Mohammed israil
छत्तीसगढ़ ,बिलासपुर, रायपुर।छत्तीसगढ़ शासन ने राज्य के चार लाख से अधिक शासकीय अधिकारी-कर्मचारियों के वित्तीय लेन-देन पर निगरानी कड़ी कर दी है। अब कोई भी सरकारी सेवक यदि छह माह के मूल वेतन से अधिक राशि शेयर, म्युचुअल फंड, डिबेंचर आदि में निवेश करता है या दो माह के वेतन के बराबर राशि की नकद निकासी करता है, तो उसे शासन को इसकी जानकारी देना अनिवार्य होगा। इस संबंध में सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) ने संशोधित अधिसूचना भी जारी कर दी है। जानकारी नहीं देने या जानबूझकर छिपाने पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
🔍 मुख्य बिंदु :

- अब म्युचुअल फंड, शेयर, डिबेंचर को भी चल संपत्ति में माना जाएगा।
- 6 माह के मूल वेतन से ज्यादा निवेश पर देनी होगी जानकारी।
- 2 माह के वेतन के बराबर राशि की नकद निकासी की सूचना भी जरूरी।
- निवेश की स्रोत जानकारी और प्रमाण देना अनिवार्य।
- बार-बार खरीद-बिक्री को माना जाएगा आचरण नियम का उल्लंघन।
- तय फॉर्मेट में सालाना विवरण देना होगा।
🧾 क्या कहता है संशोधित नियम:
GAD के उप सचिव केके बाजपेयी द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार,
“अब सरकारी अधिकारी और कर्मचारी शेयर, डिबेंचर व म्युचुअल फंड में निवेश कर सकते हैं, लेकिन शर्तों के साथ। बार-बार की गई खरीदी-बिक्री को अब भी सट्टा और गलत माना जाएगा।”
इसके तहत:
- निवेश की सूचना तय प्रारूप में विभागीय प्रमुख को देनी होगी।
- फॉर्म में संबंधित प्रतिभूतियों का पूरा विवरण देना होगा – किस फर्म, कंपनी, पार्टी से लेन-देन किया गया, कितना किया गया और किस स्रोत से राशि ली गई।
📜 फॉर्मेट की अनिवार्यता:
सरकारी सेवक को अपने हस्ताक्षर सहित नीचे दी गई जानकारियां देनी होंगी: विवरण जानकारी निवेश प्रकार शेयर/म्युचुअल फंड/डिबेंचर आदि निवेश की राशि कुल निवेश, तिथि और स्रोत फर्म/पार्टी का नाम जिसके माध्यम से निवेश किया गया रकम का स्रोत सेलरी, सेविंग, उपहार या अन्य (प्रमाण सहित) बार-बार लेन-देन की सूचना हां/नहीं, कारण सहित
🧠 एक्सपर्ट ओपिनियन:
“यह एक सकारात्मक कदम है। पहले शेयर व म्युचुअल फंड को लेकर नियम स्पष्ट नहीं थे। अब शासन ने चल संपत्ति की परिभाषा में इन्हें शामिल कर स्पष्टता दी है। कर्मचारी अब निवेश के लिए अधिक जागरूक होंगे, लेकिन उन्हें ट्रांजेक्शन को जस्टिफाई करना होगा।”
📌 नियंत्रण और पारदर्शिता की दिशा में कदम:
GAD सचिव रजत कुमार के मुताबिक,
“शेयर या अन्य वित्तीय माध्यमों में बार-बार लेन-देन करना शासकीय सेवक के लिए अनुशासनहीनता माना जाएगा। यदि नियमों का पालन नहीं किया गया, तो सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।”
🔚 जिम्मेदारी से लेना होगा निर्णय
शेयर बाजार और म्युचुअल फंड जैसे निवेश के बढ़ते चलन को देखते हुए शासन ने यह नया संशोधित नियम लागू किया है, जिससे वित्तीय पारदर्शिता बनी रहे और सरकारी सेवा की मर्यादा भी अक्षुण्ण रहे। अब अधिकारियों और कर्मचारियों को अधिक जिम्मेदारी से अपने निवेश निर्णय लेने होंगे।



