Latest news

बिलासपुर से राष्ट्रीय पहचान… इंडियन बर्ड्स जर्नल में प्रकाशित हुआ छत्तीसगढ़ का पहला कैस्पियन प्लोवर रिकॉर्ड

Mohammed Israil
Mohammed Israil  - Editor
5 Min Read

सत्यप्रकाश पांडेय और कंचन पांडेय की खोज को मिली वैज्ञानिक मान्यता, मध्य भारत में पहली बार दर्ज हुई दुर्लभ प्रवासी पक्षी की उपस्थिति


बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के लिए पक्षी अध्ययन और बर्ड फोटोग्राफी के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि सामने आई है। देश की प्रतिष्ठित पक्षी विज्ञान पत्रिका इंडियन बर्ड्स ने 29 जून 2026 को प्रकाशित अपने शोध जर्नल में बिलासपुर के पक्षी प्रेमी एवं बर्ड फोटोग्राफर सत्यप्रकाश पांडेय और कंचन पांडेय द्वारा दर्ज किए गए कैस्पियन प्लोवर (Caspian Plover) के रिकॉर्ड को प्रकाशित किया है। यह शोध न केवल छत्तीसगढ़, बल्कि पूरे मध्य भारत के पक्षी विज्ञान के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
शोध के अनुसार छत्तीसगढ़ और पड़ोसी मध्य प्रदेश सहित पूरे मध्य भारत में अब तक कैस्पियन प्लोवर का कोई आधिकारिक रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं था। ऐसे में बिलासपुर में इस दुर्लभ प्रवासी पक्षी का दस्तावेजीकरण राज्य का पहला तथा मध्य भारत का पहला दर्ज रिकॉर्ड बन गया है।
इस शोध पत्र के प्रकाशन में छत्तीसगढ़ के पक्षी विशेषज्ञ प्रतीक ठाकुर की महत्वपूर्ण भूमिका रही। उन्होंने इस रिकॉर्ड को वैज्ञानिक आधार पर शोध पत्र के रूप में तैयार कर प्रकाशन के लिए भेजा, जिसे इंडियन बर्ड्स ने अपने 29 जून 2026 के अंक में प्रकाशित किया।
4 सितंबर 2025 को हुई थी दुर्लभ पक्षी की पहचान
शोध पत्र के अनुसार 4 सितंबर 2025 को सत्यप्रकाश पांडेय और कंचन पांडेय बिलासपुर के मोहनभाटा क्षेत्र (22.246°N, 82.020°E) में नियमित बर्ड वॉक के दौरान पक्षियों का अवलोकन कर रहे थे। यह क्षेत्र खुले घास के मैदान, चरागाह और छोटे-छोटे मौसमी तालाबों वाला प्राकृतिक आवास है, जहां वर्षा ऋतु में बड़ी संख्या में प्रवासी जलपक्षी और वेडर पक्षी पहुंचते हैं।
बर्ड वॉक के दौरान यहां पैसिफिक गोल्डन प्लोवर, लिटिल रिंग्ड प्लोवर और केंटिश प्लोवर सहित कई प्रजातियां देखी गईं। इसी दौरान तीन लिटिल रिंग्ड प्लोवर के साथ भोजन तलाश रहा एक पक्षी अपने व्यवहार और शारीरिक बनावट के कारण अलग दिखाई दिया। इसके बाद विस्तृत अध्ययन और फोटो विश्लेषण के आधार पर उसकी पहचान कैस्पियन प्लोवर के रूप में की गई।
इन विशेषताओं से हुई पहचान
शोध पत्र में बताया गया है कि पक्षी की पहचान उसके कई विशिष्ट शारीरिक लक्षणों के आधार पर की गई। इनमें रेतीले-भूरे रंग का ऊपरी हिस्सा, पूंछ के निचले भाग पर स्पष्ट सफेद पंख, पूरी तरह साफ सफेद माथा, आंखों के आसपास का हिस्सा (लोर्स), गाल, आंखों के ऊपर सफेद पट्टी (सुपरसिलियम), सफेद गला, भूरे रंग के कानों के पास के पंख तथा छाती पर लगातार बनी ग्रे-भूरी पट्टी प्रमुख रही।
इसके अलावा इसकी चोंच पतली और काले रंग की, पैर अपेक्षाकृत लंबे तथा ग्रे-हरे रंग के और आंखें गहरे भूरे रंग की थीं। शोध में उल्लेख किया गया है कि इसकी बनावट ग्रेटर सैंड प्लोवर और तिब्बती सैंड प्लोवर की तुलना में अधिक पतली थी। लंबे पैर, पतली चोंच, साफ सफेद चेहरा और छाती पर लगातार बनी ग्रे-भूरी पट्टी इसकी पहचान के प्रमुख आधार बने।
मध्य भारत के वेटलैंड और घास के मैदानों का बढ़ा महत्व
शोध पत्र में इस रिकॉर्ड को मध्य भारत के मौसमी घास के मैदानों और वेटलैंड पारिस्थितिकी तंत्र के लिए भी महत्वपूर्ण बताया गया है। अध्ययन के अनुसार ऐसे प्राकृतिक आवास प्रवासी वेडर पक्षियों के लिए महत्वपूर्ण पड़ाव का काम करते हैं। यह रिकॉर्ड इस संभावना की ओर भी संकेत करता है कि कैस्पियन प्लोवर का वितरण क्षेत्र पहले की तुलना में अधिक व्यापक हो सकता है।
राष्ट्रीय स्तर पर दर्ज हुई उपलब्धि
इंडियन बर्ड्स जैसे प्रतिष्ठित वैज्ञानिक जर्नल में इस रिकॉर्ड के प्रकाशित होने से बिलासपुर और छत्तीसगढ़ को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिली है। पक्षी फोटोग्राफी, फील्ड ऑब्जर्वेशन और वैज्ञानिक दस्तावेजीकरण के संयुक्त प्रयास से दर्ज यह उपलब्धि अब देश के आधिकारिक पक्षी रिकॉर्ड का हिस्सा बन गई है।

खबर को शेयर करने के लिए क्लिक करे।।