Mohammed israil
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ की स्वास्थ्य व्यवस्था बैसाखियों पर आ गई है। प्रदेशभर के 16 हजार राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) कर्मचारी अपनी नियमितीकरण और 10 सूत्रीय मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए हैं। हड़ताल का सीधा असर प्रदेश के अस्पतालों, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और राष्ट्रीय पोर्टल तक पर पड़ा है। नतीजा यह हुआ है कि इलाज के लिए मरीज अस्पतालों में भटक रहे हैं और दूसरी तरफ स्वास्थ्य सेवाओं का मानक तय करने वाला पोर्टल भी ठप हो गया है।






कर्मचारियों की नाराज़गी – 20 साल सेवा फिर भी नियमितीकरण नहीं
NHM कर्मचारी संघ का कहना है कि बीते 20 वर्षों से लगातार सेवा देने के बावजूद आज तक उनका नियमितीकरण नहीं हुआ। समय-समय पर सरकार से हुई वार्ताओं में केवल आश्वासन मिले हैं। कर्मचारियों को न तो स्थायी दर्जा मिला, न ही उचित वेतनमान और न ही सामाजिक सुरक्षा लाभ।
संघ की 10 सूत्रीय मांगों में –
- नियमितीकरण
- समान कार्य के लिए समान वेतन
- स्थानांतरण नीति
- सेवा शर्तों का निर्धारण
- सामाजिक सुरक्षा लाभ
- और अन्य सुविधाएं शामिल हैं।
संघ का आरोप – उपेक्षा और टालमटोल की नीति से मजबूर होकर आंदोलन
संघ का कहना है कि सरकार की लगातार उपेक्षा और टालमटोल ने कर्मचारियों को आंदोलन के लिए मजबूर किया है। यह सिर्फ कर्मचारियों की लड़ाई नहीं, बल्कि लाखों मरीजों और पूरे स्वास्थ्य तंत्र का सवाल है।
संघ का बयान – जनता की सेवा की, अब हक की बारी
संघ के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष श्याम मोहन दुबे ने कहा –
“हमने कोरोना जैसी महामारी और आपातकालीन परिस्थितियों में भी प्रदेश की जनता की सेवा की। लेकिन जब हम अपने भविष्य और हक की बात करते हैं तो सरकार मौन है। जब तक हमारी मांगें पूरी नहीं होंगी, आंदोलन जारी रहेगा।”
हाई लेवल बैठक में मिला केवल आश्वासन
आज 18 अगस्त को हुई राज्यस्तरीय बैठक में स्वास्थ्य मंत्री, सचिव, NHM आयुक्त, मिशन संचालक सहित प्रांतीय टीम शामिल रही। बैठक में स्वास्थ्य मंत्री ने आश्वासन दिया कि जल्द मांगों पर विचार होगा। इस बैठक में कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष श्याम मोहन दुबे, मुकेश अग्रवाल, प्रफुल पॉल, CHO संघ के प्रांत अध्यक्ष भी शामिल हुए।
संघ नेताओं ने सरकार से पुनः आग्रह किया कि तुरंत ठोस पहल की जाए, अन्यथा आंदोलन और ज्यादा उग्र रूप लेगा।
बिलासपुर जिले से बड़ी भागीदारी
आज जिले के 735 संविदा स्वास्थ्य कर्मियों ने नियर गार्डन में आंदोलन में भाग लिया। कर्मचारियों ने ऐलान किया है कि यदि सरकार ने जल्द ठोस निर्णय नहीं लिया तो हड़ताल और व्यापक होगी और प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह ठप हो जाएगी।



