कांगो में बढ़ते मामलों के बाद बिलासपुर के सिम्स अस्पताल में सतर्कता तेज, इमरजेंसी से माइक्रोबायोलॉजी विभाग तक अलर्ट मोड पर
बिलासपुर। अफ्रीकी देश कांगो में इबोला वायरस संक्रमण के नए मामलों के बाद बिलासपुर के सिम्स अस्पताल में भी अलर्ट जारी कर दिया गया है। शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय एवं सिम्स अस्पताल प्रबंधन ने इबोला प्रभावित देशों से आने या वहां से ट्रांजिट होकर पहुंचने वाले यात्रियों की स्क्रीनिंग और निगरानी शुरू करने के निर्देश दिए हैं। अस्पताल में आपातकालीन विभाग, नर्सिंग स्टाफ, सुरक्षा एजेंसियों और सभी विभागाध्यक्षों को विशेष सतर्कता बरतने कहा गया है।

सिम्स प्रबंधन द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार इबोला वायरस एक गंभीर और जानलेवा संक्रमण है, जो संक्रमित व्यक्ति के रक्त, पसीना, लार, उल्टी या अन्य शारीरिक द्रव्यों के संपर्क से फैल सकता है। वर्तमान में कांगो (डीआर कांगो) में संक्रमण के नए मामले सामने आने के बाद भारत सरकार और राज्य स्वास्थ्य विभाग ने स्वास्थ्य संस्थानों को अलर्ट मोड पर रहने के निर्देश दिए हैं।
स्क्रीनिंग से लेकर आइसोलेशन तक तैयारी
सिम्स के अधिष्ठाता एवं एमडी माइक्रोबायोलॉजिस्ट डॉ. रमणेश मूर्ति ने बताया कि इबोला वायरस अत्यंत संवेदनशील संक्रमण है। ऐसे में समय पर पहचान, आइसोलेशन और संक्रमण नियंत्रण प्रोटोकॉल का पालन बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि अस्पताल में डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों को विशेष सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं। माइक्रोबायोलॉजी विभाग को संदिग्ध लक्षणों की मॉनिटरिंग और आवश्यक जांच व्यवस्था मजबूत करने कहा गया है।
इमरजेंसी विभाग को रखा गया अलर्ट मोड पर
चिकित्सा अधीक्षक एवं एमडी मेडिसिन डॉ. लखन सिंह ने बताया कि अस्पताल में आने वाले संदिग्ध यात्रियों और मरीजों की स्क्रीनिंग की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। इमरजेंसी विभाग सहित सभी संबंधित इकाइयों को अलर्ट मोड पर रखा गया है।
उन्होंने कहा कि घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन सावधानी और जागरूकता बेहद जरूरी है। संक्रमण से बचाव के लिए अस्पताल में मास्क, ग्लव्स, सैनिटाइजेशन और अन्य सुरक्षा उपायों का पालन कराया जा रहा है।
क्या हैं इबोला के शुरुआती लक्षण
विशेषज्ञों के मुताबिक इबोला वायरस संक्रमण के शुरुआती लक्षण सामान्य वायरल बीमारी जैसे दिख सकते हैं। इनमें—
तेज बुखार
सिरदर्द
मांसपेशियों में दर्द
कमजोरी
गले में दर्द
शामिल हैं। संक्रमण बढ़ने पर उल्टी, दस्त, त्वचा पर चकत्ते और आंतरिक या बाहरी रक्तस्राव जैसी गंभीर समस्याएं हो सकती हैं।
विदेश यात्रा का इतिहास होने पर तुरंत जांच की सलाह
स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से अपील की है कि यदि किसी व्यक्ति में ऐसे लक्षण दिखाई दें और हाल में विदेश यात्रा का इतिहास हो, तो तुरंत चिकित्सकीय परामर्श लें और जांच कराएं।
इस दौरान नोडल अधिकारी सिम्स डॉ. भूपेंद्र कश्यप, डॉ. मधुमिता मूर्ति, डॉ. आशुतोष कोरी, डॉ. रेखा बरापात्रे, डॉ. हेमलता ठाकुर, डॉ. आरती पांडे, डॉ. जयपाल चंद्रवंशी, डॉ. डार्विन देशोजा, डॉ. प्रभा सोनवानी, नर्सिंग सुपरिटेंडेंट उज्ज्वला दास, सरिता बहादुर, पिंकी दास, पुष्पलता शर्मा, ग्रेसी ममतालास, डी. स्वर्ण, गरिमा पांडे सहित तृतीय एवं चतुर्थ वर्ग कर्मचारी और छात्राएं मौजूद रहीं।
सिम्स प्रबंधन का कहना है कि अस्पताल में संक्रमण नियंत्रण, स्क्रीनिंग और उपचार से जुड़ी सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जा रही हैं, ताकि किसी भी संभावित स्थिति से प्रभावी ढंग से निपटा जा सके।

