश मूणत रायपुर क्षेत्रीय नेता राजधानी समीकरण की बातचीत में शामिल होने के बावजूद अभी गायब
बॉटम-लाइन:
यह तीनों नाम सियासी स्मृति में स्पष्ट रूप से दर्ज हैं, लेकिन इस विस्तार में उनका “अतिरिक्त दृश्य” वर्जित दिख रहा है। परिवर्तन की हवा में अब युवा चेहरे, क्षेत्रीय संतुलन, और नया राजनीतिक सन्देश प्राथमिकता में हैं—तभी यह सवाल उठता है: क्या ये तीन सीनियर नेता पूर्णतः ओल्ड न्यूज हैं, या यह “फिर वापसी” की स्टोरी का इंटरवल है?



