बिलासपुर।
जिला एवं नगर निगम प्रशासन भले ही मंचों पर, बैनरों पर और पुरस्कार समारोहों में यह दावा करता रहे कि स्मार्ट सिटी बिलासपुर स्वच्छता के मामले में पूरे देश में टॉप टेन में शुमार है, दूसरे नंबर का स्वच्छता पुरस्कार भी झोली में डाल चुका है — लेकिन बुधवार दोपहर कलेक्ट्रेट परिसर की यह तस्वीर कुछ और ही कहानी बयां करती नजर आई।
कलेक्टर चैंबर से महज 10 मीटर की दूरी पर रखा एक डस्टबिन मानो अपनी सीमा से आज़ादी की घोषणा कर चुका है। डस्टबिन अब डस्टबिन कम और कचरा वितरण केंद्र ज्यादा प्रतीत हो रहा है। फर्श पर कचरा ऐसे उगल रहा है जैसे उसे भी ‘स्मार्ट सिटी’ की उपलब्धि में योगदान देना हो।
कहने को यह जिला प्रशासन का मुख्यालय है — जहां से सफाई, स्वच्छता, मॉनिटरिंग और निरीक्षण की फाइलें गुजरती हैं। लेकिन उसी परिसर में कचरा समय पर ठिकाने नहीं लगाया जाना अपनी अलग ही गवाही दे रहा है।
कचरा सिर्फ डस्टबिन तक सीमित नहीं रहा। वह अपनी सीमाएं लांघते हुए चारों तरफ फैल चुका है। दृश्य ऐसा कि मानो स्वच्छता रैंकिंग की चमक इस कोने तक पहुंचने से पहले ही थक गई हो।
दिलचस्प यह कि नगर निगम प्रशासन के अधिकारी भी यहीं आते-जाते रहते हैं। समय सीमा की बैठक हो या अन्य प्रशासनिक कार्य — कलेक्ट्रेट परिसर उनकी नियमित गतिविधियों का केंद्र है। करोड़ों रुपए हर महीने साफ-सफाई के नाम पर पानी की तरह बहाए जाने की चर्चा भी कम नहीं है, लेकिन जमीन पर बिखरा कचरा किसी और ही लेखे-जोखे की ओर इशारा करता दिखता है।

