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क्रिकेट खेलने निकले तीन बच्चे लापता, 26 घंटे रेस्क्यू के बाद हसदेव नदी से तीनों के शव बरामद

Mohammed Israil
Mohammed Israil  - Editor
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हनुमान धारा इलाके में मिला साइकिल–कपड़ा–मोबाइल; तेज बहाव में डूबने की आशंका सच साबित

बिलासपुर, रायपुर, जांजगीर-चांपा।
हसदेव नदी के हनुमान धारा इलाके में मंगलवार सुबह क्रिकेट खेलने निकले तीन बच्चों की तलाश में शुरू हुआ रेस्क्यू ऑपरेशन दर्दनाक अंत के साथ खत्म हुआ। लगातार 26 घंटे की खोजबीन के बाद तीनों बच्चों के शव नदी से बरामद कर लिए गए। मृतकों में नेल्सन लकड़ा, रुद्र राज और यश राठौर शामिल हैं। तीनों मनका पब्लिक स्कूल के छात्र थे, जिनकी उम्र 11, 14 और 15 वर्ष बताई जा रही है।
सुबह क्रिकेट खेलने निकले, कॉल रिसीव नहीं हुआ – परिजन घबराए
मंगलवार सुबह करीब 11 बजे तीनों बच्चे घर से क्रिकेट खेलने निकले थे। उनके पास मोबाइल फोन भी था, लेकिन दोपहर बाद परिजनों का बार-बार किया गया कॉल रिसीव नहीं हुआ। जब बच्चे देर शाम तक घर नहीं लौटे, तो परिवारों में चिंता बढ़ने लगी।
परिजनों ने पहले आसपास और परिचितों में खोजबीन की, लेकिन कुछ पता नहीं चला। इसके बाद तुरंत पुलिस को सूचना दी गई।
हनुमान धारा रोड पर साइकिल–मोबाइल–कपड़े मिले, डूबने की आशंका
चांपा पुलिस ने लोकेशन ट्रेसिंग और आसपास की तफ्तीश शुरू की। इसी दौरान हनुमान धारा रोड, कुदरी बैराज के पास हसदेव नदी किनारे बच्चों की साइकिलें, मोबाइल फोन और कपड़े पड़े मिले।
स्थानीय लोगों ने पुलिस को बताया कि तीनों बच्चे नदी पार करते हुए दिखाई दिए थे, लेकिन वापस लौटते किसी ने नहीं देखा। इससे डूबने की आशंका और गहरी हो गई।
रातभर परिजन डटे रहे नदी किनारे, पिता में से एक ASI – माहौल गमगीन
घटना की गंभीरता को देखते हुए थाना प्रभारी सहित पुलिस अधिकारी, होमगार्ड और नगर सेना की टीमें मौके पर जुट गईं।
परिजन पूरी रात नदी किनारे ही बैठे रहे।
हादसे को और भी दर्दनाक बनाता है यह तथ्य कि मृत बच्चों में से एक का पिता ASI है, जो खुद रातभर टॉर्च लेकर बेटे की तलाश करता रहा।
तेज बहाव वाली हसदेव में कई हादसे पहले भी, सुबह गोताखोरों ने निकाले शव
इस क्षेत्र में पहले भी कई हादसे हो चुके हैं। हसदेव नदी का यह हिस्सा तेज बहाव, अनियंत्रित धारा और गहराई के लिए कुख्यात माना जाता है।
रातभर तलाशी के बाद बुधवार सुबह गोताखोरों और रेस्क्यू टीम की मदद से ऑपरेशन तेज किया गया और कुछ ही देर में नदी में बने एक गहरे हिस्से से तीनों बच्चों के शव बरामद कर लिए गए।
रेस्क्यू ऑपरेशन में होमगार्ड, नगर सेना और स्थानीय युवाओं की बड़ी भूमिका
खोजबीन के लिए छोटी नाव, रस्सियां, तैराक और गोताखोर लगाए गए।
होमगार्ड एवं नगर सेना की संयुक्त टीम लगातार नदी की तलहटी खंगालती रही।
स्थानीय युवा भी रातभर पानी में टॉर्च लेकर उतरते रहे।
पुलिस का कहना है कि “सभी संभावित क्षेत्रों में तलाश की गई, लेकिन नदी के एक हिस्से में गहराई ज्यादा होने से ऑपरेशन चुनौतीपूर्ण रहा।”
इनसाइट
अवैध रेत खनन ने नदी को बना दिया जानलेवा – हनुमान धारा के पास कुएं जैसे गड्ढे** इस दर्दनाक घटना के बाद एक बार फिर हसदेव नदी में हो रहे अवैध रेत खनन का मुद्दा सामने आ गया है।
लछनपुर रेत खदान से आगे बढ़कर अवैध उत्खनन
स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि लछनपुर रेत घाट के लिए निर्धारित क्षेत्र से निकलकर खनन माफिया नदी के भीतर तक भारी मशीनें उतार रहे हैं।
नई, अत्यधिक ताकतवर मशीनों से एक बार में बड़ी मात्रा में रेत खींची जा रही है, जिससे नदी की प्राकृतिक सतह टूटकर कुएं जैसे खतरनाक गड्ढे बन गए हैं।
10–20 हाइवा रोज, 40–50 ट्रैक्टर – खतरा और बढ़ा
ग्रामीणों के मुताबिक प्रतिदिन यहां से
10 से 20 हाइवा रेत,
और 40 से 50 ट्रैक्टर
गुजरते हैं।
भारी वाहनों की लगातार आवाजाही से आसपास के गांवों की सड़कें टूट चुकी हैं।
वन विभाग के लाखों पौधे कुचले जा रहे
हनुमान धारा के पास वन विभाग ने बड़ी संख्या में पौधे लगाए थे, लेकिन अवैध रेत ढोने वाले ट्रैक्टर इन पौधों को कुचलते हुए निकलते हैं, जिससे वन क्षेत्र गम्भीर रूप से प्रभावित हो रहा है।
स्थानीय प्रशासन पर सवाल – सुरक्षा चिन्ह, चेतावनी बोर्ड क्यों नहीं?
नदी में हर वर्ष कई लोग डूबते हैं, इसके बावजूद
चेतावनी बोर्ड,
सुरक्षा घेरा,
लाइफ जैकेट,
गश्त
जैसी बुनियादी व्यवस्थाएं नहीं हैं।
स्थानीय लोगों का सवाल है कि अगर नदी के खतरनाक हिस्सों की पहचान कर सुरक्षा इंतजाम किए गए होते, तो शायद बच्चों की जान बच सकती थी।
समापन – तीन परिवारों की जिंदगी उजड़ गई, नदी के अवैध दोहन पर कार्रवाई की मांग
तीन मासूमों की मौत से जांजगीर-चांपा में शोक की लहर है।
परिजन अब फूट-फूटकर रो रहे हैं और प्रशासन से मांग कर रहे हैं कि—
“हसदेव नदी में अवैध रेत खनन बंद कराएं, तभी ऐसे हादसे रुकेंगे।”
यह घटना सिर्फ एक दुर्घटना नहीं, बल्कि अवैध खनन, प्रशासनिक लापरवाही और सुरक्षा इंतजामों की कमी का भयावह नतीजा है।

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