Latest news

एसीबी छापे के बाद फिर बिलासपुर वापसी: विवादित डिप्टी कलेक्टर नारायण गबेल की पोस्टिंग पर उठे सवाल

Mohammed Israil
Mohammed Israil  - Editor
3 Min Read

बिलासपुर, 01 मार्च 2026।
जिले के प्रशासनिक हलकों में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। जमीन से जुड़े चर्चित मामलों और एसीबी जांच का सामना कर चुके डिप्टी कलेक्टर नारायण प्रसाद गबेल की दोबारा जिला मुख्यालय में पदस्थापना ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। करीब डेढ़ साल पहले तबादले के बाद अब उनकी बिलासपुर वापसी को लेकर आम लोगों से लेकर प्रशासनिक गलियारों तक चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है।


एसीबी जांच और एफआईआर का मामला
गौरतलब है कि तत्कालीन तहसीलदार रहते गबेल का नाम जमीन से जुड़े कथित फर्जीवाड़ों में सामने आया था। इसी दौरान एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) ने 24 जून 2021 को आय से अधिक संपत्ति के मामले में एफआईआर दर्ज कर उनके ठिकानों पर छापा मारा था।
मामले में बिलासपुर निवासी सूरज सिंह यादव द्वारा छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट में क्रिमिनल रिट याचिका दायर की गई थी। इस पर सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने जांच तीन सप्ताह में पूरी करने और अभियोजन स्वीकृति पर निर्णय लेने के निर्देश दिए थे। हालांकि इसके बाद जांच की प्रगति को लेकर सार्वजनिक रूप से कोई विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई।
80 वर्षीय मंगतीन बाई का मामला सबसे चर्चित
गबेल के कार्यकाल का सबसे चर्चित मामला 80 वर्षीय मंगतीन बाई से जुड़ा रहा। चांटीडीह स्थित खसरा नंबर 214/10, 214/5 और 214/9 की जमीन पर दावा करने वाली मंगतीन बाई वर्षों तक तहसील कार्यालय के चक्कर लगाती रहीं।
आरोप है कि जमीन मामले में सुनवाई के बजाय उन्हें मानसिक रूप से अस्वस्थ बताते हुए पुलिस को पत्र तक भेजा गया। हालांकि राजस्व अभिलेखों में दावा खारिज होने का हवाला देकर प्रकरण समाप्त बताया गया था। इस मामले ने उस समय सामाजिक संगठनों और आम लोगों के बीच व्यापक चर्चा को जन्म दिया था।
एकतरफा रिलीव आदेश से बढ़ी अटकलें
अब सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी आदेश में गबेल को डिप्टी कलेक्टर के रूप में बिलासपुर पदस्थ करते हुए एकतरफा रिलीव भी कर दिया गया है। आदेश की इस विशेषता ने और भी अटकलों को जन्म दे दिया है।
जमीन से जुड़े पुराने मामलों और एसीबी जांच की पृष्ठभूमि में उनकी वापसी को लेकर पारदर्शिता और जवाबदेही पर सवाल उठ रहे हैं। प्रशासनिक हलकों में यह चर्चा भी है कि लंबित जांच और पूर्व विवादों के बावजूद इस तरह की पोस्टिंग किन परिस्थितियों में की गई।
फिलहाल निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि लंबित जांच और पूर्व आरोपों के बीच जिला प्रशासन और शासन आगे क्या रुख अपनाते हैं।

खबर को शेयर करने के लिए क्लिक करे।।