लोखंडी-उसलापुर विवाद में घायल शेख इस्माइल की मौत के बाद पुलिस कार्रवाई पर उठे सवाल, एसपी रजनेश सिंह ने कहा- किसी भी सूरत में निर्दोष नहीं फंसेंगे


बिलासपुर। ग्राम लोखंडी में 7 सितंबर को लोखंडी और उसलापुर के युवाओं के बीच हुए विवाद और मारपीट के बाद घायल युवक शेख इस्माइल की मौत के मामले में अब पुलिस कार्रवाई को लेकर सवाल उठने लगे हैं। कांग्रेस नेता एवं अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC), नई दिल्ली के राष्ट्रीय समन्वयक तथा सर्वसेन समाज छत्तीसगढ़ के प्रदेश अध्यक्ष त्रिलोक चंद्र श्रीवास मंगलवार को ग्राम लोखंडी के सरपंच, उपसरपंच, पंच, बड़ी संख्या में ग्रामीणों और समाज के पदाधिकारियों के साथ एसपी ऑफिस पहुंचे। उन्होंने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक रजनेश सिंह को ज्ञापन सौंपकर मामले में निर्दोष युवाओं को आरोपी बनाए जाने की शिकायत की और निष्पक्ष जांच की मांग की।
विवाद में शामिल नहीं था प्रद्युम्न, घायल को पहुंचाने गया था 112 में
कांग्रेस नेता त्रिलोक श्रीवास और ग्रामीणों ने पुलिस के समक्ष विशेष रूप से प्रद्युम्न श्रीवास सहित अन्य युवाओं को लेकर आपत्ति जताई। उनका कहना है कि प्रद्युम्न श्रीवास इस विवाद में शामिल नहीं था। घटना के दौरान घायल व्यक्ति को ग्राम सरपंच बलराम पटेल के कहने पर वह 112 वाहन से सिम्स अस्पताल पहुंचाने के लिए गया था, लेकिन बाद में पुलिस ने उसे ही मामले में आरोपी बना दिया।
ग्रामीणों का आरोप है कि जो व्यक्ति घायल को अस्पताल पहुंचाने में मदद कर रहा था, उसे घटना में शामिल आरोपी बना दिया गया है। इसी को लेकर ग्रामीणों और समाज के लोगों में नाराजगी है।
दोषियों को सजा मिले, लेकिन निर्दोषों को आरोपी न बनाया जाए : त्रिलोक श्रीवास
एसपी से चर्चा के दौरान कांग्रेस नेता त्रिलोक श्रीवास ने कहा कि किसी व्यक्ति की मौत होना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण घटना है। इस घटना में जो लोग वास्तव में शामिल हैं, उन्हें सजा मिलनी चाहिए और दोषी व्यक्तियों को कानून के मुताबिक दंड मिलना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे किसी भी दोषी व्यक्ति के पक्ष में नहीं हैं।
उन्होंने कहा कि दोषियों पर कार्रवाई हो, लेकिन किसी निर्दोष व्यक्ति को आरोपी बनाकर परेशान नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने प्रद्युम्न श्रीवास के मामले का हवाला देते हुए कहा कि यदि वह घटना में शामिल होता तो अन्य आरोपियों की तरह मौके से भाग जाता। वह घायल व्यक्ति को पुलिस की 112 गाड़ी में अस्पताल पहुंचाने क्यों जाता?
गिरफ्तारी की समय-सीमा पर भी उठाया सवाल
त्रिलोक श्रीवास ने पुलिस कार्रवाई की समय-सीमा पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि घटना 7 सितंबर की थी। उनका कहना है कि घटना में संलिप्त आरोपियों की गिरफ्तारी 8 या 9 सितंबर को ही हो जानी चाहिए थी। यदि वास्तविक आरोपियों की समय पर पहचान और गिरफ्तारी होती तो आज निर्दोष युवाओं को परेशानियों का सामना नहीं करना पड़ता।
उन्होंने पुलिस से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर वास्तविक दोषियों के खिलाफ कार्रवाई और निर्दोष युवाओं को राहत देने की मांग की।
एसपी बोले- किसी भी सूरत में निर्दोष नहीं फंसेंगे
ग्रामीणों और कांग्रेस नेता की शिकायत पर वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक रजनेश सिंह ने आश्वासन दिया कि किसी भी सूरत में निर्दोष व्यक्तियों को नहीं फंसाया जाएगा। उन्होंने कहा कि मामले में सभी को न्याय मिलेगा। एसपी ने इस शिकायत को गंभीरता से लेते हुए तत्काल अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक को मामले की जांच करने के निर्देश भी दिए।
इस आश्वासन के बाद ग्रामीणों ने उम्मीद जताई कि मामले की निष्पक्ष जांच होगी और यदि कोई व्यक्ति घटना में शामिल नहीं था तो उसके खिलाफ कार्रवाई नहीं की जाएगी।
7 सितंबर को हुआ था लोखंडी-उसलापुर के युवाओं में विवाद
बताया गया है कि 7 सितंबर को तखतपुर विधानसभा क्षेत्र के ग्राम लोखंडी एवं उसलापुर के युवाओं के बीच आपसी विवाद और मारपीट हुई थी। इस घटना में युवक शेख इस्माइल घायल हो गया था, जिसकी बाद में मृत्यु हो गई। घटना के बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए आरोपियों की गिरफ्तारी की। इसी कार्रवाई के दौरान लोखंडी के कुछ युवाओं को भी आरोपी बनाए जाने का आरोप ग्रामीणों की ओर से लगाया गया है।
ग्रामीणों और समाज के पदाधिकारियों का कहना है कि पुलिस को घटना में प्रत्येक व्यक्ति की भूमिका की अलग-अलग जांच करनी चाहिए और केवल संदेह या किसी अन्य परिस्थिति के आधार पर निर्दोष लोगों को आरोपी नहीं बनाया जाना चाहिए।
ये लोग रहे मौजूद
एसपी ऑफिस पहुंचने वालों में कांग्रेस नेता त्रिलोक चंद्र श्रीवास, ग्राम लोखंडी के सरपंच बलराम पटेल, उपसरपंच बसंत गढ़वाल, सेन समाज से सुरेंद्र श्रीवास, चंद्रमणि श्रीवास, मनोज श्रीवास, राजकुमार श्रीवास, शुभम श्रीवास, निखिल श्रीवास, लोकेश श्रीवास, नरेंद्र श्रीवास, आशीष श्रीवास, मनोहर श्रीवास, सुदर्शन श्रीवास, रामसनेही पटेल सहित पंच, ग्रामीण, समाज के पदाधिकारी और बड़ी संख्या में लोग शामिल रहे।



