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थाने में ‘मेहमान’ बने कबाड़ी, फोटो वायरल होते ही SSP का एक्शन…. प्रधान आरक्षक और आरक्षक लाइन अटैच

Mohammed Israil
Mohammed Israil  - Editor
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बिलासपुर। जिले में अवैध कबाड़ कारोबारियों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई का दावा करने वाली पुलिस खुद अपनी कार्यशैली पर सवालों में घिर गई है। एक तरफ पुलिस प्रेस नोट जारी कर अवैध कबाड़ियों पर शिकंजा कसने और गोदाम सील करने की बात कर रही थी, वहीं दूसरी तरफ कोनी थाने के भीतर गिरफ्तार कबाड़ियों की खातिरदारी की तस्वीरों ने पूरी “सख्ती” की हवा निकाल दी। थाने के मुंशी कक्ष में आरोपी आराम से कुर्सी पर पैर चढ़ाकर बैठे रहे, चाय-नाश्ता और ब्रांडेड पानी का आनंद लेते रहे और पुलिसकर्मी मूकदर्शक बने रहे। तस्वीरें सामने आते ही मामला पुलिस महकमे में तूल पकड़ गया।
पुलिस उप महानिरीक्षक एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने मामले को गंभीर मानते हुए तत्काल सख्त आदेश जारी किया। आदेश में कहा गया कि जिले में अवैध रूप से संचालित कबाड़ियों के खिलाफ कार्रवाई के स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं, लेकिन थाना कोनी में पकड़े गए कबाड़ियों का प्रधान आरक्षक और मददगार के सामने बैठकर चाय पीना कार्रवाई की गंभीरता को कमजोर दर्शाता है। इसे अक्षम्य लापरवाही मानते हुए प्रधान आरक्षक 814 बालेश्वर तिवारी और मददगार आरक्षक 1263 अनुज जांगड़े को तत्काल प्रभाव से थाना कोनी से रक्षित केंद्र संबद्ध कर दिया गया।
49 कबाड़ियों की जांच, 40 गोदाम सील का दावा
एसएसपी रजनेश सिंह के निर्देश पर 22 मई की रात जिलेभर में अवैध कबाड़ कारोबारियों के खिलाफ विशेष अभियान चलाया गया था। पुलिस टीमों ने अलग-अलग थाना क्षेत्रों में दबिश देकर 49 कबाड़ियों की जांच की। दस्तावेज नहीं मिलने पर 40 कबाड़ गोदामों को सील किया गया और 18 लोगों के खिलाफ कार्रवाई की गई। मस्तूरी क्षेत्र में कबाड़ से भरी एक वाहन भी जब्त की गई। पुलिस ने दावा किया था कि चोरी के सामान की खरीद-फरोख्त और बिना दस्तावेज कारोबार करने वालों के खिलाफ लगातार कठोर कार्रवाई जारी रहेगी।
थाने पहुंचते ही बदल गया पूरा माहौल
अगले ही दिन कोनी क्षेत्र में कबाड़ी अकबर खान और मंसूर बेग को करीब 3 क्विंटल कबाड़ के साथ पकड़ा गया। लेकिन थाने पहुंचते ही कार्रवाई का पूरा रंग बदल गया। दोनों आरोपियों को मुंशी कक्ष में बाकायदा सम्मानजनक अंदाज में बैठाया गया। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक आरोपी अकबर खान कुर्सी पर दोनों पैर रखकर आराम फरमाता रहा, चाय-नाश्ता करता रहा और ब्रांडेड पानी पीता रहा। पूरे घटनाक्रम के दौरान किसी पुलिसकर्मी ने उसे टोकना तक जरूरी नहीं समझा।
पुलिस की ‘सख्ती’ पर उठे सवाल
एक तरफ जिलेभर में अभियान चलाकर पुलिस अवैध कारोबारियों पर शिकंजा कसने का दावा कर रही थी, वहीं दूसरी तरफ थाने के भीतर आरोपियों को मिले कथित VIP व्यवहार ने पूरे अभियान की गंभीरता पर सवाल खड़े कर दिए। कार्रवाई के बाद आरोपियों को कोर्ट में पेश जरूर किया गया, लेकिन थाने के अंदर की तस्वीरें अब शहरभर में चर्चा का विषय बनी हुई हैं। लोगों के बीच सवाल यही है कि जब थाने के भीतर ही आरोपियों को इतनी सहजता और सुविधा मिल रही है, तो आखिर अवैध कारोबारियों में पुलिस का खौफ कैसे बनेगा?

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