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विवादों की परीक्षा: दुपट्टा फाड़ने का आरोप, तख्त पर चढ़कर परीक्षा, बदबू-कीचड़ में परीक्षा की आस! आबकारी आरक्षक भर्ती परीक्षा में बदइंतजामी से नाराज़ हुए परीक्षार्थी

Mohammed Israil
Mohammed Israil  - Editor
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Mohammed israil

Bilaspur Chhattisgarh बिलासपुर।छत्तीसगढ़ में 27 जुलाई को आयोजित आबकारी आरक्षक भर्ती परीक्षा ने न सिर्फ प्रशासन की व्यवस्था की पोल खोल दी, बल्कि परीक्षार्थियों को असहनीय परिस्थितियों से भी दो-चार किया। बिलासपुर जिले के सिरगिट्टी स्थित एक परीक्षा केंद्र में हालात ऐसे थे कि परीक्षार्थियों को तख्त पर चढ़कर परीक्षा कक्ष तक पहुंचना पड़ा। जलभराव, सड़न की बदबू, मच्छर और कीड़ों की मौजूदगी ने परीक्षा को मुश्किल ही नहीं, बल्कि त्रासदी में तब्दील कर दिया। यह केवल एक केंद्र की कहानी नहीं, बल्कि व्यवस्था की उस विफलता का आईना है जिसने छात्रों की मेहनत और भविष्य दोनों को खतरे में डाल दिया। सरकंडा स्थित एक केंद्र में परीक्षार्थी ने दुपट्टा फाड़ने का आरोप भी लगाकर सनसनी फैला दी


📌  1: जलभराव का केंद्र बना परीक्षा स्थल

  • सिरगिट्टी के रामदुलारे दुबे आत्मानंद स्कूल में परीक्षा से ठीक पहले भारी जलभराव।
  • पांच दिन से पानी से घिरे स्कूल में तख्तों से तैयार किया गया “अस्थायी पुल”।
  • परीक्षार्थियों को 50 मीटर तक पानी पार कर जोखिम में देना पड़ा एग्जाम।
  • बदबू और कीड़े-मकोड़ों से भरा परीक्षा हॉल, मच्छरों ने हालात और बदतर किए।

रश्मि साहू (परीक्षार्थी) — “भीतर बैठते ही दम घुटने लगा, बदबू असहनीय थी, मच्छर और कीड़े हॉल में रेंग रहे थे।”


📌 2: सख्त ड्रेस कोड बना परेशानी का कारण

  • व्यापम के निर्देश के मुताबिक लड़कियों को भारी कढ़ाईदार कपड़े, जूते-चप्पल, गहने पहनने की मनाही।
  • लड़कों के लिए टीशर्ट, जींस, बेल्ट, भारी जिप वाले कपड़े प्रतिबंधित।
  • कई परीक्षार्थियों को ड्रेस कोड उल्लंघन के नाम पर रोका गया, एक लड़की का दुपट्टा उतारने में कपड़ा फट गया।

बाइट: मीनाक्षी सिंह (परीक्षार्थी) — “ड्रेस चेकिंग के दौरान ऐसा व्यवहार किया गया मानो हम अपराधी हों।”


📌  3: तय समय से देरी पर नहीं मिली एंट्री

  • परीक्षा का समय सुबह 11 बजे, लेकिन प्रवेश द्वार 10:30 पर बंद कर दिया गया।
  • कई प्रवेश पत्रों में अंतिम प्रवेश समय 10:45 लिखा था, फिर भी परीक्षार्थियों को रोका गया।
  • पार्किंग की अव्यवस्था ने भी परीक्षार्थियों को देरी से पहुंचने पर मजबूर किया।

बलराज सिंह — “मेरे एडमिट कार्ड में 10:45 लिखा था, फिर भी 10:35 पर अंदर जाने नहीं दिया।”


📌  4: कर्मचारियों पर दुर्व्यवहार के आरोप

  • परीक्षार्थियों ने केंद्र में ड्यूटी कर रहे शिक्षकों पर अभद्रता का आरोप लगाया।
  • छात्रों ने मांग की कि रामदुलारे दुबे स्कूल को भविष्य में परीक्षा केंद्र न बनाया जाए।
  • आरोप: न तो केंद्र में पार्किंग की व्यवस्था थी, न ही बेसिक सफाई।

बाइट: रागिनी जयसवाल — “कर्मचारी बदतमीजी से पेश आ रहे थे। दुपट्टा हटाने के नाम पर कपड़ा फाड़ दिया।”


📌  5: छत्तीसगढ़ी और गणित बना चुनौती

  • परीक्षार्थियों ने बताया कि इस बार छत्तीसगढ़ी विषय का स्तर बेहद कठिन था।
  • गणित भी कुछ हद तक चुनौतीपूर्ण रहा, हालांकि बाकी पेपर संतोषजनक थे।

शिल्पी साहू — “छत्तीसगढ़ी बहुत कठिन आई, गणित भी समय ले रहा था, पर पेपर ठीक था।”


📌 6: 60 से अधिक वार्डों में जलभराव, फिर भी प्रशासन मौन

  • बिलासपुर शहर के 60 से अधिक वार्डों में जलभराव की स्थिति।
  • स्कूल के पीछे स्थित नाले से परीक्षा केंद्र तक पानी पहुंचा।
  • नगर निगम की लापरवाही से जन-धन दोनों को नुकसान।

📌 नई गाइडलाइन बनी परेशानी का सबब

यह परीक्षा केवल प्रतियोगी परीक्षा नहीं थी, बल्कि बदइंतजामी और संवेदनहीनता की परीक्षा भी थी। तख्तों पर चढ़ते, बदबू सहते, गहनों और कपड़ों पर रोक झेलते परीक्षार्थियों ने ये परीक्षा जितनी मानसिक दृढ़ता से दी, वह सरकारी व्यवस्था पर सवालिया निशान छोड़ गई। व्यापम को चाहिए कि भविष्य में ऐसे केंद्रों का चयन सोच-समझकर करें और गाइडलाइन को लागू करने के साथ मानवीय दृष्टिकोण भी अपनाएं।


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