बिलासपुर शहर कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष सुधांशु मिश्रा और ग्रामीण के अध्यक्ष महेंद ने युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ का लगाया आरोप
कांग्रेस बोली- एक ही उत्तर पर किसी को 0 तो किसी को पूरे अंक, गलत जवाब को भी मिले सही के बराबर नंबर; इंटरव्यू से पहले कॉपियां सार्वजनिक करने की मांग
बिलासपुर। राज्य लोक सेवा आयोग (पीएससी) की राज्य सेवा परीक्षा को लेकर कांग्रेस ने सरकार और आयोग पर सवाल खड़े किए हैं। शहर कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष सिधांशु मिश्रा और ग्रामीण कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष महेंद्र गंगोत्री ने पत्रकारवार्ता में आरोप लगाया कि पीएससी की परीक्षाओं में लगातार गड़बड़ियां सामने आ रही हैं और इसका सीधा असर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं के भविष्य पर पड़ रहा है। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि 2025 की राज्य सेवा परीक्षा में 1:3 के अनुपात का पालन नहीं किया गया, जबकि 265 पदों के मुकाबले 795 अभ्यर्थियों को साक्षात्कार के लिए बुलाया जाना चाहिए था। इसके विपरीत केवल 608 अभ्यर्थी ही साक्षात्कार तक पहुंच सके।
कांग्रेस नेताओं ने कहा कि वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव के दौरान भाजपा ने यूपीएससी की तर्ज पर पीएससी परीक्षा आयोजित कराने का वादा किया था, लेकिन उनके अनुसार पिछले दो वर्षों की परीक्षाओं में लगातार अनियमितताओं के आरोप सामने आ रहे हैं। पत्रकारवार्ता में 2024 की मुख्य परीक्षा की उत्तर-पुस्तिकाओं के मूल्यांकन में कथित गड़बड़ी के उदाहरण भी रखे गए।
265 पद, 795 के बजाय 608 अभ्यर्थी इंटरव्यू में
कांग्रेस नेताओं के मुताबिक वर्ष 2025 में पीएससी ने कुल 265 पदों के लिए भर्ती प्रक्रिया शुरू की। मुख्य परीक्षा में नियमानुसार कुल पदों के तीन गुना अभ्यर्थियों को साक्षात्कार के लिए बुलाया जाना चाहिए था। इस हिसाब से 265×3 यानी 795 अभ्यर्थियों का इंटरव्यू के लिए चयन होना चाहिए था, लेकिन 608 अभ्यर्थी ही साक्षात्कार के लिए पहुंचे।
कांग्रेस का कहना है कि आयोग की ओर से इसका तर्क दिया जा रहा है कि शेष 187 अभ्यर्थी न्यूनतम अंक हासिल नहीं कर सके, इसलिए वे साक्षात्कार के लिए पात्र नहीं हुए। नेताओं ने आयोग से यह साबित करने की मांग की कि वास्तव में इन 187 अभ्यर्थियों ने न्यूनतम अंक हासिल नहीं किए थे। कांग्रेस नेताओं के अनुसार अभ्यर्थियों का दावा है कि उनके न्यूनतम अंक आए हैं।
इंटरव्यू से पहले सभी अभ्यर्थियों की कॉपियां उपलब्ध कराने की मांग
पत्रकारवार्ता में कांग्रेस नेताओं ने कहा कि इंटरव्यू शुरू होने से पहले सभी अभ्यर्थियों को उनकी उत्तर-पुस्तिकाएं उपलब्ध कराई जानी चाहिए। उनका आरोप है कि 2024 की मुख्य परीक्षा में उत्तर-पुस्तिकाओं के मूल्यांकन में गड़बड़ी हुई है।
उन्होंने दावा किया कि दो अभ्यर्थियों की उत्तर-पुस्तिकाएं सामने आई हैं, जिनमें एक ही सवाल के सही अथवा गलत उत्तर के बावजूद अंकों के आवंटन में अंतर दिखाई देता है। इन उदाहरणों को रखते हुए कांग्रेस नेताओं ने उत्तर-पुस्तिकाओं के पुनर्मूल्यांकन की मांग की।
एक जैसा सही उत्तर, एक को 0 तो दूसरे को 2 अंक
कांग्रेस नेताओं ने दो परीक्षार्थियों की कॉपियों का उदाहरण देते हुए बताया कि प्रश्न क्रमांक 5 (i) में दोनों अभ्यर्थियों ने सही और समान उत्तर लिखा था। इसके बावजूद एक अभ्यर्थी को 2 में से 0 अंक, जबकि दूसरे को 2 में से 2 अंक दिए गए।
उनका आरोप है कि समान उत्तर के लिए अलग-अलग अंक दिए जाना मूल्यांकन प्रक्रिया पर सवाल खड़ा करता है।
भक्तिन माता के उत्तर में भी अंक देने पर सवाल
कांग्रेस नेताओं ने भक्तिन माता राजिम से जुड़े प्रश्न का उदाहरण देते हुए कहा कि पहले अभ्यर्थी ने सही उत्तर लिखा, लेकिन उसे 8 में से 3.5 अंक दिए गए। वहीं दूसरे अभ्यर्थी ने भक्तिन माता को कोंडागांव और आदिवासी समाज की देवी बताया, जिसे कांग्रेस नेताओं ने गलत उत्तर बताया। इसके बावजूद उसे 1.5 अंक दिए गए।
कांग्रेस नेताओं का कहना था कि यदि उत्तर गलत था तो उसमें अंक दिए जाने का आधार स्पष्ट किया जाना चाहिए।
होमरूल लीग के सवाल में सही-गलत को बराबर अंक
पत्रकारवार्ता में छत्तीसगढ़ में होमरूल लीग की स्थापना से जुड़े प्रश्न का भी उल्लेख किया गया। कांग्रेस नेताओं के अनुसार पहले अभ्यर्थी ने होमरूल लीग से संबंधित सही उत्तर लिखा और उसे 4 में से 2.5 अंक मिले।
दूसरे अभ्यर्थी ने होमरूल लीग के जवाब में वर्ष 1923 और स्वराज दल से संबंधित उत्तर लिखा, जिसे कांग्रेस नेताओं ने पूरी तरह गलत बताया। इसके बावजूद उसे भी 4 में से 2.5 अंक दिए गए। कांग्रेस ने सवाल उठाया कि सही और गलत उत्तर को समान अंक कैसे दिए गए।
घरेलू हिंसा वाले प्रश्न में भी बराबर अंक देने का आरोप
घरेलू हिंसा से व्यथित व्यक्ति से संबंधित प्रश्न में भी कांग्रेस नेताओं ने मूल्यांकन में विसंगति का दावा किया। उनके अनुसार एक अभ्यर्थी ने व्यथित व्यक्ति के रूप में पुरुष को बताया, जिसे उन्होंने गलत उत्तर बताया और उसे 2 में से 0.5 अंक मिले।
दूसरे अभ्यर्थी ने सही उत्तर दिया और उसे भी 2 में से 0.5 अंक दिए गए। कांग्रेस नेताओं ने इसे भी सही और गलत उत्तर के लिए समान अंक देने का उदाहरण बताया।
महाभिनिष्क्रमण का उत्तर दोनों का सही, अंक फिर भी अलग
बौद्ध धर्म में महाभिनिष्क्रमण से जुड़े प्रश्न में दोनों अभ्यर्थियों ने सही उत्तर लिखा। कांग्रेस नेताओं के मुताबिक इसके बावजूद एक अभ्यर्थी को 2 में से 0.5 अंक, जबकि दूसरे को 2 में से 1.5 अंक दिए गए।
कांग्रेस ने इन उदाहरणों के आधार पर उत्तर-पुस्तिकाओं के मूल्यांकन की पारदर्शिता पर सवाल उठाया है।
2024 की परीक्षा का मामला भी उठाया
पत्रकारवार्ता में कांग्रेस नेताओं ने पीएससी की वर्ष 2024 की परीक्षा का भी उल्लेख किया। उन्होंने आरोप लगाया कि उस समय उत्तर-पुस्तिकाओं की जांच अपात्र स्कूली शिक्षकों, शिक्षक एलबी, से कराई गई थी।
कांग्रेस नेताओं ने यह भी आरोप लगाया कि मूल्यांकनकर्ताओं के नाम और नंबर तक सार्वजनिक हो गए थे। उनके अनुसार भर्ती परीक्षा की गोपनीयता से जुड़ी इस स्थिति पर कार्रवाई करने के बजाय तत्कालीन पीएससी कार्यकारी अध्यक्ष रीता सांडिल्य को अध्यक्ष बनाया गया।
कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि इन परिस्थितियों से यह सवाल उठता है कि क्या इन कथित गड़बड़ियों को सरकार का संरक्षण प्राप्त है।
2024 में भी 1:3 अनुपात को लेकर सवाल
कांग्रेस नेताओं ने कहा कि राज्य सेवा परीक्षा 2024 में भी मुख्य परीक्षा का परिणाम आने के बाद साक्षात्कार के लिए निर्धारित अनुपात के मुकाबले 95 अभ्यर्थी कम लिए गए थे। उनके अनुसार उस समय भी 1:3 के अनुपात का पालन नहीं किया गया था।
कांग्रेस ने लगातार दो परीक्षाओं में इस अनुपात से जुड़े सवाल उठाते हुए पीएससी की चयन प्रक्रिया पर स्पष्टीकरण की मांग की है।
कांग्रेस की मांगें
पत्रकारवार्ता में कांग्रेस नेताओं ने सरकार और पीएससी के सामने कई मांगें रखीं। इनमें प्रमुख रूप से—
मामले का निराकरण होने तक साक्षात्कार स्थगित किया जाए।
अभ्यर्थियों की मांग के अनुसार साक्षात्कार से पहले सभी उत्तर-पुस्तिकाएं सार्वजनिक की जाएं, ताकि अभ्यर्थी देख सकें कि उनकी कॉपियों का मूल्यांकन सही तरीके से हुआ है या नहीं।
जो अभ्यर्थी साक्षात्कार के लिए चयनित हुए हैं, उनके अतिरिक्त शेष सभी अभ्यर्थियों की उत्तर-पुस्तिकाएं निःशुल्क उपलब्ध कराई जाएं।
उत्तर-पुस्तिकाओं की जांच करने वाले मूल्यांकनकर्ताओं के लिए स्पष्ट मानदंड निर्धारित किया जाए।
पीएससी मुख्य परीक्षा के लिए मॉडल उत्तर जारी किया जाए।
सभी अभ्यर्थियों की उत्तर-पुस्तिकाओं का पुनर्मूल्यांकन कराया जाए।
साक्षात्कार के लिए 1:3 अनुपात का पालन किया जाए।
कांग्रेस नेताओं ने कहा कि परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता को लेकर अभ्यर्थियों के बीच उठ रहे सवालों का समाधान उत्तर-पुस्तिकाएं उपलब्ध कराने और पुनर्मूल्यांकन की प्रक्रिया से किया जा सकता है। पत्रकारवार्ता में कांग्रेस ने पूरे मामले को युवाओं के भविष्य और पीएससी की भर्ती प्रक्रिया की विश्वसनीयता से जोड़ते हुए सरकार और आयोग से जवाब मांगा।



