शहर कांग्रेस अध्यक्ष सुधांशु मिश्रा और जिला अध्यक्ष महेंद्र गंगोत्री की पत्रकारवार्ता में केंद्र सरकार के 131वें संविधान संशोधन विधेयक पर तीखा हमला
बिलासपुर। शहर कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष सुधांशु मिश्रा और जिला अध्यक्ष महेंद्र गंगोत्री ने संयुक्त पत्रकारवार्ता में भारतीय जनता पार्टी पर महिला आरक्षण के मुद्दे पर देशभर में “भ्रम फैलाने” का आरोप लगाया। नेताओं ने कहा कि कांग्रेस शुरू से महिला आरक्षण की समर्थक रही है, जबकि भाजपा इस मुद्दे को “मुखौटा” बनाकर परिसीमन से जुड़े अपने राजनीतिक हित साधना चाहती है।
“महिला आरक्षण पर झूठ फैला रही भाजपा”
कांग्रेस नेताओं ने स्पष्ट किया कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023 (128वां संविधान संशोधन) संसद के दोनों सदनों से पारित हो चुका है और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की स्वीकृति के बाद यह कानून बन चुका है।
उन्होंने कहा कि भाजपा का यह दावा गलत है कि कांग्रेस और विपक्ष ने महिला आरक्षण बिल का समर्थन नहीं किया।
131वें संशोधन विधेयक पर सवाल
कांग्रेस नेताओं ने 16 अप्रैल 2026 को केंद्र सरकार द्वारा पेश 131वें संविधान संशोधन विधेयक को लेकर कई गंभीर सवाल उठाए। उनके अनुसार:
लोकसभा की सीटें बढ़ाकर 850 करने का प्रस्ताव था
राज्यों में 815 और केंद्र शासित प्रदेशों में 35 सीटें तय करने की बात
परिसीमन के लिए 2011 की जनगणना को आधार बनाने का प्रस्ताव
दिल्ली, पांडुचेरी और जम्मू-कश्मीर के कानूनों में संशोधन की योजना
कांग्रेस का आरोप है कि यह विधेयक महिला आरक्षण से अधिक परिसीमन को आगे बढ़ाने का प्रयास था।
“जनगणना पूरी होने से पहले परिसीमन क्यों?”
नेताओं ने कहा कि जब 2026-27 की नई जनगणना प्रस्तावित है और जातिगत जनगणना की भी चर्चा है, तो पुराने आंकड़ों (2011) के आधार पर परिसीमन करना उचित नहीं है।
उन्होंने सवाल उठाया कि:
महिला आरक्षण को तुरंत लागू करने के लिए वर्तमान सीटों में ही 33% आरक्षण क्यों नहीं दिया जा सकता?
सरकार 2023 के कानून में संशोधन कर इसे तत्काल लागू क्यों नहीं करती?
“विपक्ष की एकजुटता से विफल हुआ प्रयास”
कांग्रेस का दावा है कि भाजपा परिसीमन को महिला आरक्षण के साथ जोड़कर पास कराना चाहती थी, लेकिन विपक्षी दलों की एकजुटता के चलते यह प्रयास सफल नहीं हो सका।
कांग्रेस का पक्ष
पत्रकारवार्ता में कांग्रेस नेताओं ने कहा कि महिलाओं को राजनीतिक प्रतिनिधित्व दिलाने में कांग्रेस की भूमिका ऐतिहासिक रही है:
राजीव गांधी ने 1989 में पंचायत-नगर निकायों में 33% आरक्षण का प्रस्ताव रखा
पी.वी. नरसिम्हा राव के कार्यकाल में 1993 में यह कानून बना
मनमोहन सिंह सरकार ने संसद और विधानसभाओं में आरक्षण का विधेयक लाया, जो 2010 में राज्यसभा से पारित हुआ
उन्होंने बताया कि आज देशभर में 15 लाख से अधिक महिला जनप्रतिनिधि स्थानीय निकायों में कार्यरत हैं, जो कांग्रेस की नीतियों का परिणाम है।

