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“बिलासपुर का भाग्य कभी तो जागेगा”: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एयरपोर्ट विकास में देरी पर सरकारों को लगाई फटकार

Mohammed Israil
Mohammed Israil  - Editor
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📰 Bilaspur Chhattisgarh बिलासपुर। बिलासा देवी केवट एयरपोर्ट को 4C कैटेगरी में अपग्रेड करने की प्रक्रिया में वर्षों से जारी लेटलतीफी को लेकर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने शुक्रवार को तल्ख टिप्पणी की। मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति बी.डी. गुरु की डिवीजन बेंच ने राज्य और केंद्र सरकार के उदासीन रवैये पर नाराजगी जताई। अदालत ने कहा कि “यदि सरकार कुछ नहीं कर सकती, तो स्पष्ट कह दे, हम याचिका समाप्त कर देंगे। अधिकारियों के हावभाव से तो लगता ही नहीं कि वे कुछ करना चाहते हैं।”


⚖️ कोर्ट की सख्त टिप्पणी:

  • “स्टेटमेंट दे दीजिए कि सरकार कुछ नहीं कर पाएगी, हम पीआईएल खत्म कर देंगे।”
  • “बिलासपुर का भाग्य कभी तो जागेगा। दोनों जगह एक ही पार्टी की सरकार है, फिर भी विकास अटका है।”
  • “काम के नाम पर सिर्फ गाड़ी और कुछ लोग दिख रहे हैं, तस्वीरों में कार्य तो कहीं नहीं दिख रहा।”

📋 क्या है मामला

बिलासपुर के चकरभाठा में स्थित बिलासा देवी एयरपोर्ट को 4C श्रेणी में अपग्रेड करने, नाइट लैंडिंग की सुविधा शुरू करने और महानगरों के लिए सीधी उड़ानों की मांग को लेकर दो जनहित याचिकाएं दाखिल की गई थीं। एयरपोर्ट शुरू हुए चार वर्ष हो चुके हैं, लेकिन आवश्यक सुविधाएं अब तक नहीं जुड़ सकीं।

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📰 Bilaspur Chhattisgarh बिलासपुर। बिलासा देवी केवट एयरपोर्ट को 4C कैटेगरी में अपग्रेड करने की प्रक्रिया में वर्षों से जारी लेटलतीफी को लेकर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने शुक्रवार को तल्ख टिप्पणी की। मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति बी.डी. गुरु की डिवीजन बेंच ने राज्य और केंद्र सरकार के उदासीन रवैये पर नाराजगी जताई। अदालत ने कहा कि “यदि सरकार कुछ नहीं कर सकती, तो स्पष्ट कह दे, हम याचिका समाप्त कर देंगे। अधिकारियों के हावभाव से तो लगता ही नहीं कि वे कुछ करना चाहते हैं।”⚖️ कोर्ट की सख्त टिप्पणी:📋 क्या है मामला🔍 एयरपोर्ट पर अब तक क्या हुआ?🛑 अटका विकास, अधूरी जमीन प्रक्रिया:📌 हाईकोर्ट का आदेश:📣 मास्टर प्लान तैयार, पर फंड और जमीन अटकी📌 अंतरराष्ट्रीय मानकों वाला एयरपोर्ट है जरूरी

🔍 एयरपोर्ट पर अब तक क्या हुआ?

कार्य खर्च (रुपयों में) 3C से 30 आईएफआर अपग्रेडेशन ₹10.35 करोड़ टर्मिनल रिनोवेशन ₹1.92 करोड़ नाइट लैंडिंग व्यवस्था ₹10 करोड़ एप्रन एक्सटेंशन ₹1.90 करोड़ डीवीओआर सिविल वर्क ₹1.90 करोड़ बाउंड्री वॉल ₹1.35 करोड़ फेसिंग कार्य ₹6 करोड़ डीवीओआर सिस्टम ₹77 लाख कुल₹31.19 करोड़

वास्तविकता: न नाइट लैंडिंग चालू, न रनवे विस्तार पूरा, न ही 4C की दिशा में ठोस प्रगति।


🛑 अटका विकास, अधूरी जमीन प्रक्रिया:

मुद्दा स्थिति ज़रूरी जमीन 292 एकड़ रक्षा मंत्रालय से मंजूरी मिल चुकी मांगा गया शुल्क ₹71 करोड़ राज्य सरकार की स्थिति पहले जमीन ट्रांसफर, फिर भुगतान की मांग कोर्ट का निर्देश 8 हफ्तों में मुआवजे का विवाद निपटाएं


📌 हाईकोर्ट का आदेश:

  • राज्य सरकार के मुख्य सचिव और रक्षा मंत्रालय के सचिव से अगली सुनवाई में शपथ पत्र सहित प्रगति रिपोर्ट देने के निर्देश।
  • जमीन मुआवजे का विवाद जल्द सुलझाने को कहा, ताकि रनवे विस्तार, नाइट लैंडिंग और सीधी उड़ानों की दिशा में ठोस कार्य हो सके।

📣 मास्टर प्लान तैयार, पर फंड और जमीन अटकी

एयरपोर्ट के 4C अपग्रेड के लिए मास्टर प्लान बन चुका है, लेकिन जमीन हस्तांतरण की प्रक्रिया अधूरी है। इसका असर फंड रिलीज पर भी पड़ा है। शासन की ओर से केंद्र को अब तक ₹71 करोड़ की मांग की राशि भी नहीं दी गई, जिससे विकास रुका हुआ है।


📌 अंतरराष्ट्रीय मानकों वाला एयरपोर्ट है जरूरी

बिलासपुर जैसे तेजी से बढ़ते शहर के लिए अंतरराष्ट्रीय मानकों वाला एयरपोर्ट ज़रूरी है। लेकिन राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी और प्रशासनिक शिथिलता के चलते यह सपना अब तक अधूरा है। हाईकोर्ट की सख्ती के बाद अब सरकारों को जवाबदेही तय करनी ही होगी, वरना विकास की उड़ान सिर्फ कागजों में सिमटकर रह जाएगी।


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