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नवजातों में सिकल सेल की जल्द पहचान का ‘देसी समाधान’,रायपुर की लैब से निकली किट अब नेशनल मंच पर, ICMR समिट में होगा शोकेस

Mohammed Israil
Mohammed Israil  - Editor
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रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से निकला एक बायोमेडिकल नवाचार अब राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियों में है। पंडित जवाहर लाल नेहरू स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय एवं डॉ. भीमराव अम्बेडकर स्मृति चिकित्सालय की मल्टी डिसिप्लिनरी रिसर्च यूनिट (एमआरयू) द्वारा विकसित सिकल सेल डायग्नोस्टिक किट को Indian Council of Medical Research के प्रतिष्ठित “इनोवेटर्स टू इंडस्ट्री कनेक्ट” समिट में प्रदर्शित करने के लिए चुना गया है। 23 अप्रैल 2026 को Bharat Mandapam में होने वाले इस समिट में देश के शीर्ष संस्थानों के बीच यह किट अपनी उपयोगिता और संभावनाओं का प्रदर्शन करेगी।
क्या है यह किट और क्यों है खास?
रायपुर स्थित एमआरयू के वैज्ञानिक डॉ. जगन्नाथ पाल, डॉ. योगिता राजपूत और उनकी टीम द्वारा विकसित यह सिकल सेल डायग्नोस्टिक किट खासतौर पर नवजात शिशुओं और गर्भावस्था के दौरान (एंटीनेटल स्टेज) सिकल सेल एनीमिया की जल्दी पहचान के लिए डिजाइन की गई है।
सटीक और शुरुआती निदान पर फोकस
नवजात स्क्रीनिंग में उपयोगी
गर्भवती महिलाओं की जांच में मददगार
संभावित रूप से ग्रामीण और सीमित संसाधनों वाले क्षेत्रों में भी उपयोगी
इस रिसर्च में एमआरयू की नोडल ऑफिसर डॉ. मंजुला बेक की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
नेशनल प्लेटफॉर्म पर मिली जगह, टॉप-10 में चयन
Indian Council of Medical Research के “मेडिकल इनोवेशन पेटेंट मित्र” प्रोग्राम के तहत देशभर से चुनी गई टॉप-10 टेक्नोलॉजी में इस किट को स्थान मिला है।
इस सूची में शामिल प्रमुख संस्थान:
IIT Guwahati
AIIMS New Delhi
Tata Memorial Centre
ऐसे संस्थानों के बीच चयन इस किट की वैज्ञानिक गुणवत्ता और उपयोगिता को दर्शाता है।
पेटेंट और फंडिंग: रिसर्च से प्रोडक्ट तक का सफर
6 फरवरी 2026 को इंडियन पेटेंट के लिए आवेदन किया जा चुका है
प्रोजेक्ट को Indian Council of Medical Research के एक्स्ट्राम्यूरल फंड से वित्तीय सहयोग मिला
“मेक इन इंडिया” के तहत टेक्नोलॉजी को आगे बढ़ाने की प्रक्रिया जारी
समिट में क्या होगा? टेक्नोलॉजी से इंडस्ट्री तक कनेक्शन
“इनोवेटर्स टू इंडस्ट्री कनेक्ट” समिट का उद्देश्य सिर्फ प्रदर्शन नहीं, बल्कि टेक्नोलॉजी ट्रांसफर और कमर्शियलाइजेशन है।
इंडस्ट्री लीडर्स से डायरेक्ट इंटरैक्शन
पेटेंट लाइसेंसिंग के अवसर
पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप को बढ़ावा
स्टार्टअप और हेल्थ सेक्टर के लिए संभावनाएं
एमआरयू टीम को समिट में किट के साथ उपस्थित रहने, टेक्नोलॉजी फ्लायर और आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।
संस्थान की प्रतिक्रिया: रिसर्च को मिल रहा राष्ट्रीय मंच
डीन डॉ. विवेक चौधरी के अनुसार, संस्थान में शोध और नवाचार को लगातार प्रोत्साहन दिया जा रहा है, जिसके परिणाम अब राष्ट्रीय स्तर पर सामने आ रहे हैं।
अधीक्षक डॉ. संतोष सोनकर ने कहा कि यह किट सिकल सेल एनीमिया जैसे गंभीर रोग के समय पर निदान में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है और स्वास्थ्य सेवाओं को नई दिशा दे सकती है।
सिकल सेल एनीमिया: क्यों जरूरी है ऐसी किट?
Sickle Cell Anemia एक अनुवांशिक रक्त विकार है, जो खासतौर पर भारत के कुछ क्षेत्रों—जैसे छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश, ओडिशा और महाराष्ट्र—में ज्यादा पाया जाता है।
लाल रक्त कोशिकाएं असामान्य आकार की हो जाती हैं
शरीर में ऑक्सीजन सप्लाई प्रभावित होती है
बच्चों में गंभीर जटिलताएं संभव
ऐसे में जन्म के तुरंत बाद या गर्भावस्था के दौरान पहचान बीमारी के प्रभाव को कम करने में अहम मानी जाती है।
नेशनल इम्पैक्ट: क्यों चर्चा में है रायपुर का यह इनोवेशन
राज्य स्तरीय लैब से निकली तकनीक को राष्ट्रीय मंच
“मेक इन इंडिया” और हेल्थ इनोवेशन एजेंडा से सीधा जुड़ाव
पब्लिक हेल्थ सिस्टम में उपयोग की संभावना
रिसर्च से इंडस्ट्री तक पहुंचने की क्षमता

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