बिलासपुर कलेक्टर ने बैठक लेकर दिए निर्देश, पशु क्रूरता अधिनियम के तहत होगी सख्त कार्रवाई
बिलासपुर, 5 अगस्त 2025। शहर की सड़कों और ग्रामीण अंचलों में घूमते आवारा पशुओं के कारण लगातार हो रही सड़क दुर्घटनाओं और जन-धन की हानि को लेकर जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। कलेक्टर श्री संजय अग्रवाल ने आज मंथन सभाकक्ष में नगर निगम, पशु चिकित्सा, पुलिस और पंचायत विभाग के अधिकारियों की बैठक लेकर कहा कि अब सड़कों पर घूमते पशुओं के मामलों में उनके मालिकों के खिलाफ पशु क्रूरता अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज की जाएगी।


कलेक्टर ने स्पष्ट निर्देश दिए कि यदि पशु मालिक जानबूझकर अपने मवेशियों को खुला छोड़ते हैं, तो यह सार्वजनिक सुरक्षा और पशु कल्याण के खिलाफ गंभीर अपराध है। इस पर कठोर कार्रवाई की जाएगी।
बैठक में लिए गए प्रमुख निर्णय:
- एफआईआर दर्ज की जाएगी: खुले में मवेशी छोड़ने वाले पशु मालिकों के खिलाफ पशु क्रूरता अधिनियम के तहत।
- संयुक्त टीमें बनेंगी: नगर निगम, पालिका और पशु चिकित्सा विभाग की टीमें चिन्हित क्षेत्रों में करेंगी नियमित दौरे।
- पुलिस की भूमिका: एफआईआर की प्रक्रिया में पुलिस का सक्रिय सहयोग रहेगा।
- जागरूकता अभियान: चौक-चौराहों, पंचायत कार्यालयों में पोस्टर-बैनर से चलाया जाएगा विशेष प्रचार।
- जोनों में निगरानी दल: सुबह-शाम निरीक्षण कर पशुओं की पहचान व मालिकों को समझाइश।
1: पशु क्रूरता अधिनियम (The Prevention of Cruelty to Animals Act, 1960) के तहत क्या है प्रावधान
बिंदु विवरण धारा 11(1)(h) यदि कोई व्यक्ति पशु को इस प्रकार छोड़ता है कि वह भोजन/पानी के बिना भटकता रहे, तो यह अपराध माना जाएगा। धारा 11(1)(i) सार्वजनिक स्थानों पर पशु को बिना देखभाल के छोड़ना दंडनीय अपराध है। दंड पहली बार अपराध पर ₹50 से ₹100 जुर्माना या 3 महीने तक जेल, दोहराव पर ₹5000 तक जुर्माना या 6 महीने तक सजा। FIR दर्ज पुलिस में प्राथमिकी दर्ज कर न्यायालय में मुकदमा चलाया जाता है।
2: छत्तीसगढ़ में गोवंश की आवारा स्थिति — आंकड़े और वास्तविकता
- शहरी क्षेत्रों में समस्या ज्यादा गंभीर: रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग और कोरबा जैसे शहरों में घुमंतू गोवंश से यातायात बाधित होता है।
- दुर्घटनाओं में वृद्धि: सड़क दुर्घटनाओं में 2024 में 300 से अधिक केस गोवंश की वजह से सामने आए।
- गौशालाओं की क्षमता सीमित: सरकारी और निजी गौशालाओं की संख्या पर्याप्त नहीं, कई बंद भी पड़ी हैं।
- ग्रामीण क्षेत्रों में खुला चराई प्रचलन: कुछ क्षेत्रों में यह परंपरा के नाम पर खुले में छोड़ा जाता है।
बॉक्स 3: राज्य शासन ने की है ये विशेष पहल
योजना/प्रावधान विवरण ‘गो-संरक्षण नीति’ वर्ष 2022 में लागू नीति के अंतर्गत आवारा पशुओं के लिए ग्राम स्तर पर संरक्षित स्थल विकसित किए गए। ‘मुख्यमंत्री गौ सेवा योजना’ ग्रामीण क्षेत्रों में गोवंश प्रबंधन हेतु पंचायतों को आर्थिक सहायता दी जाती है। नगर निगम की निगरानी समिति प्रत्येक ज़ोन में निगरानी दल गठित कर पशु-पकड़ो अभियान चलाया गया। गोवंश टैगिंग योजना पशुओं को चिन्हांकित कर मालिक की पहचान तय की जा रही है (पायलट प्रोजेक्ट)।
प्रशासन की अपील

कलेक्टर श्री संजय अग्रवाल ने नागरिकों से अपील की कि वे जिम्मेदार पशु मालिक बनें और अपने मवेशियों को खुला न छोड़ें। उन्होंने कहा कि जागरूकता के साथ-साथ अब प्रशासन कार्रवाई के रास्ते पर चलेगा। समाज को भी इसमें सहयोग करना होगा।
🖊 रिपोर्ट: मोहम्मद इसराइल



