
00 43 किलो स्केल्स बरामद
रायपुर। छत्तीसगढ़ के वन विभाग ने एक बार फिर से वन्यजीव तस्करों के खिलाफ बड़ी सफलता हालिस की है। वनमंडल बस्तर, राज्यस्तरीय वन उड़नदस्ता रायपुर और वाइल्डलाइफ ट्रस्ट ऑफ इंडिया की संयुक्त टीम ने एक बड़ी कार्रवाई में 43 किलो पेंगोलिन स्केल्स (साल खपरी का छाल) जब्त किए हैं। वन्य तस्करों की धरपकड़ का यह अभियान वन मंत्री केदार कश्यप और प्रधान मुख्य वन संरक्षक श्रीनिवास राव के मार्गदर्शन में संचालित किया गया।
गुप्त सूचना के आधार पर छापों में तीन तस्करों को गिरफ्तार किया गया। इनमें से पहला आरोपी, जेम्स मैथ्यू, जगदलपुर रेंज के ग्राम तेली मारेंगा का निवासी है, जिसके घर से 32 किलोग्राम पेंगोलिन स्केल्स बरामद किए गए। प्रारंभिक जांच में पता चला कि आरोपी ने लॉकडाउन के दौरान बीजापुर के अंदरूनी इलाकों से इन स्केल्स को एकत्र किया था और खरीदार की तलाश में था। दूसरी कार्रवाई चित्रकोट रेंज के मारडूम-बारसूर मार्ग पर हुई, जहां चुन्नीलाल बघेल और राजकुमार कुशवाहा को 11 किलो पेंगोलिन स्केल्स के साथ रंगे हाथों पकड़ा गया। हालांकि, इनके दो साथी जंगल का सहारा लेकर भागने में कामयाब रहे। फरार आरोपियों की तलाश जारी है। तस्करी में इस्तेमाल की गई एक मोटरसाइकिल भी बरामद की गई है। गिरफ्तार आरोपियों को न्यायालय में प्रस्तुत कर कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
उक्त कार्यवाही में उप वनमण्डलाधिकारी जगदलपुर श्री देवलाल दुग्गा, उप वनमण्डलाधिकारी चित्रकोट श्री योगेश कुमार रात्रे, वन परिक्षेत्र अधिकारी चित्रकोट श्री प्रकाश ठाकुर, वन परिक्षेत्र अधिकारी जगदलपुर श्री देवेन्द्र वर्मा, परिक्षेत्र अधिकारी कोलेंग श्री बुधराम साहू, सहायक परिक्षेत्र अधिकारी चित्रकोट श्री बुधरू राम कश्यप, सहायक परिक्षेत्र अधिकारी जगदलपुर (ग्रामीण) श्री लल्लन जी तिवारी, सहायक परिक्षेत्र अधिकारी जगदलपुर (शहर) श्रीधर नाथ स्नेही, परिसर रक्षक श्री चौतन सिंह कश्यप, कु. शारदा मण्डावी, श्री शंकर सिंह बघेल, श्री गोपाल नाग, श्री राम सिंह बघेल, श्री कैलाश नागेश, कु. कविता ठाकुर, श्रीमती कुन्ती कश्यप, श्रीमती जया नेताम, श्रीमती सोनमती, श्रीमती चंद्रीका राणा, श्रीमती दीपा पटेल, उमर देव कोर्राम, कमल ठाकुर आदि का महत्वपूर्ण योगदान रहा।

लाखों रुपये में बिकता है पैंगोलिन और उसका शल्क
बताया जा रहा है कि, पैंगोलिन की डिमांड अंतरराष्ट्रीय बाजार में काफी अधिक है. यही कारण है कि, इसकी कीमत काफी होती है. एक अनुमान के मुताबिक अंतरराष्ट्रीय बाजार में इस वन्यजीव की कीमत लाखों में है. बात अगर भारत की करें तो यहां 20 से 30 हजार में यह पैंगोलिन खरीदा और बेचा जाता है. इसका शल्क सबसे अधिक महंगा होता है.
राज्य में बढ़ा शिकार
छत्तीसगढ़ में बीते कुछ वर्षों के दौरान पैंगोलिन का शिकार काफी तेजी से बढ़ा है. ये पैंगोलिन महज देश में ही नहीं बल्कि विदेशों में भी भेजे जा रहे हैं. विदेशों में जिंदा या मुर्दा पैंगोलिन की भारी डिमांड है. चीन में पैंगोलिन की सबसे ज्यादा डिमांड है. यहां ऊंची कीमत पर पैंगोलिन खरीदे जाते हैं. इस बीच पैंगोलिन का तेजी से शिकार हो रहा है. छत्तीसगढ़ के जंगलों में पैंगोलिन विलुप्ति की कगार पर पहुंचता जा रहा है.
दुनिया का सबसे रहस्यमयी जीव
दुनिया के सबसे रहस्यमयी और दुर्लभ जीवों में से एक है पैंगोलिन. ऐसा अनोखा प्राणी, जिसका शेर, बाघ और तेंदुए जैसे जानवर भी बाल बांका नहीं कर पाते. लेकिन आज खुद अपनी जिंदगी बचाने की जंग लड़ रहा है क्योंकि सबसे ज्यादा दुनिया में जिन जानवरों की तस्करी होती है उनमें से एक पैंगोलिन ही है.
हाल ही में, नाइजीरिया में एक बड़े अभियान के दौरान 2.18 टन पैंगोलिन स्केल, यानी 1,100 पैंगोलिन की जान के बराबर चमड़े, जब्त किए गए. चौंकाने वाली बात यह है कि यह जीव अंतर्राष्ट्रीय संरक्षण सूची में शामिल है और इसके व्यापार पर सख्त प्रतिबंध है. फिर भी, इसकी तस्करी थमने का नाम नहीं ले रही. सवाल यह है कि आखिर ऐसा क्या है इस मासूम जीव में, जिसकी वजह से यह तस्करों के लिए सोने से भी ज्यादा कीमती बन गया है?
कैसा दिखता है पैंगोलिन?
पैंगोलिन स्तनधारी और रेप्टाइल यानी सांप-छिपकली जैसे जानवरों के बीच की कड़ी है. ये एशिया और अफ्रीका के कई देशों में पाए जाते हैं. इसके ऊपर ब्लेडनुमा प्लेट्स की परत होती है. इसकी चमड़ी पर लगी ये प्लेट्स बेहद मज़बूत होती हैं. इतनी मज़बूत होती हैं कि अगर शेर चीता भी इस पर अपने दांत गड़ा दे तो भी इस पर कोई असर नहीं पड़ेगा. पैंगोलिन चींटिया खाते हैं. एक अंदाज़े के मुताबिक एक पैंगोलिन साल में करीब सात करोड़ चींटियां खा लेता है।
कुछ खास जानकारियां
छत्तीसगढ़ के इन जंगलों में पैंगोलिन पाया गया है:
जशपुर ज़िले के कुनकुरी के रायकेरा गांव के कुएं में
कांकेर ज़िले के कापसी इलाके में
कोरबा ज़िले के कटघोरा के जवाली बस्ती में
पैंगोलिन के बारे में कुछ खास बातें:
पैंगोलिन एक स्तनधारी प्राणी है.
दुनिया भर में पैंगोलिन की आठ प्रजातियां हैं.
एशिया में पैंगोलिन के शल्कों के बीच बाल उगते हैं.
पैंगोलिन को वज्रशल्क भी कहा जाता है.
पैंगोलिन अकेला रहना पसंद करता है.
पैंगोलिन की तस्करी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में इसकी ज़्यादा कीमत होने की वजह से होती है.
पैंगोलिन के शिकार की वजह बीमारी ठीक करने के लिए अंगों को खाने की अंधविश्वासी प्रथाएं हैं.
भारतीय पैंगोलिन, एशिया में सबसे पश्चिमी वितरण क्षेत्र में पाया जाता है.
भारत में पैंगोलिन, हिमालय के दक्षिण में पाया जाता है, उत्तर-पूर्वी क्षेत्र को छोड़कर



