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बिलासपुर के साथ अन्याय क्यों?…बस्तर को मिली हाईटेक कैथलैब, न्यायधानी अब भी इंतजार में: प्रदेश के सबसे बड़े मेडिकल हब में कब मिलेगी दिल के मरीजों को यह सुविधा?

Mohammed Israil
Mohammed Israil  - Editor
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जगदलपुर में शुरू हुई छत्तीसगढ़ की दूसरी अत्याधुनिक कैथलैब, स्वास्थ्य मंत्री बोले- अब बस्तर के मरीजों को नहीं जाना पड़ेगा बाहर; सवाल- बिलासपुर संभाग के लाखों मरीजों को कब मिलेगी यह सुविधा?


रायपुर/बिलासपुर, 9 जुलाई 2026। छत्तीसगढ़ की स्वास्थ्य व्यवस्था में गुरुवार को एक बड़ा अध्याय जुड़ गया। बस्तर संभाग के डिमरापाल स्थित कॉन्टिनेंटल छत्तीसगढ़ सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल में प्रदेश की दूसरी अत्याधुनिक कैथलैब (Cardiac Catheterization Lab) का लोकार्पण स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने किया। सरकार का दावा है कि अब बस्तर सहित पूरे प्रदेश के गंभीर हृदय रोगियों को समय पर आधुनिक उपचार मिलेगा और इलाज के लिए बड़े शहरों की दौड़ कम होगी।
लेकिन इसी घोषणा के साथ एक बड़ा सवाल भी सामने आ गया है। छत्तीसगढ़ का दूसरा सबसे बड़ा शहर बिलासपुर, जहां सिम्स मेडिकल कॉलेज और कोनी सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल जैसे बड़े सरकारी संस्थान मौजूद हैं, वहां अब तक ऐसी अत्याधुनिक कैथलैब सुविधा शुरू नहीं हो सकी है। ऐसे में बिलासपुर संभाग के लाखों मरीजों की नजर अब इस बात पर है कि उन्हें यह सुविधा आखिर कब मिलेगी।
बस्तर को मिली बड़ी सौगात, अब दिल का इलाज होगा यहीं
स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कैथलैब का लोकार्पण करते हुए कहा कि यह सुविधा शुरू होने से बस्तर के मरीजों को हृदय रोगों के इलाज के लिए रायपुर या दूसरे महानगरों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।
उन्होंने अस्पताल के विभिन्न विभागों का निरीक्षण किया और उपलब्ध चिकित्सा सुविधाओं की जानकारी ली। मंत्री ने कहा कि कॉन्टिनेंटल छत्तीसगढ़ सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल बस्तर की स्वास्थ्य सेवाओं को नई दिशा दे रहा है।
उन्होंने यह भी कहा कि बस्तर में नक्सलवाद के खात्मे के सौ दिनों के साथ जगदलपुर सुपर स्पेशलिटी अस्पताल के भी सौ दिन पूरे होना एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
मेकाहारा के बाद दूसरा बड़ा सरकारी कैथलैब केंद्र
स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में बस्तर की जनता को दिल की गंभीर बीमारियों के उपचार के लिए बड़ी सौगात मिली है। उनके अनुसार यह मेकाहारा रायपुर के बाद छत्तीसगढ़ का दूसरा बड़ा सरकारी कैथलैब संस्थान है।
इस सुविधा के शुरू होने से अब—
कोरोनरी एंजियोग्राफी
एंजियोप्लास्टी (स्टेंट प्रत्यारोपण)
पेसमेकर प्रत्यारोपण
इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजी की आधुनिक प्रक्रियाएं
स्थानीय स्तर पर उपलब्ध होंगी।
बिलासपुर संभाग के मरीजों की उम्मीदें अब भी अधूरी
राज्य में दूसरी कैथलैब सुविधा शुरू होने के बाद अब सबसे अधिक चर्चा बिलासपुर संभाग को लेकर हो रही है।
बिलासपुर केवल एक जिला नहीं, बल्कि उत्तर और मध्य छत्तीसगढ़ के बड़े हिस्से का स्वास्थ्य केंद्र है। यहां इलाज के लिए बिलासपुर, कोरबा, रायगढ़, जांजगीर-चांपा, मुंगेली, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही, सक्ती, सारंगढ़-बिलाईगढ़ और आसपास के जिलों से बड़ी संख्या में मरीज पहुंचते हैं।
यहीं स्थित छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान (सिम्स) और कोनी सुपर स्पेशलिटी अस्पताल को पूरे बिलासपुर संभाग का सबसे बड़ा सरकारी चिकित्सा केंद्र माना जाता है। इसके बावजूद यहां अब तक अत्याधुनिक कैथलैब सेवा शुरू नहीं हो सकी है।
गंभीर हृदय रोगियों को आज भी आवश्यकता पड़ने पर रायपुर अथवा अन्य बड़े केंद्रों में रेफर करना पड़ता है।
कैथलैब क्यों है इतनी महत्वपूर्ण?
कॉन्टिनेंटल हॉस्पिटल्स के संस्थापक एवं चेयरमैन डॉ. गुरु एन. रेड्डी ने बताया कि कैथलैब एक अत्याधुनिक चिकित्सा इकाई है, जहां बिना बड़े ऑपरेशन के हृदय एवं रक्त वाहिकाओं से जुड़े रोगों की जांच और उपचार किया जाता है।
इस सुविधा के माध्यम से—
हार्ट ब्लॉकेज की तत्काल जांच
एंजियोग्राफी
एंजियोप्लास्टी
स्टेंट प्रत्यारोपण
पेसमेकर प्रत्यारोपण
अन्य इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजी प्रक्रियाएं
आधुनिक तकनीक के जरिए की जा सकेंगी।
उन्होंने कहा कि इस सुविधा से न केवल बस्तर संभाग बल्कि पड़ोसी राज्यों के मरीजों को भी स्थानीय स्तर पर सुपर स्पेशलिटी हृदय उपचार मिलेगा। इससे समय और खर्च दोनों की बचत होगी तथा आपातकालीन परिस्थितियों में जीवनरक्षक उपचार शीघ्र उपलब्ध हो सकेगा।
अस्पताल में आयुष्मान भारत योजना के तहत भी उपचार की सुविधा उपलब्ध है।
स्वास्थ्य मंत्री ने गिनाईं बस्तर की अन्य उपलब्धियां
कार्यक्रम में स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि—
बस्तर में योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा को बढ़ावा देने के लिए पीपीपी मॉडल पर समर्पित योग और नेचरोपैथी अस्पताल स्थापित किया जाएगा।
महारानी अस्पताल में पिछले दो वर्षों में मरीजों के इलाज का आंकड़ा डेढ़ गुना बढ़ा है।
‘मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान’ के तहत क्षेत्र के लगभग 99 प्रतिशत लोगों का डिजिटल हेल्थ रिकॉर्ड और स्वास्थ्य परीक्षण तैयार किया जा चुका है।
इस मॉडल का अध्ययन करने के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और यूनिसेफ की टीमें जल्द बस्तर आने वाली हैं।
कॉन्टिनेंटल ग्रुप हॉस्पिटल के सहयोग से अस्पताल प्रबंधन एवं अन्य श्रेणियों में 70 प्रतिशत स्थानीय युवाओं को रोजगार में प्राथमिकता दी गई है।
केंद्र सरकार की आयुर्वेद आधारित उपचार प्रणाली के तीन प्रस्तावित राष्ट्रीय केंद्रों में से एक बस्तर में स्थापित करने का प्रस्ताव भेजा गया है।
बिलासपुर में नजरें सिम्स और सुपर स्पेशलिटी सेंटर पर
बस्तर में कैथलैब शुरू होने के बाद अब स्वास्थ्य क्षेत्र में सबसे बड़ी चर्चा बिलासपुर को लेकर है।
बिलासपुर संभाग की आबादी, यहां प्रतिदिन पहुंचने वाले मरीजों की संख्या, सिम्स मेडिकल कॉलेज की क्षेत्रीय भूमिका और कोनी सुपर स्पेशलिटी अस्पताल की उपलब्ध संरचना को देखते हुए अब यह सवाल और अधिक प्रमुख हो गया है कि बिलासपुर में अत्याधुनिक कैथलैब सेवा कब शुरू होगी।
हृदय रोगों में उपचार का हर मिनट महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसे में स्थानीय स्तर पर कैथलैब उपलब्ध होने से गंभीर मरीजों को तत्काल जांच और उपचार मिल सकता है। फिलहाल बस्तर को यह सुविधा मिल चुकी है, जबकि बिलासपुर संभाग के मरीज अभी भी ऐसी अत्याधुनिक व्यवस्था की शुरुआत का इंतजार कर रहे हैं।
कार्यक्रम में ये रहे मौजूद
लोकार्पण समारोह में वन मंत्री केदार कश्यप, सांसद महेश कश्यप, विधायक किरण सिंह देव, विधायक विनायक गोयल, जिला पंचायत अध्यक्ष वेदवती कश्यप, महापौर संजय पाण्डेय, कलेक्टर आकाश छिकारा, पुलिस अधीक्षक शलभ सिन्हा, कॉन्टिनेंटल छत्तीसगढ़ सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल के चिकित्सक, जनप्रतिनिधि, वरिष्ठ अधिकारी एवं अस्पताल के कर्मचारी उपस्थित रहे।

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