Latest news

*छत्तीसगढ़ में कांग्रेस कार्यकर्ताओं और प्रतिबद्ध मतदाताओं पर ‘चुनावी टारगेट’*

Mohammed Israil
Mohammed Israil  - Editor
9 Min Read

*भाजपा और निर्वाचन आयोग पर गंभीर आरोप — कांग्रेस नेता विजय केशरवानी का बड़ा दावा*


बिलासपुर।
छत्तीसगढ़ की राजनीति में उस समय हलचल मच गई जब जिला कांग्रेस कमेटी (ग्रामीण) के पूर्व अध्यक्ष और बेलतरा विधानसभा से कांग्रेस के पूर्व प्रत्याशी विजय केशरवानी ने भाजपा और निर्वाचन आयोग पर गंभीर और सनसनीखेज आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि राज्य में कांग्रेस कार्यकर्ताओं और प्रतिबद्ध मतदाताओं को चुनावी प्रक्रिया से सुनियोजित ढंग से बाहर किया जा रहा है, और यह सब भाजपा की शह पर निर्वाचन आयोग द्वारा योजनाबद्ध तरीके से किया जा रहा है।
“कांग्रेस कार्यकर्ताओं और प्रतिबद्ध वोटरों को जानबूझकर टारगेट किया जा रहा है”
पत्रकार वार्ता में दस्तावेजी प्रमाणों के साथ आरोपों को सार्वजनिक करते हुए विजय केशरवानी ने कहा —
“मेरा पूरा परिवार वर्षों से बिलासपुर के नर्मदा नगर में निवासरत है। मैं नगर निगम का पार्षद रहा हूं, एमआईसी मेंबर रहा हूं, कांग्रेस संगठन में जिला कांग्रेस कमेटी, युवा कांग्रेस और छात्र संगठन का अध्यक्ष रहा हूं। 2018 के विधानसभा चुनाव में मैंने बेलतरा विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ा था। मेरे नामांकन पत्र में नर्मदा नगर का निवास प्रमाण और मतदाता सूची का विवरण निर्वाचन आयोग में विधिवत जमा किया गया था।”
उन्होंने बताया कि एसआईआर (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) के दौरान भी उन्होंने अपने वार्ड के बीएलओ को फॉर्म जमा किया था। इसके बावजूद, उनके मतदाता नाम को बिलासपुर से हटाकर सैकड़ों किलोमीटर दूर भिलाई नगर के वार्ड क्रमांक 54 में शामिल कर दिया गया।
“यह कोई त्रुटि नहीं, सुनियोजित साजिश है”
विजय केशरवानी ने कहा कि
“यह सब भाजपा के इशारे पर आयोग द्वारा चुपके-चुपके किया जा रहा है। यह कोई गलती या लिपिकीय त्रुटि नहीं है, बल्कि एक गहरी रणनीति के तहत मतदाता सूची में हेराफेरी की जा रही है।”
उन्होंने कहा कि जब एक ऐसे व्यक्ति का नाम, जो स्वयं विधायक प्रत्याशी रह चुका है और जिसके सभी दस्तावेज निर्वाचन आयोग के पास मौजूद हैं, भिलाई नगर के वार्ड की मतदाता सूची में पहुंच सकता है, तो सामान्य कांग्रेस कार्यकर्ताओं और आम प्रतिबद्ध मतदाताओं के साथ क्या हो सकता है, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है।
1 — केशरवानी का सीधा बयान
“मैं खुद प्रत्यक्ष प्रमाण हूं। आयोग चाहे तो नाम रखे, चाहे तो हटा दे। जब एक विधायक प्रत्याशी का नाम ग़लत जगह दर्ज हो सकता है, तो आम कार्यकर्ता और मतदाता किस भरोसे पर रहें?”
मतदाता सूची में हेराफेरी पर उठे सवाल
केशरवानी ने कहा कि इस पूरे घटनाक्रम ने यह साबित कर दिया है कि निर्वाचन आयोग में अंदरखाने कुछ बहुत गंभीर गड़बड़ चल रही है।
उन्होंने कहा कि अब सवाल यह है—
भिलाई नगर के वार्ड 54 की मतदाता सूची में मेरा नाम कैसे शामिल कर दिया गया?
क्या मेरा नाम कभी भिलाई नगर की किसी मतदाता सूची में रहा था — चाहे 2003 में या 2025 में?
जब बीएलओ स्थानीय स्तर पर घर-घर जाकर फार्म भर रहे थे, तो भिलाई नगर के बीएलओ को मेरा फॉर्म कहां से और कैसे मिल गया?
उसने मेरे नाम को निर्वाचन आयोग की डिजिटल सूची में अपलोड कैसे कर दिया?
उन्होंने कहा,
“यह केवल clerical error नहीं हो सकता। यह सीधा-सीधा मतदाता सूची से नाम हटाने और फिर मुझे भाजपा द्वारा ‘घुसपैठिया’ साबित करने की साजिश है।”
2 — सवाल जो आयोग को जवाब देना होगा
“अगर मेरा नाम न 2025 की सूची में था, न 2003 की, तो अब कैसे और किस कारण से मेरा नाम भिलाई नगर के वार्ड की सूची में जोड़ दिया गया?
बीएलओ को किसने निर्देश दिया?
आयोग इस पर चुप क्यों है?”
“यह सिर्फ मेरी नहीं, कांग्रेस के हर कार्यकर्ता की लड़ाई है”
केशरवानी ने कहा कि यह मामला व्यक्तिगत नहीं है, बल्कि कांग्रेस के हर कार्यकर्ता और कांग्रेस विचारधारा से जुड़े लोगों के अस्तित्व से जुड़ा है।
उन्होंने कहा,
“यह सिर्फ नाम काटने या स्थानांतरित करने का मामला नहीं, बल्कि प्रतिबद्ध मतदाताओं की आवाज़ दबाने की कोशिश है।”
उन्होंने चेतावनी दी कि कांग्रेस कार्यकर्ताओं और मतदाताओं को अब अपने मतदाता नाम और पते की जांच करनी चाहिए
“निर्वाचन कार्यालय जाकर यह सुनिश्चित करें कि आपका नाम सही वार्ड में दर्ज है या नहीं, और जो पता आपने एसआईआर में दिया था, वही लिस्ट में दर्ज हुआ है या नहीं।”
राहुल गांधी के आरोपों को बताया ‘सौ फीसदी सच’
विजय केशरवानी ने कहा कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा बिहार चुनाव के दौरान लगाए गए “वोट चोरी” के आरोप अब छत्तीसगढ़ में प्रमाणित हो रहे हैं।
उन्होंने कहा—
“राहुल गांधी ने बिहार में जो बात कही थी, वह सौ फीसदी सच थी। बिहार में लोकसभा चुनाव के दौरान जिन मतदाताओं ने वोट डाला था, उन्हीं के नाम विधानसभा चुनाव से पहले हटा दिए गए थे। अब वही रणनीति भाजपा और आयोग मिलकर छत्तीसगढ़ में अपना रहे हैं।”
3 — राहुल गांधी का संदर्भ
“राहुल गांधी ने जो कहा था, वह अब मेरे अनुभव से साबित हो रहा है। बिहार में जो हुआ, वही अब छत्तीसगढ़ में दोहराया जा रहा है। वोट चोरी की यह रणनीति सुनियोजित और राष्ट्रीय स्तर पर फैली हुई है।”
“अब समय है आयोग की पोल खोलने का”
पत्रकार वार्ता में विजय केशरवानी ने कहा कि अब कांग्रेस इस मामले को राज्यव्यापी आंदोलन में बदलने जा रही है।
उन्होंने कहा कि—
शहर से लेकर गांव तक ‘आयोग की पोल खोलो अभियान’ चलाया जाएगा।
हर कांग्रेस कार्यकर्ता को अपने और अपने परिचितों के मतदाता नाम की जांच करने की जिम्मेदारी दी जाएगी।
इस मामले की जानकारी प्रदेश कांग्रेस नेतृत्व और वरिष्ठ नेताओं को दे दी गई है।
अभियान का मकसद है कि “कांग्रेस के एक-एक कार्यकर्ता को सजग और सतर्क बनाया जाए, ताकि भाजपा और आयोग की यह योजना नाकाम हो।”
4 — चेतावनी और अपील
“आयोग के भरोसे रहने से बड़ी चूक हो जाएगी।
समय रहते सतर्क रहना जरूरी है।
हर कांग्रेस कार्यकर्ता, समर्थक और प्रतिबद्ध मतदाता को अपने मतदाता पहचान और नाम की स्थिति खुद जांचनी होगी।”
छत्तीसगढ़ के बाद क्या यह मुद्दा राष्ट्रीय राजनीति तक जाएगा?
केशरवानी के आरोपों ने छत्तीसगढ़ की राजनीति में हलचल मचा दी है।
इन आरोपों से कांग्रेस को एक राजनीतिक नैरेटिव मिल गया है कि भाजपा मतदाता सूची में फेरबदल करके “लोकतंत्र की बुनियाद — मताधिकार” पर हमला कर रही है।
वहीं, यह मुद्दा आने वाले चुनावों में राष्ट्रीय राजनीतिक विमर्श का हिस्सा भी बन सकता है, क्योंकि कांग्रेस नेतृत्व पहले ही “वोट चोरी” और “लोकतांत्रिक संस्थाओं के दुरुपयोग” को भाजपा के खिलाफ बड़ा हथियार बना चुका है।
5 — राजनीतिक विश्लेषण
“बिलासपुर के मतदाता का नाम भिलाई की सूची में दर्ज होना सिर्फ एक नाम की गड़बड़ी नहीं, बल्कि यह सवाल है कि क्या लोकतंत्र में अब मतदाता की पहचान भी राजनीतिक सुविधा से तय होगी?”
विजय केशरवानी का अंतिम वक्तव्य
“यह अब केवल मेरा मुद्दा नहीं है।
यह हर उस कांग्रेस कार्यकर्ता, हर उस प्रतिबद्ध मतदाता का मामला है जो लोकतंत्र में विश्वास रखता है।
अब हमें खुद आगे आकर इस सुनियोजित साजिश का पर्दाफाश करना होगा।
आयोग को जवाब देना ही होगा — यह गलती नहीं, यह खेल है, और यह खेल जनता के वोट के साथ हो रहा है।”

खबर को शेयर करने के लिए क्लिक करे।।