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बिलासपुर में मध्यप्रदेश की शराब पिलाई जा रही: आबकारी विभाग के अधिकारी प्रशासन की छवि कर रहे धूमिल

Mohammed Israil
Mohammed Israil  - Editor
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00 बड़े मामले हैं पकड़े ही नहीं जा रहे, जिले के ढाबों समेत होटल में अवैध तरीके से पिलाई जाती रही है शराब

00 होटल में चल रहे वैवाहिक कार्यक्रम के दौरान हुई कार्रवाई

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर  में मध्य प्रदेश की शराब पिलाई जा रही है।  हाल ही में हाईकोर्ट रोड स्थित होटल पेट्रिशियन में वैवाहिक कार्यक्रम के दौरान मध्यप्रदेश में बिक्री के लिए अनुमोदित शराब परोसी जा रही थी। मौके पर आबकारी विभाग ने छापा मारकर जॉनी वॉकर ब्लैक लेबल की चार बोतलें बरामद कीं, जिनमें से दो बोतलें पूरी भरी हुई थीं और बाकी में क्रमशः 500 एमएल एवं 250 एमएल शराब थी।

प्रशासन की विफलता उजागर

यह घटना बताती है कि बिलासपुर में मध्यप्रदेश से अवैध शराब की तस्करी हो रही है, जिसे रोकने में प्रशासन और आबकारी विभाग पूरी तरह विफल साबित हो रहा है। छत्तीसगढ़ सरकार ने शराब की बिक्री पर सख्त कानून लागू किए हैं, फिर भी मध्यप्रदेश की शराब यहां तक कैसे पहुँच रही है, यह चिंता का विषय है। ऐसे में सीमावर्ती क्षेत्रों में चेकपोस्ट और निगरानी प्रणाली की कमजोरियाँ स्पष्ट होती हैं। यह सिर्फ एक होटल का मामला नहीं है, बल्कि पूरे सिस्टम की निगरानी पर सवाल उठाता है।

तस्करी का नेटवर्क और जिम्मेदारी

छत्तीसगढ़ के बाजार में मध्यप्रदेश की शराब की उपलब्धता एक बड़े तस्करी नेटवर्क की ओर इशारा करती है। यह नेटवर्क न केवल आर्थिक नुकसान पहुँचा रहा है, बल्कि कानून व्यवस्था को भी चुनौती दे रहा है। सीमावर्ती इलाकों में तस्करों की गतिविधियाँ बढ़ रही हैं, और स्थानीय प्रशासन की ढील से ये गतिविधियाँ और भी फल-फूल रही हैं। प्रशासन को न केवल होटल और आयोजकों के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए, बल्कि इस नेटवर्क के पीछे के मुख्य आरोपियों को पकड़ने पर भी ध्यान केंद्रित करना चाहिए।

प्रशासन को जवाबदेह बनाना आवश्यक

इस घटना के बाद सवाल उठता है कि क्या आबकारी विभाग की नियमित जांचें प्रभावी हैं? अवैध शराब के धंधे में शामिल लोगों को पकड़ने के लिए केवल मुखबिरों की सूचना पर निर्भर रहने की बजाय, एक व्यापक निगरानी तंत्र की आवश्यकता है। आबकारी विभाग और पुलिस प्रशासन की जिम्मेदारी है कि वे सीमावर्ती क्षेत्रों में सख्त चेकिंग करें और यह सुनिश्चित करें कि तस्करी की घटनाएँ न हों।

सख्त कार्रवाई की आवश्यकता

आबकारी विभाग और स्थानीय प्रशासन को चाहिए कि वे इस घटना को एक चेतावनी के रूप में लें और तस्करी रोकने के लिए एक मजबूत रणनीति बनाएं। दोषियों को कठोर सजा दिलाने के साथ-साथ विभागीय अधिकारियों की जिम्मेदारी भी तय होनी चाहिए। बिना प्रशासनिक सख्ती के, ऐसे मामले फिर से सामने आने की संभावना बनी रहेगी।


“क्या प्रशासन अपनी जिम्मेदारी निभा रहा है?”
इस घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि अवैध शराब की तस्करी पर पूरी तरह नियंत्रण नहीं हो सका है। छत्तीसगढ़ में मध्यप्रदेश की शराब की उपलब्धता, एक गहरी समस्या का संकेत है। प्रशासन को कठघरे में खड़ा करने का वक्त आ गया है। क्या हम सिर्फ छापों तक सीमित रहेंगे या तस्करी के मूल कारणों को खत्म करने की दिशा में कदम उठाएँगे?

आबकारी अमले ने मीडिया को दी ये जानकारी

कलेक्टर जिला बिलासपुर,  अवनीश शरण के निर्देश और प्रभारी सहायक आयुक्त आबकारी,  नवनीत तिवारी के मार्गदर्शन में 02.12.2024 को हाईकोर्ट रोड स्थित होटल पेट्रिशियन में अवैध रूप से मदिरा परोसने की शिकायत पर त्वरित कार्रवाई की गई। वैवाहिक कार्यक्रम में अवैध शराब परोसने की सूचना मिलने पर आबकारी टीम ने मौके पर पहुँचकर तलाशी ली, जिसमें “फॉर सेल इन मध्यप्रदेश ओनली” अंकित जॉनी वॉकर ब्लैक लेबल की 4 बोतलें बरामद हुईं। इनमें से 2 बोतलें पूरी भरी हुई थीं, जबकि अन्य 2 बोतलों में क्रमशः 500 एमएल और 250 एमएल शराब पाई गई।

आरोपियों पर मामला दर्ज:

मुख्य आरोपी रामायण सिंह के खिलाफ छत्तीसगढ़ आबकारी अधिनियम की धारा 34(1)(क) और 36 के तहत अपराध दर्ज किया गया।

शराब परोसने और पीने वालों के खिलाफ धारा 36(बी) और 36(सी) के तहत मामला पंजीबद्ध कर प्रकरण विवेचना में लिया गया है।

कार्रवाई में शामिल अधिकारी:

सहायक जिला आबकारी अधिकारी (प्रभारी वृत्त बिल्हा):  छबिलाल पटेल

आबकारी उपनिरीक्षक: धर्मेंद्र शुक्ला

आबकारी मुख्य आरक्षक: वीरभद्र जायसवाल, अनिल पांडेय

आबकारी आरक्षक: नवनीत पांडेय

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