

बिलासपुर।
संसद में रविवार को प्रस्तुत किए गए केंद्रीय आम बजट 2026-27 को लेकर बिलासपुर में राजनीतिक प्रतिक्रियाओं की तीखी और व्यापक तस्वीर सामने आई। भारतीय जनता पार्टी के जनप्रतिनिधियों और संगठन पदाधिकारियों ने बजट को विकसित भारत की नींव रखने वाला, मध्यम वर्ग को सशक्त करने वाला और अर्थव्यवस्था को नई गति देने वाला बताया, वहीं कांग्रेस नेताओं, कर्मचारी संगठनों और जनप्रतिनिधियों ने इसे गांव, गरीब, किसान, मजदूर और कर्मचारियों के लिए निराशाजनक करार दिया। बजट के कर सुधार, तकनीक, विनिर्माण, खनिज, युवा, महिला, स्वास्थ्य, शिक्षा, पर्यटन, कृषि, रेलवे और छत्तीसगढ़ केंद्रित प्रावधानों को लेकर अलग-अलग मंचों से पक्ष-विपक्ष की प्रतिक्रियाएं सामने आईं।
अमर अग्रवाल: विकसित भारत की दिशा में अहम कदम, कर सुधारों पर जोर

बिलासपुर विधायक अमर अग्रवाल ने कहा कि वर्ष 2026-27 का बजट विकसित भारत के लक्ष्य की ओर एक निर्णायक कदम है। इसमें समावेशी विकास पर विशेष बल दिया गया है। उन्होंने बताया कि बजट में कर सुधार, विनिर्माण और तकनीक को केंद्र में रखा गया है।
मध्यम वर्ग के लिए नई आयकर व्यवस्था को और आकर्षक बनाया गया है। 12 लाख रुपये तक की वार्षिक आय को कर मुक्त किए जाने से आम करदाताओं को सीधी राहत मिलेगी।
धरमलाल कौशिक: वेतनभोगी और वरिष्ठ नागरिकों को राहत, इलेक्ट्रॉनिक्स होंगे सस्ते

बिल्हा विधायक धरमलाल कौशिक ने कहा कि वेतनभोगी कर्मचारियों के लिए मानक कटौती बढ़ाकर 75 हजार रुपये करना स्वागतयोग्य कदम है।
वरिष्ठ नागरिकों के लिए कर कटौती की सीमा बढ़ाकर 1 लाख रुपये किए जाने से उन्हें बड़ी राहत मिलेगी।
उन्होंने बताया कि लिथियम आयरन बैटरी समेत 12 महत्वपूर्ण खनिजों पर सीमा शुल्क समाप्त होने से इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पाद सस्ते होंगे, जिससे आम उपभोक्ताओं को लाभ मिलेगा।
धर्मजीत सिंह: अवसरों का राजमार्ग, तीसरी अर्थव्यवस्था बनने की तैयारी
तखतपुर विधायक धर्मजीत सिंह ने कहा कि भारत केवल तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था बनकर संतुष्ट नहीं है, बल्कि जल्द से जल्द दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
उन्होंने बजट को अपार अवसरों का राजमार्ग बताते हुए कहा कि यह वर्तमान के सपनों को साकार करता है।
रेयर अर्थ कॉरिडोर, क्रिटिकल मिनरल्स, टैक्सटाइल, हाई-टेक टूल मैन्युफैक्चरिंग जैसे प्रावधान भविष्य और वर्तमान—दोनों की जरूरतों को ध्यान में रखते हैं।

भूपेन्द्र सवन्नी: युवा शक्ति बजट, डेयरी और किसानों को प्राथमिकता
क्रेडा अध्यक्ष भूपेन्द्र सवन्नी ने बजट को युवा शक्ति बजट करार दिया। उन्होंने कहा कि ऑरेंज इकोनॉमी, पर्यटन और खेलों इंडिया मिशन के जरिए युवाओं के लिए नए अवसरों के द्वार खुलेंगे।
भारत को दुनिया का डेटा सेंटर हब बनाने के लिए टैक्स में बड़ी छूट दी गई है।
डेयरी उद्योग को प्राथमिकता देते हुए नारियल, काजू और कोको उत्पादक किसानों पर विशेष ध्यान दिया गया है।
उन्होंने बताया कि भारत विस्तार ऐप के माध्यम से किसानों को उनकी अपनी भाषा में जानकारी सुलभ होगी।
दीपक सिंह ठाकुर: छत्तीसगढ़ पर विशेष फोकस, 50 साल का ब्याज मुक्त ऋण

बिलासपुर शहर भाजपा जिलाध्यक्ष दीपक सिंह ठाकुर ने कहा कि राज्यों को बुनियादी ढांचे के विकास के लिए 1.5 लाख करोड़ रुपये का 50 वर्षों के लिए ब्याज मुक्त ऋण जारी रखा गया है।
छत्तीसगढ़ को खनिज संपन्न और जनजातीय बहुल राज्य बताते हुए उन्होंने कहा कि केंद्रीय बजट 2026-27 में कनेक्टिविटी, जनजातीय कल्याण और औद्योगिक विकास पर विशेष ध्यान दिया गया है।

रविन्द्र सिंह: गांव-गरीब उपेक्षित, महंगाई-रोजगार पर चुप्पी
बिलासपुर जिला शहर कांग्रेस कमेटी के पूर्व अध्यक्ष रविन्द्र सिंह ने बजट को अब तक का सबसे निराशाजनक बताया।
उन्होंने कहा कि बजट में गांव और गरीबों के उत्थान के लिए कोई ठोस प्रयास नहीं किया गया है।
युवा, महिलाएं, बुजुर्ग और बेरोजगारों में हताशा है। महंगाई नियंत्रण और रोजगार सृजन को लेकर कोई ठोस घोषणा नहीं हुई, जिससे आम जनमानस ठगा हुआ महसूस कर रहा है।
मनीष अग्रवाल: आत्मनिर्भर भारत को मजबूती, स्वास्थ्य-शिक्षा पर जोर

पूर्व एल्डरमैन मनीष अग्रवाल ने कहा कि केंद्रीय बजट 2026-27 विकसित भारत की नींव रखने वाला सर्व-समावेशी बजट है।
उन्होंने बताया कि नया आयकर अधिनियम 1 अप्रैल 2026 से लागू होगा, जिससे नियम सरल और करदाता-अनुकूल बनेंगे।
स्वास्थ्य क्षेत्र में कैंसर सहित 17 नई दवाओं पर कस्टम ड्यूटी घटाने से इलाज सस्ता होगा।
छत्तीसगढ़ के लिए हर जिले में महिला छात्रावास, नए आयुर्वेदिक कॉलेज, 32 अमृत रेलवे स्टेशनों का कायाकल्प और सरगुजा-बस्तर में कौशल विकास से जुड़े प्रावधानों का उल्लेख किया गया।

त्रिलोक चंद्र श्रीवास: किसान-मजदूर उपेक्षित, शिक्षा बजट में कटौती
कांग्रेस नेता एवं अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के राष्ट्रीय समन्वयक त्रिलोक चंद्र श्रीवास ने बजट को निराशाजनक बताते हुए कहा कि देश की 80 प्रतिशत आबादी गांवों में रहती है, लेकिन बजट में गांव, किसान और मजदूरों के लिए विशेष प्रावधान नहीं हैं।
उन्होंने कहा कि किसान क्रेडिट कार्ड की सीमा आज भी 3 लाख रुपये ही है, जिसे बढ़ाया नहीं गया।
शिक्षा बजट में कटौती का आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि आम वर्ग को इस बजट से कोई ठोस राहत नहीं मिली।
रौशन सिंह: अंत्योदय और विकसित भारत का रोडमैप

भाजयुमो प्रदेश कार्यसमिति सदस्य रौशन सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा प्रस्तुत बजट समावेशी विकास का मील का पत्थर है।
उन्होंने कहा कि बजट में युवा, महिला, किसान और मध्यम वर्ग को प्राथमिकता दी गई है और यह नए भारत को वैश्विक विकास का अग्रदूत बनाने का रोडमैप प्रस्तुत करता है।
संजय शर्मा: कर्मचारियों में असंतोष, ओपीएस पर चुप्पी
छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष संजय शर्मा ने कहा कि हर जिले में गर्ल्स हॉस्टल, विदेश में पढ़ाई और इलाज जैसे प्रावधान सकारात्मक हैं, लेकिन आठवें वेतनमान और ओपीएस (पुरानी पेंशन योजना) को लेकर कोई स्पष्टता नहीं होने से कर्मचारी वर्ग निराश है।
एनपीएस और यूपीएस को लेकर कर्मचारियों की नाराजगी बनी हुई है।



