बिलासपुर। ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारियों की पदोन्नति को लेकर लंबे समय से चल रहे विवाद में सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के बाद नया मोड़ आ गया है। कोर्ट ने राज्य शासन और कृषि स्नातक संघ द्वारा दायर एसएलपी को खारिज कर दिया है, जिसके बाद विवादित 582 पदोन्नतियां स्वतः निरस्त मानी जाएंगी।

बिलासपुर स्थित कर्मचारी भवन में रविवार को छत्तीसगढ़ ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी संघ की प्रांतीय कार्यकारिणी की बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता संघ के प्रांतीय अध्यक्ष विजय लहरे ने की। बैठक में संघ की लंबित पदोन्नति से जुड़े मामले और हाल ही में सर्वोच्च न्यायालय में हुई सुनवाई पर विस्तार से चर्चा की गई।
बैठक में बताया गया कि राज्य शासन और छत्तीसगढ़ कृषि स्नातक संघ द्वारा दायर एसएलपी क्रमांक 693/2023 पर सर्वोच्च न्यायालय में 12 मार्च 2026 को अंतिम सुनवाई हुई, जिसमें न्यायालय ने दोनों एसएलपी को खारिज कर दिया। इस निर्णय पर संघ ने खुशी व्यक्त करते हुए न्यायालय और राज्य शासन के प्रति आभार जताया।
संघ के पदाधिकारियों ने बताया कि कृषि विभाग में कार्यरत ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारियों की भर्ती और पदोन्नति नियम वर्ष 2010 में लागू थे। इसके बाद 4 दिसंबर 2018 को शासन द्वारा अध्यादेश जारी कर पदोन्नति नियमों में बदलाव कर दिया गया था। संघ के अनुसार इस बदलाव से ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारियों की वरिष्ठता प्रभावित हो रही थी और यह छत्तीसगढ़ पदोन्नति नियम 2003 के प्रावधानों का भी अतिक्रमण था।
इस आदेश के विरोध में संघ के तत्कालीन अध्यक्ष एमपी आड़े सहित अन्य साथियों ने 2019 में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट बिलासपुर में याचिका क्रमांक 4742/2019 दायर की थी।
इसी दौरान संचालक कृषि द्वारा 29 मई 2021 को 4 दिसंबर 2018 के अध्यादेश के आधार पर 235 कनिष्ठ ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारियों को पदोन्नति दे दी गई थी, हालांकि यह पदोन्नति याचिका के अंतिम निर्णय की बाध्यता की शर्त पर दी गई थी।
बाद में 7 अप्रैल 2022 को हाईकोर्ट ने अपने फैसले में राज्य शासन के 4 दिसंबर 2018 के अध्यादेश को निरस्त (अल्ट्रा वायर्स) कर दिया। इस निर्णय के खिलाफ राज्य शासन और कृषि स्नातक संघ ने अलग-अलग विशेष अनुमति याचिकाएं सर्वोच्च न्यायालय में दायर की थीं।
12 मार्च 2026 को हुई सुनवाई में सर्वोच्च न्यायालय ने दोनों एसएलपी को खारिज कर दिया। इसके बाद प्रकरण 4742/2019 के लंबित रहने के दौरान संचालक कृषि द्वारा की गई कुल 582 पदोन्नतियां स्वतः निरस्त हो गई हैं।
इस मामले में ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी संघ की ओर से अधिवक्ता अनुराग दयाल श्रीवास्तव, गौरव चौधरी, साहिल टैंगोटा और वरिष्ठ अधिवक्ता शोएब आलम ने पैरवी की।
बैठक में निर्णय लिया गया कि अब 2019 में जारी वरिष्ठता सूची के आधार पर पात्र ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारियों की विधिसम्मत पदोन्नतियां सुनिश्चित कराने के लिए संघ आगे की रणनीति तैयार करेगा।
बैठक में छत्तीसगढ़ प्रदेश तृतीय वर्ग शासकीय कर्मचारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष पवन कुमार शर्मा, जिला अध्यक्ष किशोर शर्मा, संघ के संरक्षक एमपी आड़े, प्रांतीय अध्यक्ष विजय लहरे, आरएल गुप्ता, राजेंद्र वर्मा, मनोज कुमार, डीपी सूर्यवंशी, गीता चौरसिया, अनीता सोनी, विजय धीरज, नलिनी चंद्राकर, जेएस मरकाम, राजेश, परसराम भारद्वाज, पीडी दोहरे, कुंज बिहारी, जेस नाटिया, ओपी डहरिया, अरुण एका, अश्वनी कुर्रे, नरेश बघेल, फूल कुमारी, नरेटी रोहिणी मेश्राम और फिलोमिना खाका सहित बड़ी संख्या में कर्मचारी मौजूद रहे। बैठक के बाद कर्मचारियों ने जीत की खुशी में होली मिलन भी मनाया।

