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मटमैले पानी’ से बढ़ रहा पेट की बीमारियों का खतरा? अपोलो के गैस्ट्रो विशेषज्ञों ने कहा— बदलती लाइफस्टाइल और दूषित जल बना रहा युवाओं को मरीज

Mohammed Israil
Mohammed Israil  - Editor
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‘बिलासपुर में पेट, लिवर और पाचन तंत्र की बीमारियों का तेजी से बढ़ता ग्राफ… दूसरी ओर अपोलो हॉस्पिटल में शुरू हो रहीं EUS, कैप्सूल एंडोस्कोपी और एडवांस GI सर्जरी जैसी हाईटेक सुविधाएं; अब महानगरों जैसी गैस्ट्रो केयर शहर में ही उपलब्ध


बिलासपुर। बदलती जीवनशैली, फास्ट फूड, तनाव और अनियमित दिनचर्या के बीच अब एक और खतरा शहर के लोगों की सेहत पर भारी पड़ता दिखाई दे रहा है— अमृत मिशन के तहत सप्लाई हो रहा कथित मटमैला पानी। पेट और पाचन तंत्र की बढ़ती बीमारियों के बीच अपोलो हॉस्पिटल बिलासपुर के गैस्ट्रो विशेषज्ञों ने साफ कहा है कि दूषित और अस्वच्छ जल स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन सकता है। विशेषज्ञों ने इसे सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़ा बड़ा मुद्दा बताते हुए कहा कि स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराना सरकार की जिम्मेदारी है, वहीं आम लोगों को भी पानी की शुद्धता को लेकर सतर्क रहने की जरूरत है।


इसी बीच अपोलो हॉस्पिटल बिलासपुर ने शहर और आसपास के क्षेत्रों के मरीजों के लिए अत्याधुनिक गैस्ट्रो केयर सुविधाओं का विस्तार करने की घोषणा की है। अस्पताल प्रबंधन के अनुसार अब बिलासपुर में ही एंडोस्कोपिक अल्ट्रासाउंड (EUS), एसोफागियल मैनोमेट्री, कैप्सूल एंडोस्कोपी, एडवांस्ड डायग्नोस्टिक एंड थैरेप्यूटिक एंडोस्कोपी और अत्याधुनिक GI सर्जरी जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।
विशेषज्ञों का कहना है कि आज की तेज रफ्तार जिंदगी ने लोगों के खानपान और स्वास्थ्य दोनों को प्रभावित किया है। देर रात तक जागना, फास्ट फूड, अत्यधिक मसालेदार भोजन, शराब, धूम्रपान, तनाव और शारीरिक गतिविधियों की कमी के कारण गैस, एसिडिटी, कब्ज, फैटी लिवर, अल्सर, IBS, एसिड रिफ्लक्स, निगलने में परेशानी और अग्नाशय संबंधी रोग तेजी से बढ़ रहे हैं।


पहले ये बीमारियां अधिक उम्र के लोगों में दिखाई देती थीं, लेकिन अब युवा वर्ग भी बड़ी संख्या में गैस्ट्रो समस्याओं से जूझता दिखाई दे रहा है। डॉक्टरों के मुताबिक कई बार शुरुआती लक्षण सामान्य लगते हैं, लेकिन समय पर जांच नहीं होने पर बीमारी गंभीर रूप ले सकती है।
अपोलो हॉस्पिटल बिलासपुर के संस्था प्रमुख अभय कुमार गुप्ता ने कहा कि अस्पताल का उद्देश्य महानगरों जैसी आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाएं बिलासपुर और आसपास के लोगों को उनके अपने शहर में उपलब्ध कराना है ताकि मरीजों को इलाज के लिए बाहर न जाना पड़े। उन्होंने बताया कि अस्पताल अब गैस्ट्रोएंटरोलॉजी से जुड़ी कई उन्नत जांच और उपचार सुविधाएं शुरू करने जा रहा है।

इन सुविधाओं में एंडोस्कोपिक अल्ट्रासाउंड (EUS), एसोफागियल मैनोमेट्री, कैप्सूल एंडोस्कोपी, एडवांस्ड एंडोस्कोपी और GI सर्जरी प्रमुख हैं। उन्होंने यह भी बताया कि अपोलो हॉस्पिटल बिलासपुर मेडिकल गैस्ट्रोएंटरोलॉजी में डीआरएनबी प्रोग्राम शुरू करने जा रहा है। इसके बाद अस्पताल केवल उपचार केंद्र ही नहीं बल्कि विशेषज्ञ गैस्ट्रोएंटरोलॉजिस्ट तैयार करने वाला ट्रेनिंग सेंटर भी बनेगा।
वरिष्ठ गैस्ट्रोएंटरोलॉजिस्ट डॉ. देवेंद्र सिंह ने अस्पताल के गैस्ट्रो विभाग की यात्रा को साझा करते हुए बताया कि जब अपोलो हॉस्पिटल शुरू हुआ था, तब कोलकाता से लेकर बिलासपुर तक के बीच में कोई गैस्ट्रोएंटरोलॉजिस्ट उपलब्ध नहीं था। आज स्थिति यह है कि अपोलो में एक संपूर्ण गैस्ट्रोएंटरोलॉजी केयर टीम कार्यरत है।
उन्होंने बताया कि अब तक विभाग में लगभग 1 लाख 22 हजार ओपीडी मरीजों, 24 हजार इनडोर मरीजों का उपचार किया जा चुका है तथा करीब 61 हजार गैस्ट्रो प्रोसीजर किए जा चुके हैं। अस्पताल का गैस्ट्रो विभाग उत्तर छत्तीसगढ़ के लगभग 14 जिलों, मध्यप्रदेश के 4 जिलों और ओडिशा के 3 जिलों के मरीजों को स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करा रहा है।
डॉ. देवेंद्र सिंह ने बताया कि अस्पताल में पहले से एंडोस्कोपी, कोलोनोस्कोपी, सिग्मायडोस्कोपी, फ्लोरोस्कोपी, फाइब्रोस्कैन, लिवर बायोप्सी, ERCP और स्क्लेरोथेरेपी जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं और अब इनके साथ नई आधुनिक तकनीकों को भी जोड़ा जा रहा है।
गैस्ट्रोएंटरोलॉजिस्ट डॉ. सीतेंदू पटेल ने बताया कि एंडोस्कोपिक अल्ट्रासाउंड (EUS) के माध्यम से भोजन नली, पेट, अग्नाशय, पित्ताशय और आसपास की संरचनाओं की अत्यंत सूक्ष्म जांच संभव हो सकेगी। यह तकनीक अग्नाशय कैंसर, पित्त नली की समस्याओं और पेट के अंदरूनी ट्यूमर की शुरुआती पहचान में बेहद उपयोगी मानी जा रही है।
डॉ. आकाश गर्ग ने एसोफागियल मैनोमेट्री को निगलने में कठिनाई, सीने में जलन और लगातार एसिड रिफ्लक्स जैसी समस्याओं की जांच के लिए महत्वपूर्ण बताया। वहीं डॉ. समर्थ शर्मा ने कैप्सूल एंडोस्कोपी को बिना दर्द और बिना सर्जरी वाली आधुनिक तकनीक बताते हुए कहा कि इससे छोटी आंत की ऐसी बीमारियों का भी पता लगाया जा सकता है जो सामान्य एंडोस्कोपी में नजर नहीं आतीं।
GI सर्जन डॉ. लाजपत अग्रवाल ने कहा कि अस्पताल में शामिल की जा रही नई मशीनें बीमारी के सटीक डायग्नोसिस और जटिल सर्जरी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।
अपोलो हॉस्पिटल बिलासपुर की गैस्ट्रो केयर टीम और GI सर्जरी विशेषज्ञों की संयुक्त सेवाओं के जरिए अब एंडोस्कोपिक उपचार, लिवर और पैंक्रियास रोगों का उन्नत इलाज तथा जटिल GI सर्जरी जैसी सुविधाएं एक ही स्थान पर उपलब्ध होंगी।
इसी दौरान विशेषज्ञों ने शहर में सप्लाई हो रहे मटमैले पानी को लेकर भी चिंता जताई। चिकित्सकों ने कहा कि दूषित पानी पाचन तंत्र से जुड़ी बीमारियों, संक्रमण और गैस्ट्रो संबंधी समस्याओं को बढ़ा सकता है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की जिम्मेदारी है कि लोगों को स्वच्छ और सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराया जाए। साथ ही लोगों को भी पानी की शुद्धता को लेकर सतर्क रहने और उबालकर पानी पीने जैसे उपाय अपनाने की जरूरत है।
अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. अनिल कुमार गुप्ता ने कार्यक्रम के अंत में धन्यवाद ज्ञापन किया।

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