बीपीएल कार्ड में नाम गलत छपने की सजा भुगत रहा वार्ड 46 का निवासी, दिसंबर से फरवरी तक नहीं मिला अनाज — दफ्तर के बाहर जमीन पर बैठकर करता रहा इंतजार



बिलासपुर।
शहर के वार्ड क्रमांक 46 में रहने वाले एक दृष्टिबाधित गरीब की मजबूरी और सिस्टम की बेरुखी की कहानी इन दिनों फूड विभाग के दफ्तर की सीढ़ियों पर लिखी जा रही है। दोनों आंखों से देखने में असमर्थ इस व्यक्ति की गलती सिर्फ इतनी थी कि उसके बीपीएल राशन कार्ड में नाम गलत दर्ज हो गया।
केवाईसी के दौरान उसने तीन माह पहले नियमानुसार आवेदन देकर नाम सुधारने की प्रक्रिया शुरू की, लेकिन दिसंबर से फरवरी तक उसका नाम नहीं सुधर सका। नतीजा यह हुआ कि उसे लगातार तीन माह का राशन नहीं मिला।
तीन माह से दफ्तर के चक्कर, फिर भी नहीं हुआ सुधार
पीड़ित का कहना है कि वह पिछले तीन महीनों से लगातार विभागीय अधिकारियों के चक्कर काट रहा है। हर बार उसे आश्वासन मिलता है, लेकिन कार्ड में नाम सुधार की प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी।
बुधवार को वह अपने रिक्शा चालक भाई के साथ फूड विभाग के कार्यालय पहुंचा। घंटों तक दफ्तर के बाहर जमीन पर बैठा रहा। उसे उम्मीद थी कि शायद आज उसका नाम सुधर जाएगा और उसे उसका हक मिल जाएगा।
कार्यालय में मौजूद फूड विभाग के कर्मचारी ने उसे पीडीएफ बनाकर देने का आश्वासन दिया है। हालांकि, अब तक नाम सुधार की प्रक्रिया पूर्ण नहीं हो पाई है।
नाम की गलती बनी भूख की वजह
बीपीएल राशन कार्ड में नाम गलत दर्ज होने के कारण केवाईसी सत्यापन के दौरान उसका रिकॉर्ड मैच नहीं हुआ। परिणामस्वरूप उसे दिसंबर, जनवरी और अब फरवरी माह का राशन भी नहीं मिल सका।
तीन माह से अनाज के लिए भटक रहे इस दृष्टिबाधित व्यक्ति के सामने रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करना चुनौती बन गया है।
सवालों के घेरे में विभागीय कार्यप्रणाली
नाम सुधार का आवेदन तीन माह पहले दिए जाने के बावजूद अब तक सुधार नहीं होना विभागीय कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रहा है।
दृष्टिबाधित व्यक्ति का कहना है कि हर बार उसे “प्रक्रिया चल रही है” कहकर लौटा दिया जाता है।
अब देखना यह है कि फरवरी माह का राशन उसे मिल पाता है या नहीं, और विभाग नाम सुधार की प्रक्रिया कब तक पूरी कर पाता है।



