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बिलासपुर शिविर से कांग्रेस का 2028 मिशन… बैज का दावा—अभी ट्रेलर है, आगे कई बड़े धमाके होंगे

Mohammed Israil
Mohammed Israil  - Editor
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तीन दिन के संगठन सृजन और प्रशिक्षण शिविर के समापन पर कांग्रेस ने खोला राजनीतिक रोडमैप; बूथ से ब्लॉक तक संगठन को चुनावी मशीनरी में बदलने की तैयारी, भाजपा के भीतर असंतोष का दावा
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ कांग्रेस ने बिलासपुर से 2028 के राजनीतिक मुकाबले की जमीन तैयार करने का संकेत दे दिया है। तीन दिन तक चले संभाग स्तरीय संगठन सृजन एवं प्रशिक्षण शिविर का समापन महज संगठनात्मक कार्यक्रम के तौर पर नहीं हुआ, बल्कि इसके साथ कांग्रेस ने अपने अगले राजनीतिक चरण की दिशा भी स्पष्ट कर दी। मंच से लेकर पत्रकारों से बातचीत तक प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज के बयानों में संगठन के पुनर्गठन से ज्यादा आने वाले राजनीतिक संघर्ष की आहट सुनाई दी।


बैज ने कार्यकर्ताओं से अर्जुन की तरह लक्ष्य पर निगाह रखकर मैदान में उतरने का आह्वान किया और दावा किया कि पार्टी का असली अभियान अब प्रशिक्षण शिविरों से निकलकर बूथ और जमीनी स्तर पर दिखाई देगा। उनके शब्दों में, तीन दिन के मंथन में ‘विष की एक बूंद भी नहीं निकली, अमृत ही अमृत निकला।’ उनका कहना था कि मास्टर ट्रेनर यहां से प्रशिक्षण लेकर जाएंगे और बूथ स्तर तक कार्यकर्ताओं को तैयार करेंगे।


यानी कांग्रेस की रणनीति का अगला पड़ाव संगठन के भीतर नहीं, बल्कि सीधे जनता के बीच है।
‘अभी तो ट्रेलर है… आगे कई बड़े धमाके होंगे’
समापन के बाद बैज ने छत्तीसगढ़ की राजनीति को लेकर सबसे बड़ा राजनीतिक दावा भाजपा के संदर्भ में किया। उन्होंने कहा कि भाजपा में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है और कई नेता तथा कार्यकर्ता कांग्रेस के संपर्क में हैं। ‘अभी तो ट्रेलर है, आगे देखते जाइए, कई बड़े धमाके होंगे’—बैज के इस बयान ने शिविर के राजनीतिक संदेश को और स्पष्ट कर दिया।


उन्होंने डोंगरगढ़ में भाजपा कार्यकर्ताओं के इस्तीफे और नारायणपुर में मंत्री के विरोध का उल्लेख करते हुए भाजपा के भीतर असंतोष का दावा किया। साथ ही कांग्रेस में गुटबाजी के सवाल पर पार्टी को एकजुट बताया।
बैज के बयान का राजनीतिक संकेत यह है कि कांग्रेस सिर्फ सरकार के खिलाफ मुद्दे खड़े करने तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि विपक्षी राजनीति के साथ-साथ भाजपा के भीतर संभावित असंतोष को भी अपने राजनीतिक नैरेटिव का हिस्सा बनाने की तैयारी में है।
संगठन सृजन से चुनावी नेटवर्क तक


बिलासपुर का शिविर कांग्रेस के उस संगठनात्मक प्रयोग का हिस्सा है, जिसकी शुरुआत सचिन पायलट के नेतृत्व में संगठन सृजन कार्यक्रम से हुई। बैज ने कहा कि नए प्रभारी सुखदेव सिंह के आने से संगठन को और ताकत मिलेगी।
शिविर में बूथ, ब्लॉक और जमीनी स्तर पर संगठन को सक्रिय करने पर जोर रहा। कांग्रेस की रणनीति में अब ब्लॉक अध्यक्षों की भूमिका विशेष रूप से महत्वपूर्ण दिखाई दे रही है। संकेत यह है कि ब्लॉक अध्यक्ष केवल संगठनात्मक पदाधिकारी नहीं रहेंगे, बल्कि अपने-अपने क्षेत्रों में चुनावी गतिविधियों, कार्यकर्ताओं के संपर्क और स्थानीय राजनीतिक मुद्दों को पार्टी के बड़े अभियान से जोड़ने वाली अहम कड़ी होंगे।
चुनावी समय में संगठन को अचानक सक्रिय करने के बजाय अभी से नेटवर्क तैयार करने की रणनीति पर जोर दिया गया। कार्यकर्ताओं से लगातार संपर्क, स्थानीय मुद्दों की पहचान और उन्हें व्यापक राजनीतिक अभियान से जोड़ने के जरिए बूथ स्तर तक पार्टी की गतिविधियां बढ़ाने की तैयारी है।
सरकार के खिलाफ मुद्दों की लंबी सूची
प्रशिक्षण शिविर में कांग्रेस ने आगामी राजनीतिक संघर्ष के लिए मुद्दों की दिशा भी तय की। किसान, रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और नगरीय निकायों की स्थिति को लेकर राज्य सरकार पर निशाना साधते हुए बैज ने कहा कि प्रशिक्षित कार्यकर्ता अब इन मुद्दों को लेकर जमीनी लड़ाई में उतरेंगे।
इसके साथ ही कांग्रेस ने जल, जंगल और जमीन को अपने संभावित बड़े राजनीतिक अभियानों के केंद्र में रखने के संकेत दिए हैं।
कोल ब्लॉक और खनन को लेकर बैज ने सरकार पर पूंजीपतियों को फायदा पहुंचाने का आरोप लगाया। तारा कोल ब्लॉक क्षेत्र की जमीन का मुद्दा उठाते हुए उन्होंने पर्यावरण और मानव-हाथी द्वंद्व की आशंका जताई। उनका कहना था कि कांग्रेस आने वाले समय में जल, जंगल और जमीन के सवाल पर बड़ा आंदोलन करेगी।
खनिज संसाधनों को लेकर उन्होंने डबल इंजन सरकार पर हमला बोला और कोल आवंटन तथा माइनिंग एक्ट को राजनीतिक मुद्दा बनाने के संकेत दिए। बिजली और स्मार्ट मीटर भी कांग्रेस के निशाने पर रहे।
शराब पर भी राजनीतिक हमला
शराब नीति को लेकर भी बैज ने सरकार को घेरा। कैशलेस शराब बिक्री, नकली शराब और होलोग्राम से जुड़े सवाल उठाते हुए उन्होंने सरकार पर गंभीर आरोप लगाए।
इसी राजनीतिक हमले के बीच बैज ने भाजपा और कांग्रेस की राजनीतिक कार्यशैली की तुलना करते हुए कहा—भाजपा में ‘मन की बात’ होती है, जबकि कांग्रेस में ‘दिल की बात’ सुनी जाती है।
मुख्यमंत्री के आदिवासी होने के दावे पर भी बैज ने राजनीतिक टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि कांग्रेस उन्हें आदिवासी नहीं, बल्कि ‘बनवासी’ मानती है।
मुख्यमंत्री का चेहरा नहीं, सरकार को हटाना प्राथमिकता
आगामी चुनाव में मुख्यमंत्री चेहरे के सवाल पर बैज ने किसी व्यक्ति विशेष के नाम या चेहरे को प्राथमिकता देने के बजाय मौजूदा सरकार को सत्ता से हटाने को कांग्रेस की प्राथमिकता बताया।
यह बयान कांग्रेस की उस रणनीति की ओर संकेत करता है, जिसमें फिलहाल नेतृत्व के चेहरे से ज्यादा सरकार के खिलाफ राजनीतिक माहौल बनाने और संगठन को चुनावी मुकाबले के लिए तैयार करने पर जोर है।
महंत का फोकस—एकजुट संगठन
नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने कार्यकर्ताओं को एकजुट होकर काम करने का संदेश दिया। उन्होंने ब्लॉक अध्यक्षों से जिलाध्यक्षों के निर्देश और संगठनात्मक समन्वय के साथ काम करने को कहा।
शिविर में विधायक अटल श्रीवास्तव, दिलीप लहरिया, पूर्व विधायक शैलेष पांडेय, शहर कांग्रेस अध्यक्ष सिद्धांशु मिश्रा, जिला कांग्रेस अध्यक्ष महेंद्र गंगोत्री, विजय पांडेय, जसबीर गुंबर समेत बड़ी संख्या में कांग्रेस पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहे।
तीन दिन का शिविर, लेकिन नजर 2028 पर
बिलासपुर में तीन दिन तक चले इस प्रशिक्षण शिविर का वास्तविक राजनीतिक महत्व इसके कार्यक्रमों से आगे दिखाई देता है। कांग्रेस ने प्रशिक्षण, संगठन सृजन और राजनीतिक आंदोलन—इन तीनों को एक ही रणनीतिक फ्रेम में जोड़ने की कोशिश की है।
मास्टर ट्रेनरों के जरिए प्रशिक्षण को बूथ तक ले जाने, ब्लॉक अध्यक्षों को अधिक सक्रिय भूमिका देने, स्थानीय मुद्दों को प्रदेशव्यापी राजनीतिक अभियान में बदलने और सरकार के खिलाफ आंदोलनों की जमीन तैयार करने की कवायद इसी व्यापक रणनीति का हिस्सा है। बैज के ‘अमृत’ वाले बयान से लेकर ‘कई बड़े धमाकों’ के दावे तक, बिलासपुर शिविर से कांग्रेस का संदेश साफ राजनीतिक भाषा में सामने आया—संगठन तैयार किया जा रहा है, मुद्दे चुने जा रहे हैं और कार्यकर्ताओं को मैदान में उतारने की तैयारी है।

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