रायपुर, बिलासपुर। नया शैक्षणिक सत्र शुरू होने के बाद राज्य सरकार ने प्रदेश के सभी सरकारी स्कूलों में बालिकाओं के लिए गुणवत्तापूर्ण शौचालयों के निर्माण और अधूरे कार्यों को जल्द पूरा करने पर जोर दिया है। शनिवार को पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की राज्य स्तरीय समीक्षा बैठक में उप मुख्यमंत्री एवं पंचायत मंत्री विजय शर्मा ने सभी जिला पंचायत सीईओ को स्पष्ट निर्देश दिए कि जिन स्कूलों में बालिका शौचालय नहीं हैं या अधूरे हैं, वहां निर्माण कार्य तेजी से पूरा कर शत-प्रतिशत संतृप्तता सुनिश्चित की जाए।
यह निर्देश ऐसे समय आए हैं, जब प्रदेश के अधिकांश स्कूलों में नया शैक्षणिक सत्र शुरू हो चुका है और छात्राएं नियमित रूप से स्कूल पहुंच रही हैं। ऐसे में बैठक में बालिका शौचालय का मुद्दा प्रमुखता से उठने के बाद यह विषय प्रशासनिक और शिक्षा व्यवस्था के केंद्र में आ गया है।

वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में पूरे प्रदेश के जिला पंचायत सीईओ को निर्देश
नवा रायपुर स्थित महानदी भवन से आयोजित वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में पंचायत विभाग की योजनाओं की समीक्षा करते हुए उप मुख्यमंत्री ने विकास कार्यों की गुणवत्ता को सर्वोच्च प्राथमिकता बताया। उन्होंने कहा कि निर्माण कार्यों में किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं होगा और अगले आठ महीनों में तय सभी लक्ष्यों को समयबद्ध तरीके से पूरा किया जाए।
इसी समीक्षा के दौरान बालिका शौचालयों को प्राथमिकता देने के निर्देश जारी किए गए।
स्कूल खुल चुके, अब शौचालय निर्माण पर जोर
प्रदेश में जुलाई से अधिकांश सरकारी और निजी स्कूलों में पढ़ाई शुरू हो चुकी है। स्कूलों में छात्राओं की नियमित उपस्थिति भी शुरू हो गई है। ऐसे समय में बालिका शौचालयों के निर्माण को लेकर जारी निर्देश चर्चा का विषय बने हैं।
बैठक में अधिकारियों से कहा गया कि जहां शौचालय उपलब्ध नहीं हैं, वहां निर्माण कार्य जल्द पूरा कराया जाए तथा जहां निर्माण हो चुका है वहां गुणवत्ता भी सुनिश्चित की जाए।
गुणवत्ता पर विशेष जोर
बैठक में केवल निर्माण पूरा करने की बात नहीं हुई, बल्कि गुणवत्ता को भी प्रमुख विषय बनाया गया।
निर्देशों में कहा गया कि—
निर्माण कार्य निर्धारित मानकों के अनुरूप हों।
निगरानी नियमित की जाए।
जिला पंचायत सीईओ स्वयं विकासखंडों का दौरा करें।
निर्माण कार्यों की गुणवत्ता की लगातार समीक्षा हो।
बालिका शौचालय क्यों महत्वपूर्ण माना जाता है
स्कूल शिक्षा से जुड़े विशेषज्ञ लंबे समय से यह मानते रहे हैं कि किशोरावस्था की छात्राओं के लिए सुरक्षित और उपयोगी शौचालय उपलब्ध होना विद्यालय में नियमित उपस्थिति का महत्वपूर्ण आधार माना जाता है।
शिक्षा से जुड़े विभिन्न राष्ट्रीय अध्ययनों में यह बात सामने आती रही है कि विद्यालयों में कार्यशील एवं स्वच्छ शौचालय होने से छात्राओं की नियमित उपस्थिति और पढ़ाई की निरंतरता पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
किन-किन निर्माण कार्यों को प्राथमिकता
बैठक में वीबी जीरामजी योजना के तहत कई प्रकार के निर्माण कार्यों को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए। इनमें—
बालिका शौचालय
अतिरिक्त कक्ष
पीएम श्री विद्यालयों के कार्य
आंगनबाड़ी भवन
धान खरीदी केंद्रों में चबूतरे
पोटा केबिन
धरसा विकास
मुक्तिधाम निर्माण
जैसे कार्य शामिल हैं।
मुक्तिधाम और इंजेक्शन वेल भी एजेंडे में
समीक्षा बैठक में जिन गांवों में मुक्तिधाम नहीं हैं वहां प्राथमिकता से निर्माण कराने के निर्देश दिए गए। इसके साथ ही अनुपयोगी और खराब पड़े बोरवेलों को इंजेक्शन वेल के रूप में विकसित कर जल संरक्षण बढ़ाने पर भी जोर दिया गया।
प्रधानमंत्री आवास योजना की भी समीक्षा
बैठक में प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) की प्रगति की भी समीक्षा हुई। सभी निर्माण कार्यों की समयबद्ध जियो टैगिंग कराने तथा आवास निर्माण में बाधा उत्पन्न करने वालों पर कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए।
सौर ऊर्जा से जुड़ेंगे जिला पंचायत भवन
उप मुख्यमंत्री ने जिन जिला पंचायत भवनों में सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित नहीं हैं, वहां सोलर सिस्टम लगाने के निर्देश दिए। साथ ही इनके रखरखाव का कार्य राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) से जुड़ी महिला समूहों को प्रशिक्षण देकर सौंपने की बात भी कही गई।
बैठक की बड़ी बातें
सभी स्कूलों में बालिका शौचालय निर्माण पूरा करने के निर्देश।
निर्माण कार्यों में गुणवत्ता सर्वोच्च प्राथमिकता।
जिला पंचायत सीईओ को नियमित फील्ड विजिट करने के निर्देश।
मुक्तिधाम और इंजेक्शन वेल निर्माण पर जोर।
प्रधानमंत्री आवास योजना की जियो टैगिंग तेज करने के निर्देश।
जिला पंचायत भवनों को सौर ऊर्जा से जोड़ने की तैयारी।
वीबी जीरामजी योजना के कार्यों में पारदर्शिता और एसओपी पालन पर विशेष जोर।



