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82 साल की महिला से ₹1.04 करोड़ की ‘डिजिटल अरेस्ट’ ठगी: नागपुर से 2 आरोपी गिरफ्तार, अब तक 8 आरोपी सलाखों के पीछे

Mohammed Israil
Mohammed Israil  - Editor
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व्हाट्सएप वीडियो कॉल पर खुद को केंद्रीय जांच एजेंसी का अधिकारी बताया, आतंकी संगठन से नाम जुड़ने और जेल भेजने की धमकी देकर 2 घंटे 16 मिनट तक बनाया बंधक; कई खातों में ट्रांसफर करा लिए ₹1.04 करोड़
बिलासपुर, 11 जुलाई। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में चर्चित ₹1.04 करोड़ की ‘डिजिटल अरेस्ट’ साइबर ठगी मामले में रेंज साइबर थाना पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए महाराष्ट्र के नागपुर से दो और आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इन गिरफ्तारियों के साथ ही इस अंतर्राज्यीय साइबर गिरोह से जुड़े कुल 8 आरोपी गिरफ्तार किए जा चुके हैं। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच अभी भी जारी है और डिजिटल साक्ष्यों, बैंकिंग ट्रेल तथा वित्तीय लेन-देन की कड़ियों को खंगाला जा रहा है।


पुलिस के अनुसार, 20 अप्रैल 2026 को थाना सिविल लाइन क्षेत्र के शांतिनगर, मंगला चौक निवासी 82 वर्षीय बुजुर्ग महिला के मोबाइल पर अज्ञात साइबर अपराधियों ने व्हाट्सएप मैसेज और वीडियो कॉल किया। कॉल करने वालों ने खुद को केंद्रीय जांच एजेंसी का अधिकारी बताया और महिला को यह कहकर भयभीत कर दिया कि उनका नाम एक आतंकी संगठन से जुड़ा है तथा वे उस संगठन को धन भेजने में सहयोग कर रही हैं। आरोपियों ने दावा किया कि उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई कर उन्हें जेल भेजा जा सकता है।
2 घंटे 16 मिनट तक ‘डिजिटल अरेस्ट’ में रखा, डर का माहौल बनाकर करोड़ों रुपए ट्रांसफर कराए
जांच में सामने आया कि साइबर ठगों ने महिला को लगातार 2 घंटे 16 मिनट तक तथाकथित ‘डिजिटल अरेस्ट’ की स्थिति में रखा। इस दौरान मानसिक दबाव और डर का माहौल बनाकर महिला से अलग-अलग बैंक खातों में कुल ₹1,04,80,000 (एक करोड़ चार लाख अस्सी हजार रुपए) ट्रांसफर करा लिए।
मामले की गंभीरता को देखते हुए रेंज साइबर थाना बिलासपुर ने तकनीकी विश्लेषण, बैंक खातों की ट्रेल, डिजिटल साक्ष्यों और अन्य इलेक्ट्रॉनिक प्रमाणों के आधार पर जांच शुरू की। जांच के दौरान पहले 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था। आगे की विवेचना में मिले नए साक्ष्यों के आधार पर शनिवार को दो और आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया।
नागपुर से गिरफ्तार हुए दोनों आरोपी
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान इस प्रकार हुई है—
राहुल प्रकाश कामडी (38 वर्ष), पिता प्रकाश कामडी, निवासी ताजेश्वर नगर, हुडकेश्वर नाका, नागपुर (महाराष्ट्र)।
गौरव रमाकांत मिश्रा (27 वर्ष), पिता रमाकांत मिश्रा, निवासी वसंत नगर, अंजनी, नागपुर (महाराष्ट्र)।
डिजिटल साक्ष्य और बैंकिंग ट्रेल से खुल रही गिरोह की परतें
पुलिस के अनुसार, इस अंतर्राज्यीय साइबर गिरोह तक पहुंचने में तकनीकी एवं वित्तीय विश्लेषण, बैंकिंग ट्रेल, डिजिटल साक्ष्यों और इलेक्ट्रॉनिक प्रमाणों की अहम भूमिका रही। इन्हीं आधारों पर गिरोह के सदस्यों की पहचान कर लगातार कार्रवाई की जा रही है। मामले में आगे भी जांच जारी है।
वरिष्ठ अधिकारियों के मार्गदर्शन में हुई कार्रवाई
पूरी कार्रवाई पुलिस महानिरीक्षक (आईजीपी) रामगोपाल गर्ग, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) रजनेश सिंह तथा नोडल अधिकारी आईपीएस गगन कुमार के मार्गदर्शन में की गई।
कार्रवाई में रेंज साइबर थाना बिलासपुर के निरीक्षक कामिल हक, प्रभारी प्रसाद सिन्हा एवं थाना स्टाफ की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

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