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स्वाइन फ्लू….बारिश, सायरन और जिंदगी की दौड़… बिलासपुर में मानवता के लिए थम गया ट्रैफिक

Mohammed Israil
Mohammed Israil  - Editor
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ग्रीन कॉरिडोर बनाकर 54 वर्षीय गंभीर मरीज को एयर एंबुलेंस तक पहुंचाया गया, फिर हैदराबाद के लिए किया गया एयरलिफ्ट
H1N1 संक्रमण, दोनों फेफड़ों में निमोनिया और श्वसन विफलता से जूझ रहे मरीज के लिए यातायात पुलिस, डॉक्टरों और आम नागरिकों ने मिलकर बनाई जीवन की राह
बिलासपुर, 9 जुलाई 2026। गुरुवार को बिलासपुर की सड़कों पर कुछ देर के लिए ट्रैफिक का अर्थ बदल गया। तेज बारिश के बीच सायरन बजाती एक एंबुलेंस शहर की सड़कों से गुजर रही थी और उसके आगे-पीछे तैनात यातायात पुलिस के जवान हर चौराहे को खाली करा रहे थे। यह सिर्फ वीआईपी मूवमेंट नहीं था, बल्कि जिंदगी बचाने की दौड़ थी।


54 वर्षीय एक गंभीर मरीज को एयर एंबुलेंस के जरिए हैदराबाद के यशोदा हॉस्पिटल, सोमाजीगुड़ा भेजा जाना था। मरीज की हालत बेहद नाजुक थी। समय की संवेदनशीलता को देखते हुए बिलासपुर यातायात पुलिस ने तत्काल ग्रीन कॉरिडोर तैयार किया और एंबुलेंस को बिना किसी रुकावट के चकरभाठा एयरपोर्ट तक पहुंचाया, जहां से मरीज को एयरलिफ्ट किया गया।


परिजनों की अपील पर तुरंत सक्रिय हुई पुलिस
पुलिस उप महानिरीक्षक एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक रजनेश सिंह के निर्देशन तथा अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक रामगोपाल करियारे के पर्यवेक्षण में पूरी व्यवस्था बनाई गई।
मरीज के परिजनों ने पुलिस से आग्रह किया कि मरीज की गंभीर स्थिति को देखते हुए एयरपोर्ट तक शीघ्र पहुंचाने में मदद की जाए। सूचना मिलते ही यातायात पुलिस ने पूरे मार्ग का आकलन किया और कुछ ही समय में ग्रीन कॉरिडोर लागू कर दिया।


बारिश के बीच हर चौराहे पर डटे रहे जवान
लगातार हो रही बारिश के बावजूद यातायात पुलिस के जवान अपने-अपने निर्धारित स्थानों पर तैनात रहे।
मार्ग में आने वाले सभी प्रमुख चौक-चौराहों पर पुलिस बल लगाया गया। एंबुलेंस के आगे बढ़ने से पहले सभी मार्गों को खाली कराया गया ताकि उसे कहीं भी रुकना न पड़े।
कई जवान बारिश में भीगते हुए लगातार यातायात नियंत्रित करते रहे और एंबुलेंस के गुजरने तक पूरे मार्ग की निगरानी करते रहे।
सभी ट्रैफिक सिग्नल अस्थायी रूप से किए गए बंद
ग्रीन कॉरिडोर को प्रभावी बनाने के लिए यातायात पुलिस ने कंट्रोल रूम के माध्यम से मार्ग में आने वाले सभी ट्रैफिक सिग्नलों को अस्थायी रूप से बंद कराया।
इसका उद्देश्य केवल एक था—एंबुलेंस को किसी भी रेड सिग्नल पर रुकना न पड़े और मरीज को न्यूनतम समय में एयरपोर्ट तक पहुंचाया जा सके।
डॉक्टरों की टीम ने एयर ट्रांसफर का लिया फैसला
बिलासपुर के डॉक्टरों एवं अस्पताल की विशेष टीम ने मरीज की स्थिति का आकलन करने के बाद तय किया कि बेहतर और अत्याधुनिक उपचार के लिए उसे एयर एंबुलेंस के माध्यम से हैदराबाद स्थानांतरित करना आवश्यक है।
एंबुलेंस सीधे चकरभाठा एयरपोर्ट पहुंची, जहां पहले से एयर एंबुलेंस तैयार थी। वहां से मरीज को हैदराबाद के यशोदा हॉस्पिटल, सोमाजीगुड़ा के लिए एयरलिफ्ट किया गया।
पहले भी बना चुका है मिसाल बिलासपुर ट्रैफिक पुलिस
यह पहला अवसर नहीं है जब बिलासपुर यातायात पुलिस ने ग्रीन कॉरिडोर बनाया हो।
इससे पहले भी दो जुड़वा नवजात शिशुओं को गंभीर स्थिति में एयर एंबुलेंस के माध्यम से हैदराबाद भेजने के लिए इसी तरह का ग्रीन कॉरिडोर बनाया गया था। उपचार के बाद दोनों नवजात अपनी मां के साथ स्वस्थ होकर वापस बिलासपुर लौटे थे।
नागरिकों ने भी निभाई बड़ी जिम्मेदारी
ग्रीन कॉरिडोर केवल पुलिस के प्रयास से सफल नहीं हुआ।
मार्ग में मौजूद लोगों ने सायरन और पीए सिस्टम की आवाज सुनते ही स्वयं अपने वाहन किनारे कर दिए। कई स्थानों पर लोगों ने बिना किसी निर्देश के एंबुलेंस को रास्ता दिया।
इस सामूहिक सहयोग के कारण एंबुलेंस बिना किसी अवरोध के एयरपोर्ट तक पहुंच सकी।
एयरपोर्ट पर परिजनों की दुआएं, पुलिस की संवेदनशीलता की सराहना
चकरभाठा एयरपोर्ट पर मरीज के परिजन पहले से मौजूद थे। एयर एंबुलेंस रवाना होने तक परिजन मरीज के शीघ्र स्वस्थ होने की प्रार्थना करते रहे।
मरीज के परिजनों, एयरपोर्ट पर मौजूद नागरिकों तथा हितैषियों ने बिलासपुर यातायात पुलिस की त्वरित और संवेदनशील कार्रवाई की सराहना की।
यातायात पुलिस ने भी मरीज के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ और सुरक्षित होकर वापस बिलासपुर लौटने की कामना की।
विशेष बॉक्स : मरीज किन गंभीर बीमारियों से जूझ रहा है?
मरीज की चिकित्सीय स्थिति
आयु: 54 वर्ष
दोनों फेफड़ों में निमोनिया (Bilateral Pneumonia): संक्रमण दोनों फेफड़ों तक फैल चुका था, जिससे सांस लेने की क्षमता गंभीर रूप से प्रभावित हुई।
H1N1 संक्रमण (स्वाइन फ्लू): इन्फ्लुएंजा ए वायरस का गंभीर संक्रमण, जो फेफड़ों पर तेजी से असर डाल सकता है।
श्वसन विफलता (Respiratory Failure): फेफड़े शरीर को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं दे पा रहे थे, इसलिए मरीज की स्थिति अत्यंत नाजुक थी।
उच्च रक्तचाप (Hypertension): पहले से मौजूद हाई ब्लड प्रेशर बीमारी के उपचार को और जटिल बना रहा था।
NIV (Non-Invasive Ventilation) सपोर्ट: मरीज को बिना कृत्रिम श्वास नली डाले विशेष वेंटिलेशन मशीन के सहारे सांस दिलाई जा रही थी।
ग्रीन कॉरिडोर क्या है?
ग्रीन कॉरिडोर ऐसी विशेष यातायात व्यवस्था होती है, जिसमें मरीज या अंग प्रत्यारोपण जैसे अत्यंत महत्वपूर्ण मामलों में एंबुलेंस को बिना किसी रुकावट के गंतव्य तक पहुंचाने के लिए पूरे मार्ग को अस्थायी रूप से खाली कराया जाता है। ट्रैफिक सिग्नल नियंत्रित किए जाते हैं और पुलिस पूरे रूट की निगरानी करती है, ताकि हर सेकंड कीमती साबित हो सके।

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