कबाड़ियों पर कार्रवाई का ढोल, थाने में ‘वीआईपी सत्कार’ का खेल!
बिलासपुर। जिलेभर में अवैध कबाड़ कारोबारियों के खिलाफ बड़े अभियान का दावा करने वाली बिलासपुर पुलिस की कार्रवाई शनिवार को सवालों के घेरे में आ गई। एक तरफ पुलिस प्रेस विज्ञप्ति जारी कर 49 कबाड़ियों की जांच, 40 गोदाम सील और 18 लोगों पर कार्रवाई का दावा कर रही थी, वहीं दूसरी तरफ थाने के भीतर गिरफ्तार कबाड़ियों की खातिरदारी की तस्वीरें पुलिस की कथित सख्ती की पोल खोलती नजर आईं।






कोनी थाना क्षेत्र में गिरफ्तार किए गए दो कबाड़ी आरोपियों को जिस अंदाज में थाने में बैठाया गया, उसने पूरे अभियान की गंभीरता पर सवाल खड़े कर दिए। आरोपियों को न सिर्फ आराम से कुर्सी पर बैठाया गया, बल्कि उन्हें चाय-नाश्ता और ब्रांडेड पानी तक परोसा गया। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि एक आरोपी दोनों पैर कुर्सी पर रखकर मुंशी कक्ष में आराम फरमाता रहा और उसे टोकने वाला वहां कोई नजर नहीं आया।
एसएसपी के आदेश के बाद चला था बड़ा अभियान
रजनेश सिंह के निर्देश पर 22 मई की रात जिलेभर में अवैध कबाड़ कारोबारियों के खिलाफ विशेष जांच अभियान चलाया गया था। पुलिस की अलग-अलग टीमों ने कई थाना क्षेत्रों में दबिश देकर कबाड़ी दुकानों और गोदामों की जांच की।
पुलिस के मुताबिक कुल 49 कबाड़ियों की जांच की गई, जिनमें दस्तावेज नहीं मिलने पर 40 कबाड़ गोदामों को सील किया गया। थाना मस्तूरी क्षेत्र में कबाड़ से भरी एक वाहन भी जब्त की गई और 18 कबाड़ियों को हिरासत में लेकर कार्रवाई की गई।
प्रेस विज्ञप्ति में पुलिस ने दावा किया कि चोरी के सामान की खरीद-फरोख्त और बिना वैधानिक दस्तावेज कारोबार करने वालों के खिलाफ लगातार सख्त अभियान जारी रहेगा।
कोनी थाने में बदल गया पूरा दृश्य
अगले ही दिन यानी 23 मई को कोनी क्षेत्र की दो कबाड़ी दुकानों में जांच के दौरान करीब 3 क्विंटल कबाड़ जब्त किया गया। पुलिस ने कबाड़ी अकबर खान और मंसूर बेग को गिरफ्तार कर थाने लाया।
लेकिन थाने पहुंचते ही कार्रवाई का पूरा तेवर बदलता दिखाई दिया। दोनों आरोपियों को मुंशी कक्ष में बाकायदा कुर्सी पर बैठाया गया। वहां मौजूद पुलिस स्टाफ और मददगारों के सामने उनकी आवभगत होती रही।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक आरोपी अकबर खान कुर्सी पर दोनों पैर रखकर आराम से बैठा रहा, चाय-नाश्ता करता रहा और ब्रांडेड पानी पीता रहा। पूरे घटनाक्रम के दौरान किसी पुलिसकर्मी ने उसे रोकना तक जरूरी नहीं समझा।
सवालों के घेरे में ‘सख्ती’ का दावा
एक तरफ पुलिस जिलेभर में बड़े स्तर पर कार्रवाई कर अवैध कारोबारियों के खिलाफ सख्त संदेश देने की बात कर रही थी, वहीं दूसरी तरफ गिरफ्तार आरोपियों को थाने में मिले कथित विशेष व्यवहार ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए।
कार्रवाई के बाद आरोपियों को कोर्ट में पेश किया गया, लेकिन थाने के भीतर का यह पूरा घटनाक्रम अब चर्चा का विषय बना हुआ है। पुलिस की कार्रवाई और थाने के अंदर दिखे व्यवहार के बीच का विरोधाभास अब लोगों के बीच सवाल बनकर खड़ा है कि आखिर अवैध कारोबारियों में पुलिस का खौफ है भी या नहीं।

