Mohammed israil
68 फीट ऊंचाई से गिरे मजदूर, स्ट्रक्चर कमजोर था – पहले ही दी गई थी जानकारी, फिर भी अनसुनी की गई चेतावनी
बिलासपुर/सीपत। एशिया के सबसे बड़े और देश के 9 रत्नों में शामिल एनटीपीसी सीपत प्लांट में एक बार फिर लापरवाही ने जान ले ली। बुधवार को यूनिट-5 में मेंटनेंस के दौरान प्री-एयर हीटर प्लेटफॉर्म अचानक टूट गया, जिससे 68 फीट (करीब 21 मीटर) ऊंचाई पर काम कर रहे 12 मजदूरों में से 2 की मौत हो गई और 3 घायल हो गए।



यह हादसा न सिर्फ प्रबंधन की लापरवाही का नतीजा है, बल्कि एनटीपीसी की पुरानी सुरक्षा विफलताओं को भी उजागर करता है। मृतक मजदूरों में एक की पहचान श्याम साहू (25) और दूसरे की प्रताप सिंह के रूप में हुई है।
हादसे की पूरी कहानी: कैसे टूटा प्लेटफॉर्म?
- यूनिट-5 में बॉयलर में लीकेज के कारण मेंटनेंस चल रहा था।
- बुधवार सुबह 9 बजे मजदूर प्री-एयर हीटर प्लेटफॉर्म पर लोहा रख रहे थे।
- क्षमता से अधिक भार के कारण स्ट्रक्चर अचानक भरभराकर गिर गया।
- लगभग 12 मजदूर नीचे गिर गए, कुछ दब भी गए।
- 2 की मौत, 3 घायल; बाकी को बचाया गया।
सुरक्षा को लेकर मजदूरों ने पहले ही दी थी चेतावनी
“हमने बताया था कि प्लेटफॉर्म कमजोर है, लेकिन किसी ने नहीं सुनी।”
– देव कुमार साहू, श्रमिक
- मजदूरों का आरोप है कि स्ट्रक्चर की हालत पहले से खराब थी।
- प्रबंधन को मौखिक रूप से कई बार बताया गया, कोई निरीक्षण नहीं हुआ।
- मौके पर हेलमेट-जैकेट दिए गए थे, लेकिन ऊंचाई पर गिरने से क्या बचाते?
परिजनों का आक्रोश: जानकारी तक नहीं दी गई, गेट पर बिलखते रहे लोग
- हादसे की खबर मिलते ही परिजन गेट पर इकट्ठा हो गए।
- महिलाओं की भीड़, रोते-बिलखते लोग गेट से अंदर जाने की गुहार लगाते रहे।
- प्रबंधन ने शुरुआती जानकारी साझा नहीं की, घंटों इंतजार करवाया।
- जनसंपर्क अधिकारी प्रवीण रंजन भारती के हस्तक्षेप के बाद ही स्पष्टता आई।
हादसे के बाद चक्काजाम, सड़क पर उतरे लोग
- मजदूरों के गांव पोड़ी से बड़ी संख्या में लोग पहुंचे।
- एनटीपीसी के मटेरियल गेट पर भीड़ जुटी, नाराजगी जताई।
- सड़क पर चक्काजाम, महिलाएं बैठ गईं।
- 8 घंटे तक यातायात बाधित, पुलिस-प्रशासन की समझाइश पर भी नहीं माने।
- बाद में संयुक्त कलेक्टर और एएसपी के हस्तक्षेप के बाद स्थिति संभली।
टेंडर पर चल रहा था मेंटनेंस, ठेकेदार कंपनी पर सवाल
- टेंडर मेसर्स गोरखपुर कंस्ट्रक्शन प्रा. लि. को दिया गया था।
- यह कंपनी स्थानीय मजदूरों से काम करा रही थी।
- हादसे के समय अधिकांश मजदूर सीपत क्षेत्र के ही थे।
- प्रशिक्षण और सुरक्षा मानकों की जांच नहीं हुई थी।
मुआवजा और नौकरी की घोषणा
- प्रबंधन और जिला प्रशासन की बैठक के बाद यह निर्णय:
- मृतकों के परिजनों को 5-5 लाख रुपए मुआवजा (NTPC + ठेकेदार)।
- मृतक की पत्नी को संविदा अर्धकुशल पद पर नौकरी।
- अंतिम संस्कार हेतु ₹50,000 की सहायता।
- घायल मजदूरों का इलाज NTPC खर्चे पर अपोलो में।
एनटीपीसी में पहले भी हुए हैं हादसे – क्यों नहीं सुधरती व्यवस्था?
तारीखघटनापरिणाम2021 बॉयलर फटने से यूनिट-4 में धमाका 4 श्रमिक घायल 2023 प्लेटफॉर्म से गिरा मजदूर 1 की मौत 2024 चिमनी में गैस लीकेज 2 झुलसे, सुरक्षा जांच तक नहीं 2025 (अब) प्लेटफॉर्म गिरा 2 मौतें, 3 घायल
हर बार “जांच होगी” का आश्वासन, लेकिन सुरक्षा व्यवस्था जस की तस।
प्रबंधन के बयान
🗣️ प्रवीण रंजन भारती, जनसंपर्क अधिकारी:
“हादसे की जांच कराई जाएगी, जिम्मेदारों पर कार्रवाई होगी।”
🗣️ राजेंद्र जायसवाल, एएसपी:
“श्रमिकों और प्रबंधन के बयान लिए जा रहे हैं, लापरवाही पाई गई तो एफआईआर दर्ज होगी।”
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हेलमेट और जैकेट से नहीं, ज़िम्मेदारी से मिलती है सुरक्षा

एनटीपीसी प्रबंधन को अब यह समझना होगा कि ‘हेलमेट और जैकेट’ सुरक्षा नहीं, सिर्फ दिखावा हैं। सुरक्षा गियर किसी सिस्टम का विकल्प नहीं हो सकते, खासकर तब जब स्ट्रक्चर ही कमजोर हो, जब मजदूर की चेतावनी को अनसुना कर दिया जाए, और जब जिम्मेदार सिर्फ ठेकेदार के भरोसे पूरी जान जोखिम में डाल दें।
यह पहला हादसा नहीं है। पिछले कुछ वर्षों में सीपत प्लांट में कई बार दुर्घटनाएं हुई हैं—बॉयलर फटना, ऊँचाई से गिरना, गैस लीकेज, आदि। हर बार एक ही स्क्रिप्ट दोहराई जाती है:
• हादसा होता है
• जांच की घोषणा होती है
• कुछ दिनों तक शोक-संवेदना और फिर सब शांत।
लेकिन जो श्रमिक अपनी जान गंवा देते हैं, उनके लिए न जांच मायने रखती है न घोषणाएं। उनके परिवार के लिए ज़िंदगी वहीं रुक जाती है।
इस बार फर्क यही होना चाहिए कि जवाबदेही तय हो।
- किस इंजीनियर ने कमजोर प्लेटफॉर्म को हरी झंडी दी?
- किस सुपरवाइज़र ने ओवरलोडिंग की अनुमति दी?
- क्यों ठेकेदारों को मनमानी करने की छूट है?
- क्यों सुरक्षा ऑडिट सिर्फ कागजों में होती है?
सवाल सिर्फ लापरवाही का नहीं है, सवाल मानवता का है। जब एक मजदूर प्लेटफॉर्म से गिरकर मरता है, तो केवल एक जिंदगी नहीं जाती, एक पूरा परिवार अंधेरे में चला जाता है।
एनटीपीसी, जो देश की ऊर्जा रीढ़ है, अगर अपने श्रमिकों की सुरक्षा नहीं सुनिश्चित कर सकता, तो यह संस्थान की नैतिक विफलता है। सिर्फ मशीनें चलाने से देश नहीं चलता — उसे चलाने वालों की जान की कीमत समझनी होगी।
अब समय आ गया है कि
- सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाए,
- ठेकेदारी प्रथा की समीक्षा हो,
- और हर हादसे के लिए जिम्मेदार व्यक्ति को कानूनी रूप से उत्तरदायी ठहराया जाए।
अन्यथा अगली बार फिर एक और प्लेटफॉर्म गिरेगा, फिर एक और मां गेट पर बिलखती मिलेगी — और हम सब फिर वही रिपोर्टिंग करेंगे… ‘हादसे की जांच की जा रही है।’



