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“जनता की आह चाहिए या उद्योगपतियों का पैसा?” — लिंगियाडीह महाधरना में अमित जोगी का तीखा हमला

Mohammed Israil
Mohammed Israil  - Editor
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बिलासपुर, छत्तीसगढ़।


बिलासपुर के लिंगियाडीह में जमीन और अधिकारों को लेकर चल रहे महाधरना ने अब राजनीतिक रंग पकड़ लिया है। धरना स्थल पर पहुंचे जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) के नेता अमित जोगी ने नेताओं और जनप्रतिनिधियों पर तीखा हमला बोलते हुए सवाल खड़ा किया कि वे जनता के लिए राजनीति करेंगे या उद्योगपतियों और भू-माफियाओं के लिए। उन्होंने कहा कि वोट लेकर जनता की उम्मीदों से खिलवाड़ करने वालों को यह तय करना होगा कि उन्हें गरीबों की आह चाहिए या उद्योगपतियों का पैसा।


धरना स्थल पर पहुंचे अमित जोगी, नेताओं को दी कड़ी नसीहत
लिंगियाडीह क्षेत्र के प्रभावित परिवारों के समर्थन में चल रहे महाधरना स्थल पर पहुंचे अमित जोगी ने मंच से जनप्रतिनिधियों और नेताओं को कड़ी नसीहत दी। उन्होंने कहा कि जनता ने जिन लोगों को वोट देकर सत्ता और जिम्मेदारी सौंपी है, उन्हें उसी जनता के हितों के लिए खड़ा होना चाहिए।
जोगी ने कहा कि अगर जनप्रतिनिधि भू-माफियाओं और उद्योगपतियों के दबाव में काम करेंगे तो यह लोकतंत्र और जनता के भरोसे के साथ धोखा होगा।
“गरीब की आह बहुत भारी होती है” — कबीर का दोहा सुनाया
धरना स्थल पर मौजूद लोगों को संबोधित करते हुए अमित जोगी ने कबीर के दोहे का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि गरीब और बेबस लोगों की आह और बद्दुआ बहुत भारी होती है।
उनका कहना था कि अगर किसी गरीब की बद्दुआ लग जाए तो दुनिया की कोई ताकत उस व्यक्ति को नहीं बचा सकती। इसलिए सत्ता में बैठे लोगों को गरीबों की पीड़ा और आक्रोश को समझना चाहिए।
115 दिनों से धरने पर बैठे हैं प्रभावित परिवार
अमित जोगी ने बताया कि लिंगियाडीह के कई प्रभावित परिवार पिछले करीब 115 दिनों से जमीन और अधिकारों के मुद्दे को लेकर महाधरना पर बैठे हुए हैं, लेकिन अब तक उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हो पाया है।

उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन और सरकार ने अब तक इस गंभीर मुद्दे पर कोई ठोस पहल नहीं की है, जिससे प्रभावित परिवारों में नाराजगी और आक्रोश बढ़ता जा रहा है।
सरकार से की मांग — जल्द मिले न्याय
अमित जोगी ने सरकार और प्रशासन से मांग की कि लिंगियाडीह के प्रभावित परिवारों की समस्याओं को गंभीरता से सुना जाए और जल्द से जल्द समाधान निकाला जाए।
उन्होंने कहा कि जब तक पीड़ित परिवारों को न्याय नहीं मिल जाता, तब तक वे इस मुद्दे को मजबूती से उठाते रहेंगे और आंदोलन कर रहे लोगों के साथ खड़े रहेंगे।
“जनता के अधिकारों की लड़ाई किसी कीमत पर कमजोर नहीं पड़ेगी”, यह कहते हुए उन्होंने प्रभावित परिवारों को भरोसा दिलाया कि उनका संघर्ष व्यर्थ नहीं जाएगा।

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