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बिलासपुर में अवैध शराब कारोबारियों के हौसले बुलंद, चकरभाठा में 60 लीटर महुआ शराब के साथ युवक गिरफ्तार

Mohammed Israil
Mohammed Israil  - Editor
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नगाड़ाडीह में फिर शुरू हुई अवैध शराब की ‘फैक्ट्री’, आबकारी विभाग की चुप्पी पर उठे सवाल


बिलासपुर। एक ओर पुलिस प्रशासन अवैध शराब कारोबार को जड़ से खत्म करने की बात करता है, वहीं दूसरी ओर जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। चकरभाठा थाना क्षेत्र के नगाड़ाडीह गांव में  फिर एक बड़ी कार्रवाई के दौरान 60 लीटर महुआ शराब जब्त की गई है। आरोपी प्रेम लाल खटकर को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया गया, जबकि उसका साथी ललित बंजारे मौके से फरार हो गया।

लेकिन इस कार्रवाई ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या बिलासपुर में अवैध शराब के खिलाफ अभियान कमजोर पड़ गया है?


क्या हुईकार्रवाई :

  • गिरफ्तार आरोपी: प्रेम लाल खटकर उर्फ मुन्ना (29 वर्ष), मूल निवासी कोहका थाना शिवरीनारायण, हाल निवासी नगाड़ाडीह, चकरभाठा।
  • जब्त सामग्री: 60 लीटर महुआ शराब, अनुमानित कीमत ₹12,000।
  • कानूनी धारा: छत्तीसगढ़ आबकारी अधिनियम की धारा 34(2) के तहत मामला दर्ज।
  • फरार आरोपी: ललित बंजारे (मकान मालिक) – पुलिस की भनक लगते ही हुआ फरार।

कार्रवाई टीम: निरीक्षक उत्तम साहू के नेतृत्व में, एएसआई राधेलाल ध्रुवे, प्रधान आरक्षक अमर चंद्रा, आरक्षक योगेन्द्र खुटे, सतपुरन जांगड़े, मनीष साहू, गोवर्धन शर्मा, राकेश साहू की भूमिका सराहनीय रही।


क्या बिलासपुर में अवैध शराब पर कार्रवाई सिर्फ औपचारिकता बन गई है?

बिलासपुर जिले के नगाड़ाडीह जैसे अति संवेदनशील इलाकों में बार-बार अवैध महुआ शराब की बड़ी खेप बरामद हो रही है, पर स्थिति जस की तस बनी हुई है। इसके पीछे प्रशासनिक लापरवाही और आबकारी विभाग की निष्क्रियता सबसे बड़ा कारण बनती जा रही है।

  • तखतपुर, मस्तूरी, कोटा जैसे ग्रामीण इलाकों में भी अवैध शराब कारोबार खुलकर फलफूल रहा है, लेकिन स्थानीय प्रशासन और आबकारी विभाग की कार्रवाई  ठप्प है।
  • चकरभाठा, सिरगिट्टी, सकरी जैसे शहरी और अर्ध-शहरी इलाकों में फेरी शराबियों और भट्टियों की सूचना के बावजूद कोई बड़ी कार्रवाई नहीं हो रही है।

👉 ऐसे में सवाल उठता है — क्या केवल पुलिस को ही अवैध शराब के विरुद्ध मोर्चा संभालना होगा? आबकारी अमले की निष्क्रियता प्रशासन की नीयत पर सवाल खड़ा करती है।


आबकारी विभाग कहां है?

“नगाड़ाडीह जैसी जगहों पर हर हफ्ते महुआ शराब की भट्टियां पकड़ी जाती हैं। सवाल यह है कि आबकारी अमला कहां है? गांव-गांव में भट्टी चल रही है और जिम्मेदार अफसर शायद चुप्पी साधे हुए हैं।”


प्रशासन को जगाने वाली कार्रवाई, लेकिन क्या ये काफी है?

चकरभाठा पुलिस की कार्रवाई प्रशंसनीय है, लेकिन इस एक गिरफ्तारी से पूरी समस्या हल नहीं होगी जब तक मूल नेटवर्क पर चोट नहीं की जाती। अवैध शराब के नेटवर्क को संचालित करने वाले सप्लायर, भट्टियां और वितरण व्यवस्था पर सुनियोजित एवं संयुक्त छापेमारी अभियान ही स्थायी समाधान हो सकता है।


✍️ रिपोर्टर: मोहम्मद इसराइल


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