रेजिडेंट डॉक्टरों की पढ़ाई, ड्यूटी और मानसिक तनाव पर विशेषज्ञों ने रखी बात, सिम्स के विभागाध्यक्ष और फैकल्टी भी जुड़े
बिलासपुर। मेडिकल शिक्षा के बढ़ते दबाव और रेजिडेंट डॉक्टरों के मानसिक स्वास्थ्य को लेकर राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग (एनएमसी) ने गंभीर पहल की है। इसी कड़ी में बुधवार को “स्नातकोत्तर मेडिकल विद्यार्थियों का मानसिक स्वास्थ्य एवं कल्याण” विषय पर ऑनलाइन वेबिनार आयोजित किया गया, जिसमें सिम्स बिलासपुर के विभागाध्यक्ष, फैकल्टी सदस्य और बड़ी संख्या में पीजी मेडिकल विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया।
वेबिनार का आयोजन एनएमसी नई दिल्ली के एंटी रैगिंग सेल द्वारा किया गया। कार्यक्रम में स्नातकोत्तर मेडिकल विद्यार्थियों के बीच बढ़ते मानसिक तनाव, कार्य दबाव और विषाक्त कार्य संस्कृति जैसे संवेदनशील मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने विभिन्न अध्ययन प्रकरणों के जरिए यह बताया कि मेडिकल रेजिडेंट्स किस तरह मानसिक उत्पीड़न, अत्यधिक कार्यभार और तनावपूर्ण वातावरण का सामना करते हैं।
कार्यक्रम में विशेष रूप से स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग, निश्चेतना विभाग और अस्थिरोग विभाग से जुड़े स्नातकोत्तर विद्यार्थियों की मानसिक चुनौतियों पर विशेषज्ञों ने अपने व्याख्यान दिए। मेडिकल शिक्षा के दौरान लंबे कार्य घंटे, इमरजेंसी ड्यूटी, लगातार अकादमिक दबाव और जिम्मेदारियों के कारण मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर भी चर्चा की गई।
वेबिनार में यह भी बताया गया कि संस्थानों में सकारात्मक कार्य संस्कृति और विभागीय समन्वय बढ़ने से विद्यार्थियों की अध्ययन क्षमता और कार्य गुणवत्ता में सुधार संभव है। विशेषज्ञों ने कहा कि बेहतर संवाद और व्यवस्थित कार्य विभाजन से पीजी विद्यार्थियों को सौंपे गए दायित्व समय-सीमा में बेहतर तरीके से पूरे किए जा सकते हैं।
सिम्स बिलासपुर से प्रभारी अधिष्ठाता एवं संयुक्त संचालक सह चिकित्सा अधीक्षक डॉ. लखन सिंह, नोडल अधिकारी नवीन सिम्स भवन डॉ. भूपेंद्र कश्यप, प्रभारी अधिकारी छात्र शाखा डॉ. सागरिका प्रधान, मनोरोग विभागाध्यक्ष डॉ. एस.के. नायक, फॉरेंसिक मेडिसिन विभाग की डॉ. हेमलता ठाकुर, ईएनटी विभाग की डॉ. आरती पाण्डेय, सूक्ष्मजैविकी विभाग की डॉ. रेखा बारपांडे तथा सहायक प्रभारी छात्र शाखा डॉ. सचिन पाण्डेय सहित विभिन्न विभागों के फैकल्टी सदस्य कार्यक्रम में शामिल हुए।
वेबिनार में किन मुद्दों पर हुई चर्चा
- पीजी मेडिकल विद्यार्थियों का मानसिक स्वास्थ्य
- मेडिकल रेजिडेंट्स पर बढ़ता कार्य दबाव
- मानसिक उत्पीड़न और टॉक्सिक वर्क कल्चर
- अध्ययन क्षमता और कार्य गुणवत्ता सुधार
- विभागीय समन्वय और समय-सीमा में कार्य निष्पादन
सिम्स से ये प्रमुख डॉक्टर रहे शामिल
- डॉ. लखन सिंह
- डॉ. भूपेंद्र कश्यप
- डॉ. सागरिका प्रधान
- डॉ. एस.के. नायक
- डॉ. हेमलता ठाकुर
- डॉ. आरती पाण्डेय
- डॉ. रेखा बारपांडे
- डॉ. सचिन पाण्डेय

