00 छत्तीसगढ़ कनिष्ठ प्रशासनिक सेवा संघ द्वारा घोषित अनिश्चितकालीन हड़ताल के अंतर्ग प्रदेश के समस्त तहसीलदार एवं नायब तहसीलदार हड़ताल के दूसरे दिन भी पूरी निष्ठा, अनुशासन और एकजुटता के साथ डटे हुए
Bilaspur Chhattisgarh बिलासपुर। छत्तीसगढ़ कनिष्ठ प्रशासनिक सेवा संघ द्वारा घोषित अनिश्चितकालीन हड़ताल के अंतर्गत आज प्रदेश के समस्त तहसीलदार एवं नायब तहसीलदार हड़ताल के दूसरे दिन भी पूरी निष्ठा, अनुशासन और एकजुटता के साथ डटे हुए हैं।
संघ का स्पष्ट आरोप है कि शासन एक ओर तो लोक सेवा गारंटी अधिनियम के तहत राजस्व अधिकारियों पर दर्जनों सेवाओं को समय-सीमा में अनिवार्य रूप से प्रदान करने का बोझ डाल रहा है, जबकि दूसरी ओर इन कार्यों को संपादित करने हेतु न तो संसाधन उपलब्ध करा रहा है, न ही आवश्यक तकनीकी/मानव बल।
❗ दोहरी नीति का गंभीर विरोध
📌 नामांतरण, सीमांकन, बंटवारा, ऋण पुस्तिका, नक़्शा नकल, प्रमाण पत्र, शोध क्षमता इत्यादि जैसी सेवाएँ पूरी तरह तहसीलदार और नायब तहसीलदार की कार्यदक्षता, व्यवस्था और निगरानी पर निर्भर हैं। परंतु:
🔴 तहसीलों में कुशल ऑपरेटरों का भारी अभाव है
🔴 पुराने व अनुपयोगी कंप्यूटर, बार-बार क्रैश होता सिस्टम
🔴 नेट कनेक्टिविटी अत्यंत धीमी, नेट भत्ता तक नहीं
🔴 प्रिंटर, स्कैनर, स्टेशनरी का व्यय अधिकारी स्वयं उठा रहे
🔴 वाहन, ईंधन, ड्राइवर का कोई प्रावधान नहीं, फिर भी रोजाना सीमांकन और निरीक्षण कार्य की बाध्यता
🔴 लगातार चल रहे पोर्टलों पर लॉगिन, OTP, अपलोड का दबाव — पर सहायक स्टाफ अनुपलब्ध
🔈 संघ की मांगें बार-बार की गई अनदेखी
संघ ने लंबे समय से बारंबार शासन से अनुरोध किया है कि यदि वह लोक सेवा गारंटी के लक्ष्य व समय-सीमा को लेकर गंभीर है, तो पहले उसे प्रत्येक तहसील में कम से कम 2 कुशल ऑपरेटर, अद्यतन डिजिटल संसाधन, नेट भत्ता, और सरकारी वाहन-सहचालक जैसी मूलभूत व्यवस्थाएँ सुनिश्चित करनी होंगी।
लेकिन दुर्भाग्यवश, शासन केवल निर्देश और दबाव देने में सक्रिय है – समाधान देने में नहीं।
⚠️ जनता के लिए भी चिंता का विषय
यदि समय-सीमा में सेवाएँ नहीं मिलतीं, तो लोक सेवा गारंटी अधिनियम के प्रावधानों के तहत अधिकारी दंडित होते हैं, और जनता नाराज़ होती है। लेकिन जनता को यह पता ही नहीं होता कि इन सेवाओं के पीछे कितना बड़ा संसाधन संकट और प्रशासनिक असंतुलन छिपा है।
📌 संघ की मांगें ही समाधान हैं:
✔️ प्रत्येक तहसील में कम से कम 2 कुशल ऑपरेटर
✔️ कार्यानुकूल कंप्यूटर, प्रिंटर, स्कैनर व इंटरनेट
✔️ वाहन, ईंधन और चालक की स्थायी व्यवस्था
✔️ नेट भत्ता व तकनीकी मानदेय
✔️ काम के अनुसार स्टाफ का वितरण
🔚 लोक सेवा का नाम लेकर जो सेवा दी जा रही है, वह एकपक्षीय दायित्व है – बिना संसाधन, बिना संरचना।
संघ मांग करता है कि यदि शासन वास्तव में जनहित और सेवा सुधार के लिए प्रतिबद्ध है, तो उसे पहले सेवा देने वालों की स्थिति सुधारनी होगी।
अन्यथा यह अधिनियम जनता और अधिकारियों – दोनों के लिए संघर्ष और कुंठा का कारण ही बना रहेगा।
संघ अपनी मांगों को लेकर प्रतिबद्ध है और जब तक सुनवाई नहीं होती – आंदोलन जारी रहेगा।
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छत्तीसगढ़ कनिष्ठ प्रशासनिक सेवा संघ
जनता को अब नहीं मिलेगा न्याय तहसीलदारों को आनन फानन में करने पड़ेंगे आदेश।
शासन ने तहसीलदारों के ऊपर समय सीमा में विवादित प्रकरणों को निपटाने करने का नया आदेश लागू कर दिया है।
ऐसे में तहसीलदार गुणवत्तापूर्ण और न्याय न देखकर केवल जल्दी-जल्दी प्रकरण निपटने के चक्कर में रहेंगे । आम जनता के साथ अन्याय होगा। और जिस भी जनता के साथ अन्याय होगा वह अपील पुनरीक्षण के चक्कर में पड़कर अपना समय और पैसा दोनों गंवाएगा। यह नया आदेश जनता हित में न होकर तानाशाही की तरह हो गई है । ऐसे में अब प्रकरणों में विवाद बढ़ने की आशंका भी बढ़ गई है। वकील और जमीन दलालों को फिर से किसानों को ठगने का मौका मिल जाएगा। ऐसे हड़ताल के समय में ऐसे आदेश का आना इस बात का की ओर इशारा है तहसीलदारों ने जो हड़ताल किया है वो जनता की हित में है और ऐसे तुगलकी फरमानों को बिना संसाधन के पूरा नहीं किया जा सकता।



