एक महीने में टूट गया 36 लाख का गौरवपथ, कहीं गिट्टियां बिखरीं तो कहीं डामर धंसा… बारिश से पहले ही जवाब दे चुकीं सड़कें, जनता पूछ रही— आखिर किसके संरक्षण में चल रहा यह ‘सड़क सिंडिकेट’?
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मोहम्मद इसराइल,बिलासपुर।
शहर से लेकर गांव तक सड़कों की बदहाली अब सिर्फ अव्यवस्था नहीं, बल्कि संगठित भ्रष्टाचार की तस्वीर बन चुकी है। करोड़ों के टेंडर जारी हो रहे हैं, फाइलों में सड़कें चमचमाती दिखाई जा रही हैं, उद्घाटन और फोटो सेशन भी हो रहे हैं, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि सड़कें या तो महीनों से उधड़ी पड़ी हैं या फिर बनने के कुछ ही दिनों बाद धंसने लगी हैं।
स्थिति इतनी भयावह हो चुकी है कि लोग अब गड्ढों से ज्यादा धूल और सांस की बीमारी से डरने लगे हैं। जगह-जगह उड़ती गर्द, टूटती परतें, बिखरी गिट्टियां और धंसा डामर सीधे सवाल खड़े कर रहे हैं कि आखिर विकास के नाम पर जनता को क्या परोसा जा रहा है?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या यह सिर्फ घटिया निर्माण का मामला है या फिर अफसर, ठेकेदार और राजनीतिक संरक्षण का ऐसा गठजोड़ बन चुका है जिसमें जनता की जिंदगी और टैक्स का पैसा दोनों दांव पर लगा दिए गए
1 : नेवरा का 36 लाख का गौरवपथ… एक महीने में ही ‘गौरव’ उखड़ गया
तखतपुर विधानसभा क्षेत्र के ग्राम नेवरा में करीब 36 लाख रुपए की लागत से बनाया गया गौरवपथ अब ग्रामीणों के गुस्से का कारण बन गया है।
सड़क को बने अभी एक महीना भी ठीक से नहीं बीता और जगह-जगह से डामर उखड़ने लगा। कई हिस्सों में सड़क धंस गई है, जबकि गिट्टियां ऐसे बाहर आ गई हैं मानो उन्हें सड़क पर मजबूती से दबाया ही नहीं गया था।
ग्रामीणों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने इस मामले की शिकायत कलेक्टर तक पहुंचाई है। शिकायत में साफ आरोप लगाया गया है कि निर्माण में भारी भ्रष्टाचार हुआ है और अफसरों व ठेकेदारों की मिलीभगत से घटिया सामग्री का उपयोग किया गया।
लोग सवाल उठा रहे हैं कि यदि एक नई सड़क एक महीने भी नहीं टिक पा रही, तो निर्माण के दौरान गुणवत्ता परीक्षण आखिर किस कागज में पूरा दिखाया गया
-2 : मस्तूरी-भवतरा मार्ग… नई सड़क, लेकिन हालत वर्षों पुरानी
मस्तूरी-भवतरा मार्ग पर हाल ही में हुए निर्माण कार्य की हालत भी चौंकाने वाली बताई जा रही है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि सड़क निर्माण के कुछ ही समय बाद डामर की परत उखड़ने लगी। कई हिस्सों में सड़क की ऊपरी सतह बिखर गई, जिससे वाहन चालकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि निर्माण एजेंसी ने जल्दबाजी में काम पूरा दिखाकर भुगतान लेने की कोशिश की और निगरानी करने वाले जिम्मेदार अधिकारियों ने आंखें मूंद लीं।
-3 : जूना बिलासपुर-चांटीडीह बैराज रोड… धंसती सड़क ने खोली गुणवत्ता की पोल
जूना बिलासपुर से चांटीडीह बैराज तक बनाई गई सड़क भी सवालों के घेरे में है।
स्थानीय नागरिकों के मुताबिक सड़क बनने के तुरंत बाद कई हिस्सों में धंसान शुरू हो गया। भारी वाहनों के गुजरते ही डामर उखड़ने लगा और किनारों से गिट्टियां बाहर निकल आईं।
लोगों का आरोप है कि निर्माण के दौरान तकनीकी मानकों की खुली अनदेखी की गई। सड़क की मजबूती से ज्यादा फोकस सिर्फ बिल पास कराने पर दिखाई
4 : चांटीडीह-चिंगराजपारा-लिंगियाडीह रोड… धूल में बदलता विकास
चांटीडीह, चिंगराजपारा और लिंगियाडीह को जोड़ने वाली सड़क अब लोगों के लिए परेशानी और बीमारी का कारण बन चुकी है।
लंबे समय से सड़क उखड़ी हुई है और हर गुजरती गाड़ी के साथ धूल का घना गुबार उड़ता है। आसपास रहने वाले लोग लगातार सांस, एलर्जी और आंखों में जलन जैसी समस्याओं की शिकायत कर रहे हैं।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि विकास के नाम पर सिर्फ सड़क खोद दी गई, लेकिन उसे समय पर पूरा नहीं किया गया। परिणाम यह है कि पूरा इलाका धूल के प्रदूषण से जूझ रहा है।
5 : राजकिशोर नगर-शनि मंदिर-स्मृतिवन इलाका… शहर में ‘दमघोंटू विकास मॉडल’
राजकिशोर नगर, शनि मंदिर और स्मृतिवन इलाके की सड़कें भी बदहाल स्थिति में हैं।
यहां रहने वाले लोग खुलेआम आरोप लगा रहे हैं कि प्रशासन ने विकास कार्यों के नाम पर नागरिकों को धूल और बीमारी की सौगात दे दी है।
टूटी सड़कें, अधूरा निर्माण और बिखरी गिट्टियों के बीच रोजाना हजारों लोग गुजर रहे हैं। बच्चों, बुजुर्गों और मरीजों के लिए हालात सबसे ज्यादा गंभीर बताए जा रहे हैं।
जिम्मेदार खामोश… सवालों से बचता सिस्टम
सबसे चिंताजनक बात यह है कि लगातार सामने आ रहे मामलों के बावजूद जिम्मेदार विभागों की ओर से कोई स्पष्ट जवाब सामने नहीं आ रहा।
आखिर सड़कें इतनी जल्दी क्यों उधड़ रही हैं?
क्या निर्माण एजेंसियां मनमानी कर रही हैं?
क्या गुणवत्ता जांच सिर्फ कागजों में हो रही है?
क्या राजनीतिक संरक्षण के कारण कार्रवाई नहीं हो रही?
इन सवालों पर जिम्मेदार अधिकारी चुप्पी साधे हुए हैं। यही चुप्पी अब पूरे सिस्टम पर शक को और गहरा कर रही है।
बारिश सिर पर… और सड़कें पहले ही हार चुकीं
मौसम विभाग के अनुमान के मुताबिक अगले कुछ सप्ताह में मानसून दस्तक दे सकता है।
ऐसे में जिन सड़कों की हालत अभी से उखड़ी और धंसी हुई है, बारिश के दौरान उनका क्या होगा, इसे लेकर लोगों में डर और नाराजगी दोनों है।
जनता पूछ रही है कि जब गर्मी में ही सड़कें जवाब दे चुकी हैं, तो मानसून में क्या पूरा निर्माण तंत्र बह जाएगा?

